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कमेटी में जमा लाखों रुपये, 7 करोड़ का गोल्ड बुक... क्या है सहारनपुर के सौरभ बब्बर के कर्ज की कहानी?

Saharanpur News: सौरभ बब्बर के नौकर गोलू ने बताया कि भैया गोल्ड कमेटी चलाते थे, जिसमें हर महीने एक मेंबर ₹2000 देता था. इसी तरह से 6-7 कमेटी चल रही थी. जिसकी पहले कमेटी खुल जाती थी उसे ₹25000 का गोल्ड देते थे. ये गोल्ड किसी व्यापारी से लेते थे.

सहारनपुर: सौरभ बब्बर सुसाइड केस सहारनपुर: सौरभ बब्बर सुसाइड केस
राहुल कुमार
  • सहारनपुर ,
  • 14 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 4:57 PM IST

सहारनपुर के ज्वैलर सौरभ बब्बर की खुदकुशी के बाद हर कोई गमजदा है. बीते दिन शहर के लॉन में एक शोक सभा का आयोजन किया गया. जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और मृतक के परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश की. इस दौरान वो कारोबारी भी शोक सभा में पहुंचे, जिनका सौरभ पर पैसा बकाया था. शोक सभा के बाद लोग दबी जुबान से 'बड़ा सर्राफ व्यापारी' का नाम ले रहे थे. कहा जा रहा है कि इस सर्राफ व्यापारी का बेटा सौरभ के 7 करोड़ रुपये लेकर दुबई भाग गया. 

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प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सौरभ बब्बर ने 8 साल पहले साईं नाम से एक समिति बनाई थी, जिसमें पहले 20 सदस्य थे और फिर बाद में बढ़कर 25 सदस्य हो गए थे. साईं समिति के सभी मेंबर मिलकर गरीब लोगों की मदद किया करते थे. समिति के लोगों द्वारा भंडारे का आयोजन, मुफ़्त राशन वितरण करना, बेटी की शादी में दान जैसे जनसेवा के काम किए जाते थे.

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साईं समिति के सदस्य विनय छाबड़ा ने बताया कि सौरभ उनसे हाल ही में मिला था. हम जितने भी सदस्य थे सभी ₹5000 हर महीने समिति के नाम पर दिया करते थे. 9 अगस्त को सौरभ मेरे पास आया और समिति के इकट्ठे हुए 1 लाख रुपये मुझे दिए. समिति के टोटल 1 लाख 45 हजार देने थे. लेकिन उसने कहा कि 45 हजार रह गए हैं. 

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सबकी जुबान पर एक सवाल- आखिर सौरभ ने ऐसा क्यों किया?

शोक सभा में हर कोई सिर्फ यही बात कर रहा था कि आखिर सौरभ बब्बर ने ऐसा क्यों किया? उसे इतना बड़ा कदम नहीं उठाना चाहिए था. उसे बच्चे और घर के बारे में सोचना था. हालांकि, देनदारों को अपने पैसे की भी चिंता भी हो रही थी. उन्हें कमेटी सिस्टम में जमा किए रुपयों के डूबने का डर सता रहा है. कमेटी का समय पूरा हो गया था, 11-12 अगस्त को पैसा मिलना था. लेकिन उससे पहले ही कर्ज के बोझ से परेशान सौरभ ने पत्नी संग गंगा में कूदकर जान दे दी. अभी तक सौरभ की पत्नी मोना की लाश नहीं मिली है.  

सौरभ बब्बर की शोकसभा

एक शख्स ने कहा कि मैंने गोल्ड का कुछ सामान उसकी (सौरभ) दुकान पर ठीक करने के लिए दिया था, जिसमें दो कड़े थे. कीमत 2 लाख के करीब थी.  सौरभ ने 12 तारीख को ले जाने के लिए कहा था, मगर उससे पहले ही आत्महत्या कर ली. गोल्ड हमने सौरभ के नौकर के सामने ही दिए थे जिसका नाम गोलू है. हम गोलू से बात करने का प्रयास कर रहे हैं, पता नहीं अब क्या होगा.  

