
इन दिनों कानपुर में कलेक्टर गंज में मौजूद गल्ला मंडी के व्यापारी चूहों के कारण परेशान हैं. मोटे-मोटे चूहों ने व्यापारियों की नाम में दम करके रखा हुआ है. व्यापारियों को लाखों का नुकसान इन चूहों के कारण हो रहा है. चूहों ने मंडी की दुकानों के नीचे बिल बना रखे है. सैकड़ों-हजारों की संख्या में मौजूद यह चूहे गल्ले से भरे बोरों को काट देते है और सारा गल्ला चट कर जाते हैं.
दरअसल, एक समय एशिया की सबसे बड़ी गल्ला मंडी कही जाने वाली कानपुर के कलेक्टर गंज में मौजूद गल्ला मंडी में आज भी अनाजों का थोक कारोबार होता है. मगर, मंडी के व्यापारी यहां पर मौजूद चूहों से परेशान हैं. बताया गया कि इन चूहों ने व्यापारियों का हाल बुरा करके रखा हुआ है. दुकानों की दीवारों, छतों, फर्श के निकलकर आने वाले इन चूहों के कारण बोरों को नुकसान पहुंच रहा है. ैसैंकड़ों-हजारों चूहे इन बोरों को काट देते हैं और अनाज खा जाते हैं. हर रोज लाखों रुपये का नुकसान व्यापारियों को रहा है.
बिल्लियों पर भारी पड़े चूहे
गल्ला मंडी व्यापारी मंडल के अध्यक्ष रमेश गुप्ता ने बताया कि चूहों से निजात पाने और अपने अनाज को उसने बचाने के लिए हमने बिल्लियां पाल ली थीं, लेकिन चूहों से कोई निजात नहीं मिली. चूहे इतने बड़े-बड़े हैं कि बिल्लियां भी उनसे खौफ खाने लगी. कई बार ऐसा हुआ कि चूहों ने अपने तेज दांत से बिल्लियों ही काट लिया. एक साथ सैकड़ों चूहे बिल्लियों पर हमला कर देते थे.
इंसानों को लगाया गया है ड्यूटी पर
बताया गया है कि अब व्यापारियों ने चूहों से निजात पाने के लिए गार्ड को लगाया हुआ है. मगर, इसने भी कुछ खास फायदा नहीं है. यह गार्ड सिर्फ इतना कर पाते है कि बोरों पर चढ़े चूहों को भगा देते हैं. लेकिन चूहे दुबारा गोदाम में आ जाते हैं और बोरों को काट देते हैं साथ ही अनाज को चट कर जाते हैं. व्यापारियों का कहना है कि
मंडी के सबसे बड़े व्यापारी विनोद गुप्ता का कहना है कि चूहों ने पूरे गल्ला मंडी परिसर में गहरी-गहरी सुरंगें बना ली हैं. बीते 10 सालों में यह चूहे मेरा 50 लाख से ज्यादा का अनाज बर्बाद कर चुके हैं. इन चूहों को मारने के लिए दवाई भी डाली गई थी. लेकिन चूहे इतने चालाक हैं कि दवाई मिली चीजों को सूंघ लेते हैं और फिर उन्हें खाते नहीं हैं. समझ नहीं आ रहा है कि इन चूहों को कैसे कंट्रोल करें.
अंग्रेजों के जमाने की गल्ला मंडी है कलेक्टर गंज मंडी
कलेक्टर गंज गल्ला मंडी अंग्रेजों के समय की गल्ला मंडी है. एक समय यहां से पूरे उत्तर भारत में गल्ले का काम होता था. व्यापारियों ने अपने बड़े-बड़े गोदाम नौबस्ता गल्ला मंडी में बना लिए हैं, लेकिन उनकी गद्दी आज भी यहां पर मौजूद हैं. आज भी यहां पर व्यापार होा है. कानपुर शहर का खुद का व्यापार भी इसी मंडी से होता है.
पास में सिद्धिविनायक मंदिर, इसलिए नहीं मारते
इस मामले में कुछ दुकानदारों का तो यहां तक कहना है कि कलेक्टर गंज गल्ला मंडी से 200 मीटर की दूरी पर शहर का सबसे बड़ा गणेश मंदिर सिद्धिविनायक मंदिर बना है. गणेश जी चूहों के राजा हैं, उनकी सवारी भी चूहे ही हैं. गणेश मंदिर पास होने की वजह से हम चूहों पर हिंसा नहीं करते, इसलिए चूहे हमारी मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं.