
समाजवादी पार्टी के महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य के बाद एक और बड़े नेता शिवपाल सिंह यादव ने भी अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाने की घटना को सही ठहराया है. शिवपाल ने तत्कालीन सपा की मुलायम सिंह यादव सरकार का बचाव किया और कहा, संविधान की रक्षा के लिए कारसेवकों पर गोली चलवाई गई थी. जब कोर्ट का ऑर्डर यथास्थिति बनाए रखने के लिए था और उसका उल्लंघन किया गया तो इस पर कार्रवाई की गई थी.
शिवपाल का कहना था कि संविधान की रक्षा की गई थी. कोर्ट के आदेश का पालन हुआ था. बीजेपी के लोग तो झूठ बोलते हैं. कोर्ट ने स्टे दिया था और वहां विवादित ढांचा (बाबरी मस्जिद) को इन लोगों ने तोड़ा था. ऐसे में वहां के प्रशासन की यथास्थिति बनाए रखने की जिम्मेदारी थी. शिवपाल ने पूछा- उस समय कितने संविधान और कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया था? कोर्ट के खिलाफ जाने पर तो कार्रवाई होनी चाहिए थी. लेकिन कार्रवाई नहीं करते हैं. बीजेपी का 22 जनवरी को राजनीतिक कार्यक्रम है. विपक्ष के लोगों को नहीं जाना है. 22 जनवरी के बाद हम लोग परिवार के साथ अयोध्या जाएंगे और दर्शन करेंगे. हम लोग भगवान राम को मानते हैं. जितने भी देवता हैं, उनको भी मानते हैं.
'स्वामी प्रसाद ने कहा था, अराजतक तत्वों ने तोड़फोड़ की थी'
इससे पहले सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने 10 जनवरी को एक बयान में कारसेवकों को अराजतक तत्व बताया था. उन्होंने यह भी बताया था कि तत्कालीन सपा सरकार ने कारसेवकों पर गोली क्यों चलवाई थी? स्वामी प्रसाद का कहना था कि जिस समय अयोध्या में राम मंदिर पर घटना घटी थी, वहां पर बिना किसी न्यायपालिका या प्रशासनिक के आदेश के बड़े पैमाने पर अराजतक तत्वों ने तोड़फोड़ की थी. स्वामी प्रसाद ने आगे कहा, तत्कालीन सरकार ने संविधान और कानून की रक्षा के लिए, अमन-चैन कायम करने के लिये गोली चलवाई थी. वो सरकार का अपना कर्तव्य था और सरकार ने अपना कर्तव्य निभाया था.
अयोध्या में क्या हुआ था 1990 में...
बता दें कि 33 साल पहले 1990 में अयोध्या के हनुमान गढ़ी जा रहे कारसेवकों को गोलियां चलाई गईं थीं. तब यूपी में सपा की सरकार थी और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे. हिंदू साधु-संत अयोध्या कूच कर रहे थे. उन दिनों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ अयोध्या पहुंचने लगी थी. प्रशासन ने अयोध्या में कर्फ्यू लगा रखा था, इसके चलते श्रद्धालुओं के प्रवेश नहीं दिया जा रहा था. पुलिस ने बाबरी मस्जिद के 1.5 किलोमीटर के दायरे में बैरिकेडिंग कर रखी थी. कारसेवकों की भीड़ बेकाबू हो गई थी.
'गरमा गया था पूरे देश का माहौल'
पहली बार 30 अक्टूबर, 1990 को कारसेवकों पर चली गोलियों में 5 लोगों की मौत हुई थी. इस घटना के बाद अयोध्या से लेकर देश का माहौल पूरी तरह से गर्म हो गया था. इस गोलीकांड के दो दिनों बाद ही 2 नवंबर को हजारों कारसेवक हनुमान गढ़ी के करीब पहुंच गए थे. इस घटना के दो साल बाद 6 दिसंबर, 1992 में विवादित ढांचे को गिरा दिया गया था.
साल 1990 की घटना के 23 साल बाद जुलाई 2013 में मुलायम सिंह यादव ने एक बयान में कहा था कि उन्हें गोली चलवाने का अफसोस है, लेकिन उनके पास अन्य कोई विकल्प नहीं था.
आजतक' से खास बातचीत में मुलायम ने कहा था कि उस समय मेरे सामने मंदिर-मस्जिद और देश की एकता का सवाल था. बीजेपी वालों ने अयोध्या में 11 लाख की भीड़ कारसेवा के नाम पर लाकर खड़ी कर दी थी. देश की एकता के लिए मुझे गोली चलवानी पड़ी. हालांकि मुझे इसका अफसोस है. लेकिन और कोई विकल्प नहीं था.