
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बाहुबली उदयभान करवरिया को सजा की समयावधि से पहले ही आचरण को देखते हुए रिहाई का आदेश दिया गया है. उदयभान करवरिया को MLA जवाहर पंडित हत्याकांड में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. आखिर कौन है उदयभान करवरिया, जिसने प्रयागराज में AK 47 से सनसनी मचा दी थी?
दरअसल, 13 अगस्त 1996 को प्रयागराज में पूर्व विधायक जवाहर पंडित और उनके ड्राइवर गुलाब की दिनदहाडे़ गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. 28 साल पहले हुए इस हत्याकांड में सजायाफ्ता उदयभान करवरिया की रिहाई के आदेश दिए गए हैं.
राज्यपाल की मंजूरी के बाद कारागार विभाग ने पूर्व विधायक उदयभान करवरिया की रिहाई का आदेश जारी कर दिया है. आदेश में कहा गया है कि 30 जुलाई 2023 तक उदयभान करवरिया ने 8 साल 3 माह 22 दिन की अपरिहार सजा और 8 वर्ष 9 माह 11 दिन की सपरिहार सजा काट ली है.
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एसएसपी और डीएम प्रयागराज द्वारा समय पूर्व रिहाई की संस्तुति किए जाने, जेल में करवरिया का आचरण उत्तम होने और दयायाचिका समिति द्वारा की गई संस्तुति के चलते समय पूर्व रिहाई का आदेश जारी किया गया है.
आदेश में कहा गया है कि एसपी और डीएम प्रयागराज के संतोषानुसार दो जमानतें, उतनी ही धनराशि का एक जमानती मुचलका प्रस्तुत करने पर बंदी को मुक्त कर दिया जाए.
पहली बार प्रयागराज में गरजी थी एके-47
13 अगस्त 1996 को सपा के पूर्व विधायक जवाहर यादव उर्फ जवाहर पंडित को दिनदहाड़े प्रयागराज में गोलियों से छलनी कर दिया गया था. यह पहली बार था, जब इलाहाबाद में एके-47 गरजी थी. इस मामले में अदालत ने 4 नवंबर 2019 में करवरिया बंधुओं (पूर्व बसपा सांसद कपिल मुनि करवरिया, पूर्व भाजपा विधायक उदयभान करवरिया और पूर्व बसपा एमएलसी सूरजभान करवरिया), उनके साथी रामचंद्र त्रिपाठी उर्फ कल्लू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.
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मूलरूप से कौशांबी के मंझनपुर के चकनारा गांव के रहने वाले करवरिया परिवार को पूरे इलाहाबाद में राजनीतिक रसूख के लिए जाना जाता था. उदयभान करवरिया इस परिवार के पहले सदस्य थे, जिन्होंने सियासी जीत हासिल की थी. इससे पहले उनके दादा जगत नारायण करवरिया ने साल 1967 में सिराथू सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन चुनाव हार गए थे.
उदयभान के पिता विशिष्ट नारायण करवरिया ऊर्फ भुक्खल महाराज ने इलाहाबाद उत्तरी और दक्षिणी विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें भी जीत नहीं मिली. उदयभान करवरिया ने उस समय जीत हासिल की थी, जब यूपी में गिनी चुनी सीटों पर भाजपा जीतती थी. यह जीत उदयभान करवरिया के बाहुबल का नतीजा बताई गई, लेकिन जवाहर पंडित की हत्या के बाद अब सिर्फ उदयभान करवरिया को उनके जेल में अच्छे आचरण के चलते रिहाई दी जा रही है.
कैसे की गई थी जवाहर पंडित की हत्या?
13 अगस्त 1996... उस दिन मंगलवार था. जवाहर पंडित ने अपने विधानसभा क्षेत्र को घूमने का मन बनाया. वे मारुति 800 कार में अपने प्राइवेट गनर कल्लन यादव और ड्राइवर गुलाब यादव के साथ झूंसी के लिए घर से निकले. घर से थोड़ा दूर जाते ही गुलाब ने जवाहर को बताया कि शायद एक वैन उनकी गाड़ी का पीछा कर रही है. इस पर पंडित ने कहा कि ये सब राजकाज है, चुनावी मौसम है, ये सब होता रहता है. घबराने की बात नहीं है.
गाड़ी जैसे ही सिविल लाइन की तरफ मुड़ी तो पीछे पीछे वो वैन भी उसी तरफ चल दी. सुभाष चौराहे तक पहुंचते पहुंचते जवाहर को अब किसी अनहोनी का अंदेशा हो चुका था, इसलिए उन्होंने अपने ड्राइवर से गाड़ी भगाने के लिए कहा, लेकिन कॉफी हाउस के पास एक कार ने पंडित की गाड़ी को ओवरटेक कर बीच सड़क पर गाड़ी रोक दी. इस दौरान पीछा कर रही वैन पड़ोस में आकर लग गई.
यह सब इतनी तेजी से हुआ कि जब तक पंडित और कल्लन अपने हथियार तक हाथ ले जाते, तब तक वैन में बैठे बदमाशों ने गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. यह पहली बार था जब इलाहाबाद ने एके-47 की आवाज सुनी. डेढ़ मिनट तक चली इस गोलीबारी में एके-47 और ऑटोमैटिक राइफल से लेकर पिस्टल, रिवॉल्वर हर तरह के हथियार का इस्तेमाल हुआ. कुछ देर बाद जब बदमाश वहां से भाग गए तो लोगों ने पाया कि जवाहर पंडित गोलियों से छलनी, लहूलुहान पड़े हुए हैं. कार के पीछे आ रहा एक शख्स भी इस गोलीबारी का शिकार हुआ था.