
यूपी एसटीएफ (UP STF) ने महादेव गेमिंग और अन्य बेटिंग एप के माध्यम से अरबों रूपये की ठगी करने वाले संगठित गिरोह के दो अभियुक्तों को लखनऊ से गिरफ्तार किया है. इनके नाम अभय सिंह और संजीव सिंह है. अभय महादेव बुक गेमिंग कंपनी का इंडिया हेड है. महादेव बुक एप का नेटवर्क अभय का फुफेरा भाई अभिषेक दुबई से चलाता है. पकड़े गए अभियुक्त व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए प्रयोग होने वाले कॉर्पोरेट सिम को पोर्ट कराकर दुबई भेजते थे.
दरअसल, STF को विगत काफी समय से गेमिंग एप के माध्यम से टेलीग्राम व व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, हॉर्स राइडिंग, इलेक्शन आदि पर अवैध तरीके से ऑनलाइन बेटिंग की सूचना मिल रही थी. साथ ही कसीनो, तीन पत्ती, कैरम, लूडो जैसे गेम भी खिलाकर ठगी की सूचना मिली थी.
ऐसे में लखनऊ एसटीएफ सक्रिय हुई और खुफिया इनपुट के आधार पर महादेव बुक एप के इंडिया हेड सहित दो अभियुक्तों को धर दबोचा. पूछताछ मे अभियुक्त अभय सिंह ने बताया कि उसके बुआ का लड़का अभिषेक सिंह दुबई में रहता है. उसी ने फोन कर बताया कि अपने क्षेत्र से गरीब व अनपढ़ लोगों के नाम से सिम खरीदना है और इसके एवज में 25 हजार रुपये सैलरी मिलेगी. साथ ही 500 रुपये प्रति सिम मिलेगा. सिम एक कंपनी से दूसरी कंपनी में पोर्ट करना है.
अभय ने बताया कि इसके बाद उसने अपने गांव के आसपास के लोगों के नाम सिम पोर्ट कराने का काम शुरू किया, जिसका यूपीसी कोड चेतन जोशी जो कि भिलाई छत्तीसगढ का रहने वाला था और दुबई में अभिषेक के साथ काम करता है उसे देने लगा. अभय के मुताबिक, वह एक महीने में लगभग 30 से 35 सिम एक्टीवेट करा देता था, जिसके चलते विगत जनवरी 2023 में उसकी सैलरी 25 हजार से बढ़कर 75 हजार कर दी गई और साथ ही कॉर्पोरेट सिम पोर्ट का काम दिया गया. यह पोस्टपेड सिम होती थी. इन सिम की केवाईसी के लिए कूटरचित दस्तावेज बनाकर फर्जी कंपनी रजिस्टर्ड कराना शुरू किया.
बकौल अभय- चेतन भी कुछ कंपनी के दस्तावेज व फर्जी आधार कार्ड भेजता था. इन सिम के एक्टिवेशन पर 2 हजार प्रति सिम कमीशन के तौर पर मिलते थे. इन सब कामों का सुपरवीजन पिंटू करता था. महीने में लगभग 150-200 सिम ऐक्टिवेट कराकर दुबई हम लोग भेज देते थे.
ऐसे करते थे खेल
अभिषेक ने ही अभय को महादेव बुक गेमिंग कंपनी का इंडिया हेड बनाया था. यह कंपनी भी गेम के नाम पर बेटिंग करा रही थी. अभय और संजीव ने 2021 से अब तक 32 फर्जी कंपनियां बनाईं फिर इन कंपनियों के नाम से 4 हजार कॉर्पोरेट सिम खरीदे. इन सिमों को अभिषेक को भेजे और उन लोगों ने इन नंबरों का इस्तेमाल कर व्हाट्सएप व टेलीग्राम पर ग्रुप बनाए और गेमिंग के नाम पर ठगी को अंजाम दिया. आरोपी अभय सिंह का बैंक खाता मुंबई पुलिस पहले ही सीज कर चुकी है.
अभियुक्त अभय सिंह ने एसटीएफ को जानकारी देते हुए आगे बताया कि वह फरवरी 2024 से कॉर्पोरेट सिम लेने पर कंपनी के साथ-साथ कर्मचारी के नाम का भी वेरिफिकेशन केवाईसी करने लगा, जो कि लिंक के माध्यम से होती है. एक व्यक्ति के नाम 5 से 6 सिम एक बार में एक्टिव करा देता था. इतना ही नहीं अभय ने यह भी बताया कि वह वर्ष 2021 से अब तक 32 से अधिक फर्जी कंपनियों के नाम से लगभग 4 हजार कॉर्पोरेट सिम खरीदकर दुबई भिजवा चुका है, जिनका प्रयोग व्हाट्सएप/टेलीग्राम एकाउंट बनाने के लिए किया गया.
अब तक गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, जयपुर, पुणे, मुंबई, उड़ीसा और अन्य जगहों से फर्जी तरीके से सिम पोर्ट/एक्टिवेट कराकर खरीदे गए हैं. इन मोबाइल नंबरों से जो व्हाट्सएप या टेलीग्राम एक्टिवेट करते, उनका ग्रुप बनाकर ठगी का काम करते थे.
अभय ने यह भी बताया कि उसका बैंक एकाउंट साइबर सेल मुंबई ने फ्रीज कराया है. इसके अलावा उसके खिलाफ थाना कोतवाली नगर जनपद बलिया में मुकदमा भी दर्ज है. ईडी द्वारा महादेव बुक पर कार्रवाई करने के बाद इस समय रेड्डी अन्ना बुक, फेयर प्ले, लोटस 365, मैजिकविन, गोल्डन 444, दमन बुक,विनबज्ज व आईपीएल विन 365 आदि नाम से कई गेमिंग और बेटिंग ऐप चलाए जा रहे हैं और इन एप की फ्रेंचाइजी पूरे देश में दी जाती है. जो भी ब्रांच चलाते हैं उन्हे ठगी से मिले रूपये में से 80 प्रतिशत दिया जाता है.
महादेव बुक एप के माध्यम से किये गये घोटाले की जांच विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जा रही है. अभियुक्तों की कंपनियों में काम करने के लिए लगभग दस से बारह हजार कर्मचारी भारत से दुबई गए हुए हैं, जो गेमिंग एप के बैंक एकाउंट, व्हाट्सएप/टेलीग्राम एकाउंट व अन्य सर्विस देखते हैं.
लखनऊ एसटीएफ ने बताया कि आरोपियों के पास से बरामद इलेक्ट्रानिक उपकरणों का फॉरेंसिक परीक्षण कराया जाएगा. फिलहाल गिरफ्तार अभियुक्तों के खिलाफ थाना विभूति खण्ड में धारा 34/406/411/409/419/420/467/468/471 व 66 डी आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है. आगे की विधिक कार्रवाई प्रचलित है.