
उमेश पाल अपहरण कांड में उम्रकैद की सजा पाने के बाद माफिया अतीक अहमद आज शाम साबरमती जेल पहुंच गया है. इस दौरान आजतक से खास बातचीत में अतीक अहमद ने कहा कि मैं बेगुनाह हूं और सजा को हाई कोर्ट में चुनौती दूंगा. पुलिस वैन में बैठे अतीक ने जेल में सुविधा मिलने से लेकर फरार बेटे असद से जुड़े हर सवाल का जवाब दिया.
पर्दे से ढके वैन में बैठे अतीक अहमद ने सबसे पहले मीडिया का धन्यवाद देते हुए कहा कि मैं उच्च न्यायालय जाऊंगा. साबरमती जेल पहुंचने पर अतीक ने कहा कि आपको लोगों (मीडिया) का बहुत-बहुत धन्यवाद, आप लोगों ने मेरी बहुत मदद की, उमेश पाल के मर्डर के वक्त मैं जेल में था, आरोप एक अलग चीज है...'
आजतक से बातचीत में माफिया अतीक अहमद ने कहा कि मेरी पत्नी शाइस्ता की कल जमानत पर सुनवाई होनी और मुझे असद के बारे में कुछ पता नहीं है... मेरी कोई बातचीत नहीं हुई है क्योंकि जेल में फोन नहीं चलता है... यहां जैमर लगा हुआ है... उनको कहने दो जो कह रहे हैं... जेल में हमको कोई सुविधा नहीं मिल रही है, आम कैदी की तरह रहता हूं.'
साबरमती जेल भेजने की कर रहा था गुजारिश
गौरतलब है कि जरायम की दुनिया में जिस अतीक अहमद तूती बोलती थी, वह कल यानी 28 मार्च को प्रयागराज की एमपी-एमएलए कोर्ट में बेबस नजर आया था. 17 साल पुराने केस में अतीक को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. उमेश पाल अपहरण कांड में अतीक अहमद, हनीफ और दिनेश पासी को प्रयागराज की एमपी-एमएलए अदालत ने दोषी करार दिया.
फिर इन तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. इसके साथ ही एक-एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति लगाई गई. सजा सुनने के बाद अतीक अहमद ने प्रयागराज की एमपी-एमएलए कोर्ट से गुजारिश करते हुए कहा था, 'मुझे साबरमती जेल में ही भेज दो, मुझे यहां नहीं रहना, पुलिस मुझपर केस लाद देगी.' इसके बाद अतीक अहमद को प्रयागराज कोर्ट से वापस नैनी सेंट्रल जेल पहुंचाया गया.
लेकिन उसे नैनी जेल में रखने का ऑर्डर पुलिस के पास नहीं थी. इसी वजह से करीब चार घंटे बाद उसे साबरमती जेल रवाना किया गया. आज देर शाम अतीक अहमद साबरमती जेल पहुंच गया है.
किस केस में अतीक को हुई है उम्रकैद की सजा?
अतीक को राजू पाल हत्याकांड के चश्मदीद उमेश पाल के अपहरण केस में सजा मिली है. उमेश पाल का 28 फरवरी 2006 को अतीक अहमद ने अपहरण कर लिया था.उमेश पाल को अगवा करके कर्बला इलाके के दफ्तर में ले जाया गया. उसे मारा पीटा गया. बिजली के झटके तक दिये गये और हलफनामे पर जबरन दस्तखत करा लिया गया.
इसके बाद 1 मार्च 2006 को अदालत में उमेश पाल से ये गवाही भी दिला दी गई कि राजू पाल की हत्या के वक्त वो यानी खुद उमेश घटना स्थल पर मौजूद नहीं था. अतीक अहमद ने एक बार तो अदालत में उमेश पाल से अपने पक्ष में गवाही दिला ली थी लेकिन 2007 में यूपी की सरकार बदलते ही उमेश पाल ने 5 जुलाई को केस दर्ज करा दिया.
उमेश पाल ने तत्कालीन सांसद अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ के अलावा 10 अन्य के खिलाफ अपहरण, मारपीट, धमकी जैसे गुनाहों के आरोप में मुकदमा दर्ज करा दिया था. पुलिस की रिपोर्ट दाखिल होते ही 2009 में अदालत ने आरोप तय कर दिये थे. इसके बाद अदालत में गवाही का सिलसिला शुरू हुआ तो उमेश पाल की ओर से पुलिसकर्मियों समेत कुल 8 गवाह पेश हुए जबकि अतीक गैंग ने 54 गवाहों से गवाही दिला दी थी.
इसके बाद जब उमेश पाल के मुकदमे की सुनवाई में देर होने लगी तो उमेश पाल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाईकोर्ट के आदेश के बाद 2 महीने में सुनवाई पूरी की गई और उसी सुनवाई में आखिरी गवाही देने के बाद उमेश पाल घर लौटे थे जब उनकी हत्या हो गई. उमेश पाल की हत्या का भी आरोप अतीक अहमद पर है.