
चैत्र नवरात्रि शुरू होते ही पूर्वी उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के चकिया में स्थित प्राचीन काली मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है. यहां नवरात्रि के दिनों में दूर-दूर से भक्त मां काली और भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. मंदिर में शक्ति स्वरूपा माँ काली के साथ-साथ शिव, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं, जो इसे आस्था का अनूठा केंद्र बनाती हैं.
चंदौली जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर 1829 के आसपास तत्कालीन काशी नरेश द्वारा बनवाया गया था. मान्यता है कि मां दक्षिणेश्वर काली ने काशी नरेश को स्वप्न में दर्शन देकर मंदिर निर्माण का निर्देश दिया था. इसके बाद काशी नरेश ने यहां एक बड़ा तालाब बनवाया और उसके सामने मंदिर स्थापित किया.
गर्भगृह में मां काली की प्रतिमा के ठीक सामने एक ही अर्घे में तीन शिवलिंग स्थापित हैं. मंदिर में मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की मूर्तियां भी हैं. यहां एक विजय घंट भी है, जिस पर दुर्गा सप्तशती के सभी मंत्र अंकित हैं. इसे भोर की आरती में बजाया जाता है, जो सुबह 4 बजे होती है.
श्रद्धालुओं की आस्था
मंदिर के पुजारी हरेंद्र झा ने बताया, "यहां मां काली के दर्शन मात्र से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है. नवरात्रि में भक्त नारियल, लाल चुनरी और सफेद, लाल, पीले फूल चढ़ाते हैं."
श्रद्धालु रेखा ने कहा, "यह मंदिर बहुत जागृत है. यहां की शांति और आशीर्वाद से मन को सुकून मिलता है." विकास कुमार ने बताया, "मां काली और शिव के दर्शन एक साथ होना बड़ी बात है. मेरी हर मनोकामना यहां पूरी हुई."
नवरात्रि में विशेष व्यवस्था
नवरात्रि के दौरान यहां भक्त मां काली को प्रसाद के रूप में नारियल, चुनरी और फूल अर्पित करते हैं, साथ ही गर्भगृह में भगवान शिव का जलाभिषेक भी करते हैं. सामान्य दिनों में भी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है, लेकिन नवरात्रि में यहां का आध्यात्मिक माहौल और बढ़ जाता है. मंदिर की प्रसिद्धि आसपास के इलाकों से लेकर दूर-दूर तक फैली है. भक्त सुख, समृद्धि और शांति की कामना के साथ यहां पहुंचते हैं.