Advertisement

'कभी हिंदू बहुल इलाका हुआ करता था...', संभल के 150 साल पुरानी बावड़ी की कहानी महारानी की पोती की जुबानी

संभल में 150 साल पुरानी बावड़ी की महारानी सुरेंद्र बाला की पोती शिप्रा बाला ने बताया कि पहले ये इलाका हिंदू बहुल हुआ करता था. लेकिन जब उनके पिता ने अपनी प्रॉपर्टी बदायूं के अनेजा को बेची और बाद में उन्होंने प्लॉटिंग करवाकर इसे मुस्लिम लोगों को बेच दिया.

बावड़ी की मालकिन की पोती ने क्या बताया? बावड़ी की मालकिन की पोती ने क्या बताया?
पीयूष मिश्रा/अनूप कुमार
  • संभल,
  • 23 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 12:48 PM IST

उत्तर प्रदेश के संभल में 46 साल पुराना मंदिर मिलने के बाद DM को एक शिकायती पत्र दिया गया था, जिसमें कहा गया था कि लक्ष्मण गंज में पहले बिलारी की रानी की बावड़ी थी. जिसके बाद यहां खुदाई की गई तो तीन मंजिला रानी की बावड़ी मिली है. यहां की रानी रहीं सुरेंद्र बाला की पोती शिप्रा बाला ने बताया कि पहले यह इलाका हिंदू बहुल था.  

Advertisement

बिलाड़ी की रानी सुरेंद्र बाला की सबसे छोटी पोती शिप्रा बाला ने बताया कि मेरे पिता ने इसे बदायूं के अनेजा को बेचा था क्योंकि प्रॉपर्टी में कई हिस्सेदार थे, लेकिन उन्होंने प्लॉटिंग करके इसे मुस्लिमों को बेच दिया. इस कोठी को भी अनेजा ने आधे से ज्यादा मुस्लिमों को बेच दिया. पहले यहां सभी हिंदू ही थे. 

बावड़ी के संरक्षण को लेकर क्या बोलीं शिप्रा? 

उन्होंने इस पर कब्जे को लेकर कहा कि हम पांच बहनें हैं. हमारे लिए सौभाग्य की बात होगी कि हमारी प्रॉपर्टी हमें वापस मिल जाए. हालांकि प्रशासन का इरादा इसे जमीन से निकालकर संरक्षित करने का है. वहीं राजस्व विभाग की नजर में यहां अतिक्रमण हुआ है. बता दें कि चंदौसी का लक्ष्मण गंज क्षेत्र 1857 से पहले हिंदू बहुल था. यहां सैनी समाज के लोग रहते थे, लेकिन अब यहां मुस्लिम आबादी ज्यादा संख्या में है. 

Advertisement

बाबड़ी को लेकर डीएम ने क्या बताया?  

डीएम राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि इसे तीन मंजिल का बताया जा रहा है. इसमें नीचे के दो मंजिल मार्बल के हैं, ऊपर का ईंटों का बना है. 400 वर्गमीटर क्षेत्र का है. वर्तमान में 210 वर्गमीटर ही है. बकाये पर कब्जा है, जिसे जल्द ही खाली कराया जाएगा. 

रानी की बावड़ी में क्या-क्या है? 

रानी की बावड़ी की खुदाई में 50 से ज्यादा मजदूर लगे हुए हैं, जबकि ऊपर से मिट्टी हटाने के लिए जेसीबी लगाई गई हैं. जब बावड़ी के अंदर आजतक की टीम पहुंची तो उसका दरवाजा पूरी तरह मंदिर जैसा दिखाई दिया. बावड़ी के अंदर एक सुरंग भी है, जैसे ही सीढ़ियां खत्म होती हैं, वैसे ही सुरंग है. यहां लगातार खुदाई चल रही है. ये बावड़ी करीब 10-12 मीटर लंबी और 28 फीट गहरी बताई जा रही है. 

संभल में अब मिली 250 फीट गहरी रानी की बावड़ी, मिट्टी से भर दी गई थी ऐतिहासिक विरासत, राजस्व विभाग करा रहा खुदाई

कितनी पुरानी है बावड़ी? 

रानी की ये बाबड़ी करीब 150 साल पुरानी बताई जाती है. इसका इस्तेमाल पहले पानी स्टोर करने के लिए और सैनिकों के आराम करने के लिए किया जाता था. इन दीवारों में अभी भी नमी है क्योंकि यहां पानी रहता था. इस वक्त यहां जेसीबी लगी हुई है. अलग-अलग की मशीनें लाई गई हैं. खुदाई के दौरान सोमवार की सुबह ही सीढ़ियां मिली हैं. ये सीढ़ियों से होता हुआ रास्ता बावड़ी की ओर जाता है. 

Advertisement

संभल और अलीगढ़ के बाद अब बुलंदशहर के खुर्जा में मिला 50 साल पुराना मंदिर, 1990 से पड़ा है वीरान

बावड़ी के अंदर कमरों के अलावा भी कई चीजें 

बावड़ी की बनावट पहले के जमाने की  है. कहा जा रहा है कि तीन मंजिला बाबड़ी है. इसमें अबतक छह फीट की खुदाई पूरी कर ली गई है. करीब तीन मंजिला इमारत है. कमरे और अलग-अलग की चीजें हैं. उन्हें जानने के लिए प्रशासन खुदाई करवा रहा है. पहले मार्बल इस्तेमाल करके दीवार बनाई गई हैं. बावड़ी पर मिट्टी डालकर उसे ढंक दिया गया था. इसके आसपास घरों का निर्माण कराया गया था. यहां पर भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात हैं. यहां से 150 मीटर दूर इलाके का प्रसिद्ध मंदिर है. 

TOPICS:
Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement