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'मुलायम जी से छीनी कुर्सी चाचा को देना चाहते हैं अखिलेश...' बोले केशव प्रसाद मौर्य

यूपी सरकार में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव और शिवपाल यादव को लेकर बड़ा बयान दिया है. इससे सियासी गलियारों में हलचल बढ़ गई है. केशव प्रसाद मौर्य का दावा है कि किसी जिम्मेदार शख्स ने उन्हें बताया है कि अखिलेश राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी अपने चाचा शिवपाल यादव को देना चाहते हैं.

मुलायम सिंह यादव अखिलेश यादव और केशव प्रसाद मौर्य (फाइल फोटो) मुलायम सिंह यादव अखिलेश यादव और केशव प्रसाद मौर्य (फाइल फोटो)
पंकज श्रीवास्तव
  • प्रयागराज,
  • 23 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 6:25 PM IST

उत्तर प्रदेश सरकार में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने एक बयान देकर सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है. उनका कहना है कि किसी शख्स ने उन्हें बताया कि अखिलेश यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की कुर्सी अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव को देना चाहते हैं. इसके साथ ही मौर्य ने अखिलेश पर तंज भी कसा है.

संगम नगरी प्रयागराज पहुंचे डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने शिवपाल यादव को सपा में कोई बड़ी जिम्मेदारी न देने पर अखिलेश यादव पर कसा है. उन्होंने कहा कि अगर शिवपाल चुनावी चाचा होंगे तो ठगे जाएंगे और चाचा मानेंगे तो कुछ देंगे.

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चाचा को पद देकर आरोप से बरी होना चाहते हैं

उन्होंने कहा है कि मुझे कल कोई बता रहा था कि अखिलेश यादव ने पार्टी अध्यक्ष का पद अपने पिता मुलायम सिंह यादव जी से छीना था. अब वो चाचा को ये पद देकर उस आरोप से बरी होना चाहते हैं. मौर्य का दावा है कि ये बात उन्हें काफी जिम्मेदार शख्स ने बताई है.

2024 और 2027 में उनके लिए कुछ शेष नहीं है

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने 2024 और 2027 के चुनाव में अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के साथ रहने की बात पर कहा कि इस बार मैनपुरी की जनता ने श्रद्धांजलि स्वरूप डिंपल यादव को जिताया है. हमने उनको बधाई दे दी है, लेकिन 2024 और 2027 में उनके लिए कुछ शेष नहीं है.

समाजवादी पार्टी नहीं चाहती कि समय पर चुनाव हों

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इससे पहले निकाय चुनावों के बढ़ते इंतजार के लिए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी को दोषी बताया था. उन्होंने कहा था कि समाजवादी पार्टी नहीं चाहती कि समय पर चुनाव हों, इसलिए अड़ंगा डालने के लिए सपा एक बड़े नेता के भाई के माध्यम से अड़चन पैदा कर रही है. योगी सरकार और भाजपा समय पर निकाय चुनाव कराने के लिए तैयार है.

समाजवादी पार्टी को लोकतांत्रिक मूल्यों में भरोसा नहीं

बुधवार को मौर्य ने कहा कि समाजवादी पार्टी को लोकतांत्रिक मूल्यों में कोई भरोसा नहीं है. अखिलेश यादव और उनके नेताओं की मानसकिता दलित, पिछड़ा और महिला विरोधी है. वंचित तबके के बढ़ते प्रतिनिधित्व से समाजवादी पार्टी घबराई हुई है. सपा को आशंका है कि अगर इस वक्त चुनाव हुए तो शहरी निकायों में उसे बड़ी हार का सामना करना पड़ेगा.

 

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