कौन है ये 'बड़ा सर्राफ व्यापारी'? 

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सौरभ बब्बर की शोक सभा में एक और कहानी सामने आई. लोगों की जुबान पर बार-बार 'बड़ा सर्राफ व्यापारी' का नाम आ रहा था. बताया जा रहा है कि सौरभ बब्बर एक बड़े सर्राफ व्यापारी के साथ मिलकर काम किया करता था और इस बड़े व्यापारी से गोल्ड खरीदकर कमेटी के मेंबरों को कैश के बदले दिया करता था. तकरीबन 100 से अधिक मेंबरों को गोल्ड देना बाकी था, जिसके लिए बड़ा सर्राफ व्यापारी से करीब 7 करोड़ रुपये का गोल्ड बुक किया हुआ था. मगर व्यापारी का बेटा कुछ दिन पहले सारे पैसे लेकर दुबई चला गया. इसके बाद सर्राफ व्यापारी ने सौरभ को पैसे/गोल्ड वापस करने से फिलहाल मना कर दिया. 

नौकर गोलू ने दी ये जानकारी 

वहीं, लोगों का यह भी कहना है कि सौरभ बब्बर के यहां काम करने वाला गोलू हर राज जानता है. दुकान आने-जाने वाले हर किसी को वो जानता था. हो सकता है वो 'बड़ा सर्राफ व्यापारी' को भी जानता हो. हालांकि, जब 'आज तक' की टीम ने गोलू से बातचीत करने की कोशिश की तो उसने बताया कि मैं सौरभ बब्बर भैया को तब से जानता हूं जब उन्होंने ज्वैलरी की दुकान 12 साल पहले खोली थी. सौरभ भैया मेरे पास 9 अगस्त की रात को 2:00 बजे आए और मुझे दुकान की चाबी देकर चले गए. मैं दिन भर सौरभ भैया की दुकान पर ही रहता था और रात को सोने के लिए अपने घर चला जाता था. सौरभ भैया चाबी देने के लिए मेरे घर ही आए थे और उसके बाद से लापता हो गए. सौरभ भैया कमेटी तो काफी समय से चला रहे थे और सब कुछ ठीक चल रहा था, पता नहीं एकदम से ऐसा कौन सा डिप्रेशन था जो भैया को ऐसा करना पड़ा. 

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बकौल गोलू- भैया गोल्ड कमेटी चलाते थे जिसे किट्टी कमेटी भी बोलते हैं, इसमें हर महीने एक मेंबर ₹2000 देता है. इसी तरह से 6-7 कमेटी चल रही थी. इसमें ऐसा होता था जिसकी पहले कमेटी खुल जाती थी उसे ₹25000 का गोल्ड देते थे और उसके बाद उसकी कमेटी वहीं खत्म हो जाती थी. भैया मार्केट से ही गोल्ड खरीदते थे और पेमेंट लेते थे, किस से ज्यादा सामान लेते थे यह तो मुझे नहीं पता क्योंकि भैया खुद ही फोन पर बात किया करते थे. मैं तो सिर्फ जाकर पैसे लेकर आता था और जिससे भैया बोलते थे उससे गोल्ड लेकर आता था. 

अभी तक भाभी (मोना) का कुछ भी पता नहीं चला है. इस घटना से पहले मुझे भैया ने व्हाट्सएप पर दो फोटो और ऑडियो भेजी थी, फोटो हरिद्वार के पुल की थी और ऑडियो में बोल रहे थे कि गोलू यह सब को दिखा देना , हम जा रहे हैं दुनिया छोड़कर. भैया ने हमें कभी भी ऐसा महसूस होने नहीं दिया कि वह अंदर से कितने डिप्रेशन में थे.

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