
वो सेना से रिटायर हो गए हैं, लेकिन देश प्रेम और देशभक्ति अभी भी दिल में जिंदा है. अपने जैसे ही वीर तैयार करने के लिए पूर्व सैनिक युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं और उन्हें तैयार कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में भारत नेपाल सरहद के नौतनवा कस्बे में पूर्व सैनिकों का जज्बा देखने लायक है.
मुफ्त में देते हैं ट्रेनिंग और भरते हैं देशभक्ति का जज्बा
पूर्व सैनिक ग्रामीण इलाके के युवाओं को मुफ्त ट्रेनिंग देकर उन्हें सेना, पैरामिलेट्री भर्ती के लिए तैयार कर रहे हैं. युवाओं में देश प्रेम और देश सेवा का जज्बा पैदा करने के साथ ही उन्हे सेना सहित पैरा मिलिट्री फोर्सेज में भर्ती के लिए प्रेरित करने का जिम्मा भारत मां के कुछ पूर्व सैनिकों ने उठाया है.
देखें ट्रेनिंग का वीडियो...
अग्निवीर बन चुके हैं यहां के कई ग्रामीण युवा
महराजगंज जिले में भारत-नेपाल के सीमावर्ती इलाके में भूतपूर्व सैनिक ग्रामीण युवाओं को ट्रेनिंग देकर उन्हें सेना में भर्ती से पहले की तैयारी करा रहे हैं. वहीं, कड़ी मेहनत की बदौलत कई युवा बतौर अग्निवीर सेना का हिस्सा बन चुके हैं.
पूर्व सैनिक युवाओं को सिर्फ मुफ्त में ट्रेनिंग ही नहीं दे रहे हैं. वह सेना में बिताए गए अपने कार्यकाल के अनुभवों को भी साझा करते हैं. इससे युवाओं को कठिनाइयों और चुनौतियों से निपटने की नसीहत मिलती है.
वीडियो में देखें क्या कह रहे प्रशिक्षक...
बड़ी संख्या में यहां रहते हैं पूर्व गोरखा सैनिक
महराजगंज में भारत-नेपाल सीमा के समीप नौतनवा कस्बे में गोरखा सैनिकों का एक बड़ा समूह रहता है, जो अब सेना से रिटायर हो चुका है. पूर्व सैनिक नरेश राना और मनोज गुरुंग ने बताया कि अब हमारे जैसे सैनिक विभिन्न सामाजिक कार्यों से जुड़ने के साथ ही युवाओं को सेना सहित पैरा मिलिट्री फोर्सेज में जाने के लिए प्रेरित करने में जुटे हैं.
फिजिकल ट्रेनिंग और रिटेन की कराते हैं तैयारी
ट्रेनिंग ले रहे युवाओं का कहना है कि भूतपूर्व सैनिक उन्हें सेना में जाने के लिए मुफ्त में ट्रेनिंग देते हैं. सेना की तैयारी करने वाला छात्र अजय गुप्ता ने बताया कि सुबह 6 बजे से फिजिकल के साथ ही रिटेन परीक्षा की तैयारी भी कराई जाती है. पूर्व सैनिक अपने अनुभव को भी साझा करते हैं. कड़ी मेहनत की बदौलत उन लोगों के बीच से कई युवक सेना में भर्ती भी हो चुके हैं.