
ग्रेटर नोएडा पुलिस ने पत्रकार पंकज पाराशर समेत 3 लोगों को गिरफ्तार किया है. पकंज पाराशर की गिरफ्तारी का मामला इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है. पुलिस का दावा है कि भ्रामक खबरें चलाकर धन उगाही करने के आरोप में ये गिरफ्तारियां हुई हैं. फिलहाल, आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है.
दरअसल, बीते दिनों ग्रेटर नोएडा स्थित थाना बीटा-2 पुलिस और सीआरटी टीम द्वारा पंकज पाराशर सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था. बताया गया कि उनके कब्जे से उगाही के 6 लाख 30 हजार रुपये नगद बरामद हुए हैं. इसके साथ ही दो लग्जरी गाड़ियां, गैंग के सरगना रवि काना की 14 गाड़ियों की आरसी, फोटो व हस्ताक्षरित पर्चा आदि चीजें भी बरामद हुई हैं.
पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि इस गैंग का सक्रिय सरगना व संचालक स्क्रैप माफिया रवि नागर उर्फ़ रवि काना है, जो वर्तमान में जेल में बंद है. पकड़े गए आरोपियों द्वारा रवि काना के नाम से धौंस जमाकर, धमकी देकर, फर्जी/भ्रामक न्यूज़ चलाने का डर दिखाकर एक पूरा वसूली रैकेट चलाया जा रहा था.
बताया गया कि 8 नवंबर 2024 को आरोपियों के द्वारा मनोज कुमार नामक व्यक्ति को बाइट देने के नाम पर परी चौक बुलाया गया, जहां पर आरोपियों ने अपने आप को रवि काना का आदमी बताते हुए उससे पैसों की डिमांड की. पैसे न देने पर अपने न्यूज पोर्टल पर फर्जी व भ्रामक खबरें चलाने की धमकी दी. शूटर भेजकर जान से मरवाने की भी धमकी दी. पीड़ित के द्वारा इस संबंध में थाना बीटा- 2 पुलिस को एक शिकायत दी गई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की.
इस मामले में पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्ध नगर की मीडिया सेल ने जानकारी देते हुए बताया कि सीआरटी टीम व थाना बीटा-2 पुलिस द्वारा फर्जी न्यूज़ चलाने व स्क्रैप माफिया रवि काना के नाम से धौंस दिखाकर वसूली करने वाले रैकेट का पर्दाफाश किया गया है. आरोपियों की पहचान पंकज पाराशर, देव शर्मा और अवधेश सिसोदिया के रूप में हुई है.
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों से पूछताछ व विवेचना के दौरान लगभग 15 से 20 संदिग्ध बैंक खाते मिले, जिनमें रवि काना की उगाही की धनराशि के ट्रांजैक्शन के साक्ष्य मिले हैं. उक्त अवैध धन से यह लोग गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त थे. इन लोगों की रवि काना से फोन कॉल रिकॉर्ड में बातचीत करने की पुष्टि हुई है. आरोपी रवि काना गिरोह की अवैध धनराशि अपनी व्यावसायिक कार्यों में इस्तेमाल करके रवि काना व उसके गिरोह के सदस्यों को यह लोग संरक्षण देते थे.