
महाकुंभ में भगदड़ में 30 लोगों की मौत के एक दिन बाद गुरुवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने धार्मिक समागम के लिए लाखों की संख्या में उमड़ने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं. गुरुवार को संगम और अन्य घाटों पर डुबकी लगाने का सिलसिला जारी है. उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार, गुरुवार दोपहर 2 बजे तक 1.52 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया. अब तक 27.58 करोड़ से अधिक श्रद्धालु महाकुंभ में डुबकी लगा चुके हैं.
प्रयागराज में श्रद्धालुओं के भारी दबाव के बाद सारे पुल खोल दिए गए हैं. सारे पीपा पुल श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोले गए हैं. डीआईजी महाकुंभ वैभव कृष्ण ने बताया कि पुलिस आगामी बसंत पंचमी स्नान (3 फरवरी) पर होने वाले अमृत स्नान के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर सक्रिय रूप से काम कर रही है और मेला क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है.
उन्होंने कहा, "बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद को देखते हुए हम पुलिस कर्मियों और सुरक्षा बलों की तैनाती को और मजबूत कर रहे हैं. गुरुवार को भीड़ का दबाव अपेक्षाकृत कम था और सभी पुलों को फिर से खोल दिया गया है, जिससे मेला क्षेत्र में आवागमन सुचारू हो गया. हालांकि, बसंत पंचमी से पहले बेहतर भीड़ प्रबंधन के लिए प्रमुख स्थानों पर नए प्रतिबंध लगाए जाएंगे."
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संगम और अन्य घाटों पर पहुंच रहे श्रद्धालु
डीआईजी कृष्णा ने यह भी स्पष्ट किया कि आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार मौनी अमावस्या पर मेला क्षेत्र में कोई वीआईपी मूवमेंट नहीं था और बसंत पंचमी के लिए भी यही प्रोटोकॉल लागू रहेगा. सुबह घना कोहरा छाने के बाद धीरे-धीरे मौसम साफ हुआ और कुंभ मेला क्षेत्र में तेज धूप खिली. हालांकि, संगम और अन्य घाटों की ओर श्रद्धालुओं का तांता पूरे दिन लगा रहा.
प्रयागराज शहर की ओर से कच्छप द्वार के रास्ते कई श्रद्धालु संगम की ओर बढ़ते रहे, जबकि मौनी अमावस्या और उसके बाद के अनुष्ठानों के लिए आए कई अन्य लोग वापस शहर की ओर जाते देखे गए.
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पीपा पुलों पर एकतरफा यातायात व्यवस्था
बता दें कि बुधवार की दुखद भगदड़ की घटना के बाद मेला क्षेत्र के 30 पीपा पुलों पर एकतरफा यातायात व्यवस्था लागू की गई. इसका मतलब यह हुआ कि प्रत्येक पुल से केवल एक ही दिशा में आवाजाही की अनुमति है, जबकि वापसी के लिए समानांतर पीपा पुल बनाया गया है. त्रिवेणी संगम, जिसे सबसे पवित्र स्नान स्थल माना जाता है, मेला क्षेत्र के एक तरफ स्थित है, जबकि गंगा के किनारे और अखाड़ों के करीब स्थित कई अन्य घाट विपरीत दिशा में हैं, जो इन पीपा पुलों से जुड़े हुए हैं.
क्षेत्र नो-व्हीकल जोन घोषित
पुलिस अधीक्षक (यातायात) अंशुमान मिश्रा ने पीटीआई को बताया कि जब तक भीड़ पूरी तरह से नहीं छंट जाती, तब तक यह क्षेत्र नो-व्हीकल जोन रहेगा. उन्होंने कहा, "जब तक सभी श्रद्धालु सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य के लिए नहीं निकल जाते, तब तक वाहन पास मान्य नहीं होंगे. जब तक भीड़ मेला क्षेत्र से बाहर नहीं निकल जाती, तब तक किसी भी बाहरी वाहन को शहर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी."
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हालांकि, उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारी स्थिति के आधार पर वाहनों के प्रवेश की अनुमति दे सकते हैं. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि पुलिस प्रशासन के वाहन, एम्बुलेंस और सक्शन मशीन जैसी आवश्यक सेवाओं को प्रवेश की अनुमति दी जाएगी, क्योंकि वे महाकुंभ के सुचारू प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण हैं.
दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारी करेंगे व्यवस्थाओं को मजबूत
व्यवस्थाओं को और मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार मेला ड्यूटी पर दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को भी तैनात करेगी - आशीष गोयल, जो 2019 कुंभ के लिए प्रयागराज के मंडलायुक्त के रूप में कार्यरत थे और भानु गोस्वामी, जो आगरा विकास प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष थे. इसके अलावा, संचालन की देखरेख के लिए पांच विशेष सचिव स्तर के अधिकारियों को नियुक्त किया जा रहा है. आदित्यनाथ ने कहा कि ये सभी व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने में सहायता के लिए 12 फरवरी तक प्रयागराज में रहेंगे.