
ज्ञानवापी मस्जिद के बाद अब वाराणसी के हरतीरथ इलाके में स्थित भगवान कृति वाशेश्वर मंदिर का मुद्दा तूल पकड़ सकता है. क्योंकि वहां से मस्जिद की आकृति के आकार को हटाने, साज-सज्जा के साथ भगवान कृति वाशेश्वर विराजमान के निर्वेद में पूजा-पाठ, राज भोग और अभिषेक के मांग वाला वाद सिविल जज सीनियर डिवीजन अश्विनी कुमार की अदालत में दाखिल किया गया है.
भगवान कृति वाशेश्वर की ओर से वाराणसी के नवादा सुंदरपुर निवासी संतोष सिंह, माधव मार्केट के हरिश्चंद्र तिवारी और बेनिया बाग इलाके के विकास कुमार शाह ने यह वाद दाखिल किया है. जिसमें वाराणसी के जिलाधिकारी के माध्यम से स्टेट आफ उत्तर प्रदेश, पुलिस कमिश्नर, हरतीरथ के रहने वाले मुस्लिम पक्ष के मोहम्मद इश्तियाक, उनकी पत्नी, मोहम्मद इंतियाज और उनकी पत्नी, पठानी टोला के मोहम्मद जहीर व अति प्राचीन कृति वाश्वेश्वर महादेव मंदिर सेवा समिति को प्रतिवादी भी बनाया गया है.
वहीं, इस मामले में वादी मुकदमा संतोष सिंह ने बताया कि कृति वाशेश्वर मंदिर को भोलेनाथ का मस्तक तक कहा जाता है. इस मंदिर में निरंतर पूजा होती चली आ रही है, लेकिन वहां एक मस्जिद भी औरंगजेब के द्वारा बनवाई गई थी जो अभी तक कायम है. इस मंदिर को तोड़कर उसी स्थान पर मस्जिद का निर्माण किया गया है. इसलिए हम न्यायालय के शरण में आए हैं कि कृति वाशेश्वर का मंदिर हमें पूर्ण रूप से मिल जाए. ताकि वहां पर भव्य मंदिर का निर्माण हो सके.
वादी संतोष सिंह ने कहा कि इस मंदिर पर हमारा पौराणिक और ऐतिहासिक हक है, जिसे हम लेकर रहेंगे. कानूनी तरीके से इस मंदिर को प्राप्त करने के लिए हमने न्यायालय में एक वाद दाखिल किया है कि कृति वाशेश्वर मंदिर से मस्जिद को हटाया जाए और पूरा परिसर हम सनातनियों को सौंप दिया जाए. जिससे एक भव्य मंदिर का निर्माण हो सके.
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस मस्जिद को 'फव्वारे वाली मस्जिद' के नाम से जाना जाता है. इसके पास स्थितमंदिर में लंबे समय से पूजा होती आ रही है. अब इस मंदिर को भव्य रूप देने के लिए लोगों ने फिर से मांग उठानी शुरू की है.
ज्ञानवापी का विवाद
गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ही ज्ञानवापी मामले में वाराणसी की जिला अदालत ने बड़ा फैसला दिया था. अदालत ने हिंदू पक्ष को व्यास तहखाने में पूजा करने की इजाजत दे दी है. ज्ञानवापी का व्यासजी का तहखाना वर्ष 1993 से बंद था.
दरअसल,हिंदू पक्ष का दावा है कि ज्ञानवापी के नीचे आदि विश्वेश्वर का स्वयंभू ज्योतिर्लिंग है. ज्ञानवापी का निर्माण मंदिर को तोड़कर उसकी भूमि पर किया गया है. साथ ही काशी विश्वनाथ मंदिर के अवशेषों से ही ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण हुआ था.
हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि ज्ञानवापी परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर यह पता लगाया जाए कि जमीन के अंदर का भाग मंदिर का अवशेष है या नहीं. इन्हीं दावों पर पर अदालत ने कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करते हुए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) से सर्वे करवाया था. जिसके बाद ज्ञानवापी का व्यासजी तहखाना खोला गया.