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यूपी: ऐन मौके पर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में नहीं शामिल हो पाए बच्चे, मंडल स्तर पर थे चैंपियन, Maharajganj में बेसिक शिक्षा विभाग पर लापरवाही का आरोप

बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में पढ़ने वाले खिलाड़ियों की प्रतिभा निखारने के लिए सरकार समय-समय पर तमाम खेल आयोजित करती है, जिनके लिए पैसे पानी की तरह बहाए जाते हैं. जो खिलाड़ी चैंपियन होते हैं उन्हें राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग कराने की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग की होती है. शासन ने इसके लिए धन भी दिया था. मगर बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी मंडल चैंपियन बच्चों को लखनऊ ले जाने में हाथ खड़ा कर दिया.

महराजगंज: मंडल स्तर पर चैंपियन रहे बच्चे महराजगंज: मंडल स्तर पर चैंपियन रहे बच्चे
अमितेश त्रिपाठी
  • महराजगंज ,
  • 16 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 11:13 AM IST

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में बेसिक शिक्षा विभाग में पढ़ने वाले 48 खिलाड़ी जो मंडल स्तर पर चैंपियन रहे हैं, वो राज्य स्तरीय खेल में शामिल नहीं हो पाए हैं. अब इसे उनकी गरीबी कहें या विभागीय लापरवाही जिसने राज्य स्तरीय खेल में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सम्मिलित नहीं होने दिया. खिलाड़ी राज्य स्तरीय बेसिक बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता में नहीं शामिल होने से मायूस हैं. 

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बता दें कि बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में पढ़ने वाले खिलाड़ियों की प्रतिभा निखारने के लिए सरकार समय-समय पर तमाम खेल आयोजित करती है, जिनके लिए पैसे पानी की तरह बहाए जाते हैं. लेकिन विभागों में बैठे अधिकारी बजाए इसमे रुचि लेने के खिलाड़ियों की प्रतिभा को मार रहे हैं.

जो खिलाड़ी चैंपियन होते हैं उन्हें राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग कराने की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग की होती है. शासन ने इसके लिए धन भी दिया था. मगर बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी मंडल चैंपियन बच्चों को लखनऊ ले जाने में हाथ खड़ा कर दिया. विभाग का कहना है कि शासन से कम धनराशि मिली थी, जो धन मिला था वो जिले स्तर पर प्रतियोगिता कराने में ही खर्च हो गए. 

91 बच्चे हुए थे मंडल चैंपियन, राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में होना था शामिल

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उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर हर वर्ष बेसिक शिक्षा विभाग एनपीआरसी, ब्लाक, जनपद, मंडल और राज्य स्तर पर बेसिक बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता का आयोजन कराता रहा है. जनपद के बाद गोरखपुर मंडल स्तरीय बेसिक बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता में जिले के 91 बच्चे चैंपियन बनने के बाद राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए पास किये, पर विभागीय लापरवाही से 48 मंडल चैंपियन खिलाड़ी लखनऊ जा ही नहीं पाए. गुरूवार से राज्य स्तरीय प्रतियोगिता शुरू हुई है. पर जिले के 48 खिलाड़ी खेल में सम्मिलित होने से पहले ही विभागीय लापरवाही के भेंट चढ़ गए. 

 
कबड्डी और खो-खो की टीम जा ही नहीं पाई

राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता में सम्मिलित होने के लिए परिषदीय स्कूलों के चैंपियन बच्चे अपना लोहा मनवाने के लिए तैयार थे. महीनों से पढ़ाई से समय निकाल जी तोड़ मेहनत कर रहे थे बच्चों को प्रतिभाग कराने के लिए शिक्षक भी कई दिन से अपनी बात रख रहे थे. लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने उन्हें अनसुना कर दिया. 

कुछ शिक्षकों ने बच्चों की उत्सुकता व उनके सुनहरे भविष्य को देखते हुए अपनी जिम्मेदारी को निभाने के लिए अपने खर्च से बच्चों को लेकर ट्रेन से लखनऊ पहुंच गए. लेकिन खो-खो व कबड्डी की टीम जा ही नहीं पाई. कुछ अन्य शिक्षकों का दिल नहीं माना तो वह हॉकी की टीम को लेकर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के शुभारंभ होने के दिन 15 फरवरी को सुबह ही किसी तरह व्यवस्था बनाकर ले गए. मगर 48 मंडल चैंपियन बच्चों की बदनसीबी एक बार फिर उनकी तरक्की में विभागीय लापरवाही से बाधक बन गई. 

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विभाग की संवेदनहीनता हुई उजागर

इतना ही नही मंडल स्तरीय बेसिक बाल क्रीड़ा में महराजगंज के बच्चों के बदौलत ही बेसिक शिक्षा विभाग को 94 हजार रूपये एडी बेसिक कार्यालय से मिलना था. इसका बिल-वाउचर लगाकर भुगतान हासिल करना था. लेकिन तीन-चार दिन पहले तक बेसिक शिक्षा विभाग मंडल से यह धनराशि नहीं ले पाया. यह धनराशि मिल गई होती तो इससे भी बच्चे लखनऊ जा सकते थे. 

बीएसए व सभी बीईओ को चलने के लिए शासन हर माह करीब एक दर्जन गाड़ियों का किराया देती है. इन वाहनों से भी मंडल चैंपियन बच्चों को लखनऊ भेजा जा सकता है, क्योंकि शासन बेसिक शिक्षा के नाम पर जितना भी खर्च करती है उसका उद्देश्य बच्चों की शिक्षा व उनकी खेलकूद प्रतिभा को निखारने का होता है. लेकिन आरोप है कि शासन की मंशा के विपरित जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में हर वह काम हो रहा है जिससे छात्रों का मनोबल टूट रहा है. प्रतिभाएं निखरने से पहले ही दम तोड़ रही हैं लेकिन इन सब से विभाग को कोई फर्क नही पड़ रहा. 

मामले की जांच कराई जाएगी: जिलाधिकारी 

वहीं, इस पूरे प्रकरण के बारे में जब जिलाधिकारी अनुनय झा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस मामले कि पहले ही जानकारी हुई होती तो व्यवस्था कराकर बच्चो को भेजा जाता. लेकिन फिर भी जिन्होंने लापरवाही की है उनकी भूमिका तय होगी. जांच कराकर न्यायोचित कार्यवाही की जाएगी. 

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