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UP: गन्ने के बकाया भुगतान और बेटी की फीस न जमा होने से परेशान किसान ने की खुदकुशी, खेत में पड़ा मिला खून से लथपथ शव

शामली के गांव पूर्व माफी में किसान आजाद (50) ने आर्थिक तंगी से परेशान होकर खेत में गोली मारकर आत्महत्या कर ली. गन्ने का ₹2 लाख बकाया भुगतान न मिलने, बेटी की स्कूल फीस न जमा होने और कर्ज के दबाव में आकर उसने यह कदम उठाया. पुलिस का कहना है कि मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

किसान आजाद ने की खुदकुशी (फाइल-फोटो) किसान आजाद ने की खुदकुशी (फाइल-फोटो)
शरद मलिक
  • शामली ,
  • 26 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 5:17 PM IST

उत्तर प्रदेश के शामली में कर्ज और आर्थिक तंगी से परेशान होकर एक किसान ने खुद को खेत में गोली मारकर खुदकुशी कर ली. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मामले की जांच शरू की. मृतक की पहचान 50 साल के आजाद के तौर पर हुई है. 

मृतक के परिजनों का कहना है कि गन्ने का ₹2 लाख बकाया था. भुगतान न मिलने, बेटी की स्कूल फीस जमा नहीं हो पाई थी और पत्नी के इलाज के लिए पैसे नहीं थे. जिसके कारण वह तनाव में था. 

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खेत में मिला शव, पास में पड़ा था तमंचा

मंगलवार सुबह किसान आजाद रोज की तरह खेत पर गए थे. उनके साथ दो नौकर भी थे, जो खेत में काम में जुट गए. कुछ देर बाद गोली चलने की आवाज आई. नौकर भागकर मौके पर पहुंचे तो देखा कि आजाद का शव खून से लथपथ पड़ा था और उनके सीने में गोली लगी थी.

नौकरों ने तुरंत परिजनों और ग्रामीणों को सूचना दी. पुलिस को भी खबर दी गई. झिंझाना पुलिस सीओ श्याम सिंह के नेतृत्व में मौके पर पहुंची और जांच शुरू की. पुलिस को शव के पास से एक तमंचा भी मिला, जिसे कब्जे में ले लिया गया.

कर्ज, गन्ने का भुगतान और बेटी की फीस बना आत्महत्या की वजह

परिजनों ने बताया कि आजाद पर बैंक का करीब ₹3.5 लाख और सरकारी समिति का ₹1.25 लाख कर्ज था. इसके अलावा, थाना भवन मिल पर गन्ने का ₹2 लाख बकाया था. बकाया राशि न मिलने से वह बेटी की ₹40,हजार रुपये स्कूल फीस नहीं भर पाया और पत्नी की बीमारी का इलाज भी नहीं करवा सका.

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शराब की लत और मानसिक तनाव

पुलिस की जांच में सामने आया कि कर्ज और आर्थिक तंगी के कारण आजाद तनाव में रहने लगे थे और शराब पीने की आदत बढ़ गई थी. परिजनों को भी उन्होंने अपनी समस्याओं के बारे में कुछ नहीं बताया.

आजाद के भाई धर्मेंद्र ने बताया कि वह और आजाद एक ही घर में रहते थे, लेकिन खेती अलग-अलग करते थे. आजाद के 18 वर्षीय बेटे सिद्धार्थ ने पढ़ाई छोड़कर खेती संभाल ली थी, जबकि उनकी बेटी दीया (कक्षा 9) एक निजी स्कूल में पढ़ रही थी. आजाद की मौत से परिवार में गहरा दुख है और गांव में शोक का माहौल है.

नोट:- (अगर आपके या आपके किसी परिचित के मन में आता है खुदकुशी का ख्याल तो ये बेहद गंभीर मेडिकल एमरजेंसी है. तुरंत भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 पर संपर्क करें. आप टेलिमानस हेल्पलाइन नंबर 1800914416 पर भी कॉल कर सकते हैं. यहां आपकी पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी और विशेषज्ञ आपको इस स्थिति से उबरने के लिए जरूरी परामर्श देंगे. याद रखिए जान है तो जहान है.)

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