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अतीक की पत्नी शाइस्ता फरार, बसपा को नए प्रत्याशी की तलाश... गड़बड़ा न जाए मायावती का दलित-मुस्लिम दांव?

माफिया अतीक अहमद की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है. उमेश पाल अपहरणकांड में अतीक को उम्रकैद की सजा हो गई है तो उमेश पाल हत्याकांड में पत्नी शाइस्ता परवीन फरार चल रही हैं. बसपा ने प्रयागराज में उन्हें मेयर का प्रत्याशी बना रखा था, लेकिन अब उनकी जगह पार्टी नए कैंडिडेट की तलाश में है.

मायावती और अतीक अहमद मायावती और अतीक अहमद
कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली ,
  • 30 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 2:01 PM IST

उत्तर प्रदेश की सियासत में बसपा के सियासी वजूद को बचाए रखने के लिए मायावती दलित-मुस्लिम फॉर्मूले पर काम कर रही है. इस सियासी कॉम्बिनेशन के साथ 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा जाना चाहती है. ऐसे में सूबे के नगर निगम चुनाव में पार्टी की अपने मास्टर प्लान का टेस्ट करने की प्लानिंग थी. सूबे में कम से कम सात मेयर सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारने की रणनीति बनाई गई थी, लेकिन जमीन पर उतरने से पहले ही संकट गहराने लगा है. 

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अतीक की पत्नी का टिकट कटेगा? 

बसपा ने माफिया अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन को प्रयागराज के नगर निगम सीट से मेयर पद का चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रखी थी, लेकिन अब बसपा के सुर बदलने लगे हैं. उमेश पाल अपहरण कांड में बाहुबली अतीक अहमद को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है तो उमेश पाल हत्याकांड में शाइस्ता परवीन मुख्य आरोपी हैं. पुलिस शाइस्ता की तलाश कर रही है. ऐसे में बसपा ने मन बना लिया है कि अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन की जगह अब किसी अन्य को चेहरे को चुनाव लड़ाएगी. 

बता दें कि उमेश पाल हत्याकांड से करीब दो महीने पहले अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन बसपा में शामिल हुई थीं. माफिया अतीक की पत्नी के सहारे बसपा प्रयागराज इलाके में अपनी खोई साख को पाने के साथ-साथ दलित-मुस्लिम फॉर्मूले को अमलीजामा पहनाने की कोशिश में जुटी थी, लेकिन मायावती की इस पूरी रणनीति में उमेश पाल हत्याकांड ने पलीता लगा दिया है, क्योंकि इस मामले का आरोप अतीक के परिवार पर लगा है.

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बसपा के सुर क्यों बदल रहे हैं 

वहीं, मायावती अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन को पार्टी से बाहर न निकालने की बात कहकर खुद उनके साथ खड़ी नजर आ रही थीं. शाइस्ता पर एक्शन न लेकर मायावती मुस्लिमों को सियासी संदेश देने की कवायद जरूर कर रही थी कि महज आरोप-प्रत्यारोप से वह शाइस्ता को पार्टी से बाहर नहीं करेंगी. हालांकि, उन्होंने यह बात जरूर कही है कि शाइस्ता को जांच में दोषी साबित होने के बाद ही पार्टी से निष्कासित किया जाएगा, लेकिन अब निगम चुनाव की आहट और अतीक को सजा सुनाए जाने के बाद बसपा के सुर बदल गए हैं. 

निकाय चुनाव को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी और कैबिनेट से मंजूरी के बाद बसपा अतीक की पत्नी शाइस्ता को चुनाव लड़ाने के लिए अपना फैसला बदल रही है. मेयर पद पर आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद बसपा प्रयागराज मेयर सीट के लिए शाइस्ता परवीन की जगह किसी अन्य को उम्मीदवार बनाएगी. नगर निगम सीटों को आरक्षण लिस्ट जारी होने के बाद पार्टी प्रयागराज में नए उम्मीदवार के नाम की औपचारिक घोषणा करेगी. 

