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चार साल बाद यूपी लौटा अतीक, किडनैपिंग का वो केस जिसके चलते गुजरात की जेल में बंद था माफिया डॉन अतीक

उमेश पाल हत्याकांड के मामले में बाहुबली अतीक अहमद को गुजरात की साबरमती जेल से प्रयागराज लाया जा रहा है. लेकिन यूपी का ये बाहुबली अतीक अहमद आखिर साबरमती जेल कैसे पहुंचा? इस पूरे मामले को चलिए जानते हैं विस्तार से...

अतीक अहमद (फाइल फोटो) अतीक अहमद (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 27 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 2:08 PM IST

बाहुबली अतीक अहमद को गुजरात की साबरमती जेल से प्रयागराज लाया जा रहा है. दरअसल, उमेश पाल हत्याकांड मामले में अतीक अहमद आरोपी है. लेकिन अतीक आखिर यूपी से गुजरात की साबरमती जेल कैसे पहुंचा? चलिए जानते हैं उस केस के बारे में जिस कारण वह साबरमती जेल पहुंचा.

अतीक अहमद को जून 2019 में साबरमती जेल में शिफ्ट किया गया था. वो पहले यूपी की नैनी जेल में बंद था. बाद में उसे साबरमती की हाई सिक्योरिटी जेल में भेज दिया गया था.

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दरअसल, अप्रैल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अतीक अहमद को नैनी जेल से साबरमती जेल में शिफ्ट करने का आदेश दिया था. उस पर देवरिया के एक कारोबारी को जेल में बुलाकर धमकाने और अपहरण करने का केस दर्ज हुआ था.

क्या था पूरा मामला?
मोहित जायसवाल नाम के कारोबारी ने दिसंबर 2018 में एफआईआर दर्ज कराई थी. जायसवाल ने दावा किया था कि अतीक अहमद के गुर्गों ने लखनऊ से उसको अगवा कर लिया था. बाद में उसे नैनी जेल ले जाया गया, जहां अतीक अहमद बंद था. जेल में अतीक अहमद ने उसे डराया और अपना सारा कारोबार उसके (अतीक) नाम करने की धमकी दी. यूपी सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में बताया था कि 26 दिसंबर 2018 को मोहित जायसवाल को जेल में लाकर अतीक अहमद और उसके गुर्गों ने धमकाया था.

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उमेश पाल हत्याकांड में कैसे फंसा अतीक अहमद?
19 साल पहले 2004 के लोकसभा चुनाव में बाहुबली नेता अतीक अहमद ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर यूपी की फूलपुर सीट से चुनाव जीता. उस समय अतीक अहमद इलाहाबाद पश्चिम सीट से विधायक भी थे.


अतीक अहमद सांसद बने तो विधायकी छोड़नी पड़ी. उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने अतीक अहमद के छोटे भाई अशरफ को उम्मीदवार बनाया. जबकि, बसपा की ओर से राजू पाल मैदान में थे. उपचुनावों में राजू पाल की जीत हुई.

राजू पाल पहली बार विधायक बने थे. 25 जनवरी 2005 को दिनदहाड़े गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई. इस हत्याकांड में अतीक अहमद और अशरफ का नाम सामने आया.

उमेश पाल थे मुख्य गवाह
राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल थे. उन्हें धमकियां भी मिलती थीं. जिसके बाद अदालत के आदेश पर उमेश पाल को यूपी पुलिस की तरफ से सुरक्षा के लिए दो गनर मिले थे. उमेश पाल की पत्नी जया पाल ने आरोप लगाया है कि 2006 में अतीक अहमद और उसके साथियों ने उनके पति को अदालत में उनके पक्ष में गवाही देने के लिए धमकाया था.

24 फरवरी को उमेश की हत्या की गई
गौरतलब है कि 24 फरवरी को उमेश पाल की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस हमले में उमेश पाल के दो सिक्योरिटी गार्ड भी मारे गए थे. उमेश पाल 2005 में हुए राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह थे. उमेश जब राजू पाल हत्याकांड की सुनवाई से लौट रहे थे तब उन पर हमला किया गया है. हमलावरों ने पहले बम फेंका और फिर कई राउंड फायरिंग की.

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मंगलवार को कोर्ट में किया जाएगा पेश
पुलिस अब अतीक अहमद को साबरमती जेल से प्रयागराज ला रही है. सोमवार की रात उसे नैनी जेल में ही रखा जाएगा. फिर मंगलवार सुबह उसे एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश किया जाएगा. इतना ही नहीं, इसी हत्याकांड के सिलसिले में अतीक के भाई अशरफ को भी बरेली से प्रयागराज लाया जा रहा है.

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