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Lucknow: साहित्य एवं संगीत जगत की दिग्गज हस्ती कमला श्रीवास्तव का निधन, 93 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस

लोक संगीत गायिका प्रोफेसर कमला श्रीवास्तव (Kamla Srivastava) का निधन हो गया है. उन्होंने 93 वर्ष की आयु में लखनऊ में अंतिम सांस ली. वह काफी समय से बीमार चल रही थीं. उनके निधन पर साहित्य एवं संगीत जगत में शोक की लहर है.

कमला श्रीवास्तव (फ़ाइल फोटो) कमला श्रीवास्तव (फ़ाइल फोटो)
aajtak.in
  • लखनऊ ,
  • 06 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 1:15 PM IST

भारतीय लोक संगीत गायिका और भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय (Bhatkhande Sanskriti Vishwavidyalaya) की पूर्व प्रोफेसर कमला श्रीवास्तव (Kamla Srivastava) का निधन हो गया है. उन्होंने 93 वर्ष की आयु में लखनऊ में अंतिम सांस ली. वह काफी समय से बीमार चल रही थीं. उनके निधन पर साहित्य एवं संगीत जगत में शोक की लहर है.  

जानकारी के मुताबिक, कमला श्रीवास्तव का निधन रविवार देर रात कार्डियो-श्वसन फेल्योर के कारण हुआ. वह लगभग एक महीने से श्वसन संबंधी समस्याओं से पीड़ित थीं. अपने जीते जी उन्होंने देहदान की इच्छा व्यक्त की थी. ऐसे में अंतिम दर्शन के बाद बीते दिन उनका पार्थिव शरीर किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (लखनऊ) को सौंप दिया गया. 

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कमला श्रीवास्तव के परिवार में उनका बेटा, बहू और एक पोती है. यश भारती और यूपी संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कमला श्रीवास्तव ने अवधी लोक गीतों के प्रचार-प्रसार में बहुत बड़ा योगदान दिया है. 

दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि 

अपने कॉलेज के दिनों में कमला श्रीवास्तव से ट्रेनिंग हासिल करने वाली महशूर लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने कहा कि लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत को आकार देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी. वह हमेशा अपने ज्ञान को सर्वोत्तम संभव तरीके से साझा करना पसंद करती थी. कमला दीदी समय से बहुत आगे थीं, क्योंकि वह उस समय की कुछ गायिकाओं में से थीं, जब गायन आज की तरह लोकप्रिय नहीं था. उनका निधन एक अपूरणीय क्षति है और उनके जैसा कोई फिर कभी नहीं होगा. 

वहीं, कमला श्रीवास्तव से करीबी तौर पर जुड़े रहे उस्ताद युगांतर सिन्दूर ने कहा- लखनऊ से संगीत के एक युग का अवसान हो गया है. हमारी कम से कम हर 15 दिन में एक बार टेलीफोन पर बातचीत होती थी. उनके निधन से एक खालीपन आ गया है. 

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इसके पूर्व साहित्यकार पद्मश्री डॉक्टर विद्या विंदु सिंह, वरिष्ठ लोक गायिका पद्मा गिडवानी, लोक संस्कृति शोध संस्थान की सचिव सुधा द्विवेदी समेत कला और साहित्य से जुड़े तमाम लोगों ने संगीत विदुषी के अंतिम दर्शन किये.  

मालूम हो कि प्रोफेसर कमला श्रीवास्तव का जन्म 1 सितंबर 1933 को हुआ था. वह कलाकारों और कवियों के परिवार से थीं. कमला श्रीवास्तव ऑल इंडिया रेडियो, दूरदर्शन पर लोक संगीत और शास्त्रीय संगीत गाती थीं. साथ ही एक कवयित्री के तौर पर अवधी, भोजपुरी और हिंदी में गीत लिखती थीं.  

उन्होंने 8 जनवरी 2010 को अपनी पुस्तक गीत वाटिका प्रकाशित की. उन्हें संगीत नाटक अकादमी और अन्य पुरस्कार, प्रशस्ति पत्र प्राप्त हुए. मार्च 2016 में उत्तर प्रदेश सरकार के सर्वोच्च पुरस्कार यश भारती से भी सम्मानित किया गया. 

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