
उत्तर प्रदेश के नोएडा में किफायती आवास मध्यम वर्ग के लोगों के बजट से बाहर हो गए हैं. दरअसल, पिछले कुछ सालों में नोएडा-ग्रेटर नोएडा में वन बीएचके और टू बीएचके फ्लैट्स की संख्या में भारी गिरावट आई है. रियल एस्टेट बाजार में ऐसे फ्लैट्स की संख्या काफी कम हो गई है.
पिछले 4 वर्षों में नोएडा प्राधिकरण में पारित कई नई परियोजनाओं और मानचित्रों में से एक भी बीएचके फ्लैट की योजना को मंजूरी के लिए पेश नहीं किया गया है. लिहाजा, किफायती छोटे खंड को बाजार से बाहर कर दिया गया है. साथ ही बहुत कम बिल्डर्स 2 बीएचके हाई राइज मानचित्र स्वीकृत कराने आए हैं.
इससे साफ पता चलता है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा हाउसिंग प्रोजेक्ट में छोटे घरों की मांग और बिक्री में गिरावट आई है. बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली से सटे नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 1 और 2 बीएचके फ्लैट्स की मांग कम होने से यह पता चलता है कि सैटेलाइट शहरों में ऊंची इमारतों में फ्लैट खरीदने का सपना अब मध्यम वर्ग के बजट से बाहर हो गया है.
इसके अलावा इन शहरों में लोग संपत्ति की दरों में भारी वृद्धि के कारण पुनर्विक्रय के लिए छोटे फ्लैट खरीदना पसंद कर रहे हैं. ब्लू हाउस कंसल्टिंग के उज्ज्वल मिश्रा ने कहा, ''कोविड के बाद 3, 4 और 5 बीएचके फ्लैट्स की मांग काफी बढ़ गई है.''
6 हजार फ्लैट्स के नक्शे पास, 2बीएचके के सिर्फ 300 फ्लैट
नोएडा अथॉरिटी के प्लानिंग डिपार्टमेंट से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले चार साल में 12 हाउसिंग प्रोजेक्ट पास होने के लिए आए हैं. इसमें 3, 4 और 5 बीएचके फ्लैट्स के नक्शे पास हो चुके हैं. इन सभी नक्शों में सर्वेंट रूम वाले फ्लैट्स की संख्या काफी ज्यादा थी. अथॉरिटी द्वारा पास किए गए 6000 फ्लैट्स के नक्शों में से 2 बीएचके फ्लैट्स की संख्या 300 से भी कम है. वहीं, इस अवधि में एक भी वन बीएचके फ्लैट का नक्शा मंजूरी के लिए नहीं भेजा गया है.
छोटे फ्लैट्स की मांग कम होने के ये हैं कारण
प्रॉपर्टी परामर्श के संस्थापक दिग्विजय झा ने कहा, ''छोटे फ्लैट्स की मांग कम होने के कई कारण हैं. इसमें सबसे अहम बात यह है कि छोटे फ्लैट्स में खरीदार को तो फायदा होता है, लेकिन बिल्डर का मुनाफा कम होता है. ऐसे में बिल्डर अब छोटे घरों के बजाय लग्जरी हाउसिंग पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. इसके अलावा, बड़े शहरों में घर से काम करने का कल्चर बढ़ गया है. ऐसे में लोगों के बीच बड़े घरों की मांग बढ़ गई है.''