शाइस्ता फरार कैसे लड़ेंगी चुनाव

उमेश पाल हत्याकांड में शाइस्ता परवीन को पुलिस ने फरार घोषित कर रखा है. शाइस्ता के परिवार के ज्यादातर लोग जेल में हैं या फिर फारार हैं. ऐसे में बसपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि कैसे शाइस्ता परवीन मेयर का चुनाव लड़ेंगी. इतना ही नहीं, शाइस्ता को चुनाव कौन लड़ाएगा और उनके लिए प्रचार-प्रसार कौन करेगा. नगर निगम चुनाव के सियासी सरगर्मी बढ़ गई है और शाइस्ता परवीन फरारी काट रही हैं.

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अतीक-अशरफ जेल में है और उनका बेटा भी फरार चल रहा है. ऐसे में बसपा अब उनकी जगह नए उम्मीदवार की तलाश में जुट गई है, लेकिन अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन के सियासी कद के बराबर का प्रत्याशी की खोजना आसान नहीं है. प्रयागराज इलाके में बसपा के तमाम दिग्गज नेता पहले ही पार्टी छोड़कर जा चुके हैं. ऐसे में अतीक अहमद के परिवार से बसपा को काफी उम्मीदें थी, लेकिन अब उमेश पाल हत्याकांड के बाद पार्टी के लिए नई चुनौती खड़ी हो गई है. 

2017 में बसपा के दो मेयर जीते थे
बसपा दलित-मुस्लिम फॉर्मूले से ही 2017 के नगर निगम चुनाव में अपने दो मेयर बनाने में सफल रही थी जबकि सपा खाता भी अपना नहीं खोल सकी थी. सूबे की 16 नगर नगर निगम में से 14 में बीजेपी और दो में बसपा के मेयर बने थे. अलीगढ़ में मेयर का चुनाव बसपा के टिकट पर फुरकान अहमद जीते थे तो मेरठ में योगेश वर्मा की पत्नी सुनीता वर्मा जीती थीं. सुनीता वर्मा की जीत में बसपा नेता याकूब कुरैशी की अहम भूमिका रही थी. बसपा सहारनपुर और झांसी के मेयर पद का चुनाव में बहुत मामूली वोट से हार गई थी. सहारनपुर में मेयर का चुनाव बसपा प्रत्याशी हाजी फजलुर्रहमान महज 2 हजार वोटों से हारे थे. 

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बसपा कैसे मुस्लिमों को साधेगी

आगरा नगर निगम में भी बसपा नंबर दो पर रही थी. आगरा में दलितों की आबादी करीब 3 से 3.5 लाख हैं. मुस्लिम समाज के भी करीब एक से डेढ़ लाख वोटर हैं. ऐसे में बीजेपी को बसपा अगर हराती हुई नजर आती है तो मुस्लिम वोट एकजुट हो सकते हैं. इसी तरह से गोरखपुर, प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, फिरोजबाद, मुरादाबाद सहित अन्य दूसरे नगर निगम में भी पैटर्न दिख सकता है. इसीलिए मायावती का पूरा फोकस नगर निगम चुनाव में मुस्लिमों पर है.

पश्चिम यूपी के मुस्लिम चेहरा इमरान मसूद को पहले बसपा में लिया और फिर उनकी पत्नी साइमा मसूद को सहारनपुर नगर निगम में मेयर का प्रत्याशी बनाया. प्रयागराज से अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन को प्रयागराज नगर निगम सीट से मेयर का प्रत्याशी बनाया था. मेरठ के पूर्व सांसद शाहिद अखलाक के छोटे भाई राशिद अखलाक बसपा के टिकट पर मेरठ की मेयर सीट से चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रखी थी, लेकिन अब शाइस्ता परवीन की जगह दूसरे प्रत्याशी की तलाश है तो अलीगढ़ के मौजूदा मेयर फुरकान ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं. इससे मायावती के दलित-मुस्लिम फार्मूले को बड़ा झटका लग सकता है.

 

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