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आजम खान को झटका, जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामलों की एक साथ नहीं होगी सुनवाई, MP MLA कोर्ट से अर्जी खारिज

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. एमपी एमएलए कि विशेष अदालत ने किसानों से जबरन जौहर यूनिवर्सिटी ट्र्स्ट में जमीन मिलाने के मामले में दायर अर्जी खारिज कर दी है.

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आमिर खान
  • रामपुर,
  • 08 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 11:57 AM IST

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान को रामपुर कोर्ट से झटका मिला है. एमपी एमएलए विशेष अदालत (मजिस्ट्रेट ट्रायल) शोभित बंसल की पीठ ने आजम खान पक्ष की ओर से  दाखिल अर्जी को निरस्त कर दिया है. दरअसल जौहर यूनिवर्सिटी से संबंधित 27 मामलों में खान के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था. 

आजमखान पर आरोप है कि उन्होंने किसानों को झूठे मुकदमों में फंसाने और हवालात में बंद करने की धमकी देकर जबरन जमीनें नाम कराई थी. इन मामलों में पुलिस की ओर से न्यायालय में अलग-अलग आरोप पत्र दाखिल किए गए थे. लेकिन आजम खान पक्ष का यह कहना था कि यह सभी मामले एक प्रकृति के हैं और एक ही जैसी घटना से संबंधित हैं. इसलिए इन सब की सुनवाई एक साथ की जानी चाहिए. 

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किसानों ने 2019 में किया था मुकदमा

इस मामले में विशेष एमपी एमएलए कोर्ट मजिस्ट्रेट ट्रायल शोभित बंसल ने आजम खान पक्ष की इस अर्जी को निरस्त कर दिया था. जिसको लेकर आजमखान पक्ष की तरफ से अर्जी दी गई थी. लेकिन अब इसे भी खारिज कर दिया गया है. ऐसे में इन सभी मामलों की सुनवाई अलग-अलग ही होगी. इस विषय पर वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी अमरनाथ तिवारी ने बताया कि आलिया गंज के किसानों ने वर्ष 2019 में थाना अजीम नगर पर शिकायत दर्ज कराई थी.

जिसमें सभी 27 किसानों ने कहा था कि उनकी जमीन पर जौहर विश्वविद्यालय का निर्माण किया गया है. जमीन को ट्रस्ट में शामिल कराने के लिए आजमखान ने किसानों से जबरन अंगूठे लगवाए थे. साथ ही किसानों से मारपीट भी की गई थी. पूरे मामले को लेकर किसानों ने मुकदमा लिखवाया और न्यायालय में चार्ज शीट आने के बाद सभी अभियुक्तों की तरफ से कोर्ट में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया. जिसको माननीय न्यायालय ने खारिज कर दिया.

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इसको लेकर अभियुक्त मोहम्मद आजम खान, अब्दुल्लाह आजम, तंजीन फातिमा और आले हसन की तरफ से प्रार्थना पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया कि सभी मुकदमे एक ही घटना से संबंधित हैं. ऐसे में इन मुकदमों को एक साथ मर्ज कर दिया जाए और एक मुकदमा चलाया जाए.

इस प्रार्थना पत्र पर अभियोजन पक्ष की तरफ से आपत्ति की गई. जिसके बाद दोनों पक्षों को सुनने के बाद माननीय विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट एमपी एमएलए कोर्ट शोभित बंसल ने अर्जी खारिज कर दी. साथ ही शोभित बंसल ने कहा कि मामले की सुनवाई अलग-अलग ही होगी. 

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