
यूपी के कानपुर रेलवे स्टेशन परिसर में आरपीएफ (RPF) को एक युवक दिखा, जो फटे-पुराने कपड़े पहने था. प्रचंड गर्मी में उसकी हालत देख आरपीएफ वालों ने उसे पानी पिलाया. जिसपर युवक ने उन्हें धन्यवाद कहा. लेकिन आरपीएफ वालों का माथा उस वक्त ठनका जब उसने पढे-लिखे शख्स की तरह बात करनी शुरू की. अंग्रेजी में उसकी बात सुनकर लोगों ने युवक का परिचय पूछा तो सच्चाई जानकर वे हैरान रह गए. आइए जानते हैं पूरी कहानी...
दरअसल, गर्मी के माहौल में पानी के लिए तरसते एक भिखारी जैसे दिखने वाले युवक को कानपुर सेंट्रल पर आरपीएफ के इंस्पेक्टर ने जब पानी पिलाया तो उसने थैंक्यू कहा. उस भिखारी के बोलने के स्टाइल और अंग्रेजी बोलने का ढंग देखकर इंस्पेक्टर को समझने में देर नहीं लगी कि यह कोई पढ़ा-लिखा युवक है. इसके बाद जब आरपीएफ वालों ने उससे पूछताछ की तो दो साल पहले युवक के अपहरण और प्रताड़ना की कहानी का दर्द सामने आ गया.
इसके बाद आरपीएफ द्वारा पुलिस के माध्यम से युवक के घरवालों को सूचना दी गई. सूचना मिलने पर युवक के भाई और परिजन खुद उसे लेने कानपुर सेंट्रल पहुंचे. उन्होंने बताया कि उनका परिवार संपन्न है. यह युवक 2 साल पहले गायब हो गया था, जिसको काफी खोजा गया था. लेकिन आज वह भिखारी के रूप में मिला है. इसपर दुख तो हो रहा है लेकिन उसके मिलने की खुशी बहुत ज्यादा है.
जानिए पूरी कहानी
मामला 27 अप्रैल का है जब कानपुर सेंट्रल पर आरपीएफ इंस्पेक्टर बीपी सिंह की टीम अपने सहकर्मियों के साथ गश्त कर रही थी. इस दौरान इन लोगों को कानपुर सेंट्रल पर एक युवक पानी की तलाश में दिखाई पड़ा. उसकी दाढ़ी बढ़ी हुई थी, कपड़े गंदे थे और बाल बड़े-बड़े थे. देखने से वो भिखारी समझ आ रहा था. क्योंकि, वह पानी की खाली बोतलों को स्टेशन के कूड़ेदान में उठा-उठा कर देख रहा था.
इसपर आरपीएफ के लोगों ने उसे पानी पिलाया. पानी पीते ही उसने हाथ जोड़कर अंग्रेजी में धन्यवाद कहा. उसकी भाषा शैली देखकर आरपीएफ को शक हुआ तो उन्होंने उससे पूछताछ की. जिसपर युवक ने अपनी दर्दभरी कहानी सुनाई.
2 साल पहले हुआ था अपहरण
युवक ने अपना नाम महावीर सिंह बताया. उसने कहा कि वह औरैया जिले के बिधूना का रहने वाला है और 2 साल से अपने घर से दूर है. दो साल पहले जब वह एटीएम से पैसा निकालने गया था तभी कार सवार कुछ लोगों ने उसका अपहरण कर लिया था. फिर उसको बेहोश करके किसी कमरे में बंद कर दिया. उसके बाद कई महीनों तक उसको एक खदान में ले जाकर मजदूरी कराई जाती रही. विरोध करने पर मारपीट की जाती थी. ना ढंग का खाने को मिलता और ना पहनने को कपड़े.
एक दिन महावीर सिंह किसी तरह उनके चंगुल से भाग निकला. फिर कई ट्रेन चेंज करने के बाद वह बिहार के दरभंगा पहुंच गया. दरभंगा से किसी तरह कानपुर सेंट्रल पहुंचा. लेकिन उसके पास ना तो खाने के पैसे थे और ना ही ढंग के कपड़े. लोग उसे भिखारी समझ रहे थे. भूख के चलते वो भी अपनी पहचान उजागर नहीं कर रहा था और मांगकर खाना खा ले रहा था.
जब आरपीएफ के लोगों ने महावीर से उसके घर वालों का नंबर पूछा तो उसने अपने भाई रवींद्र सिंह का नंबर दिया. रवींद्र गुड़गांव में एक कंपनी में काम करते हैं. जैसे ही उनको पता चला कि उनका भाई महावीर सिंह कानपुर में आरपीएफ के थाने में मौजूद है, वह गुड़गांव से सीधे वहां पहुंच गए. इधर, घर के बाकी सदस्य भी मौके पर आ गए.
जैसे ही कानपुर स्टेशन पर महावीर से परिजनों की मुलाकात हुई उनकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए. उन्होंने बताया कि हम लोगों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन महावीर का कुछ पता नहीं चला. उसके सामान्य होने के बाद आगे की कार्यवाही करेंगे.