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UP Nikay Chunav: बीते दिनों देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया गया. इसके बाद से ही पार्टियों ने अपना-अपना गणित लगाना भी शुरू कर दिया है. इस बार रामपुर नगर पालिका अध्यक्ष सीट महिला के लिए आरक्षित की गई है.
आरक्षण से पहले इस सीट से कांग्रेस कार्यकर्ता और पूर्व नगर अध्यक्ष मामून शाह खान ने टिकट की मांग की थी, लेकिन पार्टी ने टिकट देने से इंकार कर दिया. मामून शाह ने चुनाव लड़ने का मना बना लिया था. तो उन्होंने एक कदम उठाया कि सब हैरान रह गए.
शादी रचाई, कांग्रेस से दिया इस्तीफा और थामा 'आप' का दामन
शनिवार को मामून शाह खान ने सना खानम से शादी कर ली और कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया. आज उन्होंने पत्नी के साथ आम आदमी पार्टी के रामपुर कार्यालय पहुंचकर आप की सदस्यता ली. इस दौरान उनके दर्जनों समर्थकों ने भी आप की सदस्यता ली है. आम आदमी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष और प्रवक्ता फैसल खान लाला ने सभी को पार्टी की सदस्यता दिलाई.
नहीं मिला टिकट तो 'आप' से जुड़ने का किया फैसला
मीडिया से बात करते हुए मामून शाह खान ने कहा कि शनिवार को मेरी शादी हुई. ऐसे मुबारक महीने में मुझे जीवनसाथी मिला. रामपुर नगर पालिका अध्यक्ष सीट महिला के लिए आरक्षित होने के कारण ऑप्शन था कि चुनाव के लिए 5 साल तक इंतजार किया, लेकिन काम करने का मन था.
कांग्रेस पार्टी के लिए हम पिछले 25 सालों से काम कर रहे थे. पार्टी से कई बार टिकट मांगा, लेकिन नहीं मिला. आज पत्नी और समर्थकों के साथ आम आदमी पार्टी में शामिल हो गया हूं. 'आप' की तरफ से मेरी पत्नी को रामपुर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी बनाया गया है. नामांकन दाखिल कर दिया गया है.
दो चरणों में होंगे चुनाव
यूपी में नगर निकाय चुनाव की डेट का ऐलान हो गया है. सूबे में दो चरणों में चुनाव होंगे. चार मई को पहले और दूसरे चरण की वोटिंग 11 मई को होगी, जबकि 13 मई को नतीजे आएंगे. इस बार 4.32 करोड़ वोटर्स मतदान करेंगे. इससे पहले साल 2017 में हुए चुनाव में 3.35 करोड़ मतदाताओं ने वोट डाला था.
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पहले चरण में इन मंडलों के इन जिलों में होगी वोटिंग
- सहारनपुर मंडल के शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर
- मुरादाबाद मंडल के बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर और सम्भल
- आगरा मंडल में आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा और मैनपुरी
- झांसी मंडल में झांसी, जालौन और ललितपुर
- प्रयागराज मंडल में कौशाम्बी, प्रयागराज, फतेहपुर और प्रतापगढ़
- लखनऊ मंडल के उन्नाव, हरदोई, लखनऊ, रायबरेली, सीतापुर और
- लखीमपुर खीरी देवीपाटन मंडल के गोंडा, बहराइट, बलरामपुर और श्रावस्ती
- गोरखपुर मंडल के गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज और कुशीनगर
- वाराणसी मंडल के गाजीपुर, वाराणसी, चंदौली और जौनपुर
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दूसरे चरण में इन मंडलों के इन जिलों में होगी वोटिंग
- मेरठ मंडल के मेरठ, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, बागपत और बुलंदशहर
- बरेली मंडल के बदायूं, शाहजहांपुर, बरेली और पीलीभीत
- अलीगढ़ मंडल के हाथरस, कासगंज, एटा और अलीगढ़
- कानपुर मंडल के कानपुर नगर, कानपुर देहात, फर्रुखाबाद, इटावा, कन्नौज और औरैया
- चित्रकूट मंडल के हमीरपुर, चित्रकूट, महोबा और बांदा
- अयोध्या मंडल के सुल्तानपुर, अयोध्या, अंबेडकरनगर, बाराबंकी और अमेठी
- बस्ती मंडल के संतकबीर नगर, बस्ती और सिद्धार्थनगर में वोटिंग होगी
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नगर निकाय के 14,684 पदों पर चुनाव होगा
बता दें कि नगर निकाय के 14,684 पदों पर चुनाव होगा. इसमें 17 महापौर और 1420 पार्षद का चुनाव ईवीएम से होगा. जबकि, नगर पालिका परिषद के 199 अध्यक्ष और 5327 सदस्य बैलट पेपर के जरिए चुने जाएंगे. इसके अलावा 544 नगर पंचायत अध्यक्ष, 7178 सदस्यों का चुनाव भी मतपत्रों से होगा.
इससे पहले नगर निकाय चुनाव में आरक्षण को लेकर यूपी सरकार की ओर से अधिसूचना जारी की गई थी. इसमें आरक्षित सीटों को लेकर भी जानकारी दी गई थी. इसमें बताया गया था कि कौन-सी सीट से समाज के किस वर्ग का प्रत्याशी चुनाव लड़ सकता है.
यूपी निकाय चुनाव को लेकर पिछले साल से तैयारी चल रही थी, लेकिन ओबीसी आरक्षण को लेकर मामला फंस रहा था और फिर हाईकोर्ट द्वारा बिना आरक्षण के चुनावों का ऐलान भी हुआ था. उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, फिर कमेटी बनी और अब ओबीसी आरक्षण के साथ चुनाव होंगे.
पिछले साल दिसंबर में चुनाव कराने की तैयारी थी
यूपी की 760 नगर निकायों में नगर निगम के मेयर, नगर पालिका-नगर पंचायत के अध्यक्ष और पार्षद के लिए पिछले साल दिसंबर में ही चुनाव कराए जाने की तैयारी थी. राज्य सरकार ने निकाय चुनाव के लिए सीटों का आरक्षण भी जारी कर दिया था, लेकिन आरक्षण को लेकर मामला हाई कोर्ट में चला गया.
हाईकोर्ट ने बगैर ओबीसी आरक्षण के तत्काल चुनाव कराने का आदेश दिया तो यूपी सरकार इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यूपी सरकार ने रिटायर्ड जज राम औतार सिंह की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय ओबीसी आयोग का गठन किया था. इसने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी और कोर्ट ने भी स्वीकार की. इसी के बाद चुनाव आयोग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है.