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यूपी उपचुनाव में मायावती का कास्ट अम्ब्रेला किसका गेम बिगाड़ेगा? जानिए सीटवार जातीय समीकरण

यूपी की नौ विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव हो रहे हैं. नामांकन के बाद अब हर सीट की फाइट को लेकर तस्वीर साफ हो चुकी है. सपा-बीजेपी की फाइट में बसपा किसका गेम बिगाड़ेगी और किस सीट पर क्या जातीय समीकरण हैं?

अखिलेश यादव, मायावती और योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो) अखिलेश यादव, मायावती और योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 28 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 10:26 PM IST

उत्तर प्रदेश की नौ विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) के लिए नाक का सवाल बन गए हैं. बीजेपी ने उपचुनाव वाली सीटों पर मंत्री-विधायक-सांसदों की फौज उतार दी है तो वहीं सपा ने भी पूरी ताकत झोंक दी है. सत्ताधारी और मुख्य विपक्षी पार्टी के बीच की इस फाइट को मायावती की अगुवाई वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की एंट्री ने त्रिकोणीय बना दिया है. सवाल है कि उपचुनावों में उम्मीदवार उतारने से अक्सर परहेज करने वाली बसपा की सोशल इंजीनियरिंग इस बार किस सीट पर किसका गेम बिगाड़ सकती है और कहां कैसे जातीय समीकरण हैं?

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किस सीट पर किसका गेम बिगाड़ेगी बसपा?

मायावती की पार्टी ने नौ सीटों के उपचुनाव में टिकटों का बंटवारा करते समय किसी एक जाति या समुदाय पर मेहरबान नजर आने की जगह अलग-अलग जाति, संप्रदाय के उम्मीदवार उतारने पर जोर दिया है. इसमें एक-एक सीट के समीकरणों का भी खयाल नजर आता है. किस सीट का जातीय समीकरण क्या है और बसपा किसे नुकसान पहुंचा सकती है?

कुंदरकी

मुरादाबाद जिले की कुंदरकी विधानसभा सीट की बात करें तो यह मुस्लिम बाहुल्य सीट है. कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र में आधे से अधिक, करीब 60 फीसदी मुस्लिम आबादी है. कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र में कुल 3 लाख 95 हजार 375 मतदाता हैं. इनमें से हिंदू मतदाताओं की तादाद 1 लाख 56 हजार है. हिंदू मतदाताओं में भी बड़ी संख्या दलितों की है. मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 2 लाख 39 हजार 375 है जिनमें सामान्य मुस्लिम मतदाता 1 लाख 15 हजार और पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) के 1 लाख 24 हजार 375 वोटर हैं.

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करीब 40 फीसदी हिंदू आबादी वाली इस सीट से बीजेपी ने रामवीर सिंह ठाकुर को टिकट दिया है. रामवीर जिस ठाकुर बिरादरी से आते हैं, उसकी आबादी कुंदरकी में अनुमानों के मुताबिक 30 से 35 हजार के बीच है. सपा से हाजी रिजवान मैदान में हैं तो वहीं बसपा ने रफतउल्ला उर्फ नेता छिद्दा को उपचुनाव के मैदान में उतारा है. रफतउल्ला तुर्क बिरादरी से आते हैं जो इस विधानसभा क्षेत्र में सबसे प्रभावी मुस्लिम कम्युनिटी है. 2022 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो सपा से  विधायक रहे जिया उर रहमान भी तुर्क बिरादरी से ही थे.   

सपा को एकमुश्त मुस्लिम वोट के साथ पिछड़ा और कुछ दलित वोट के सहारे जीत सुनिश्चित करने का भरोसा है तो वहीं बीजेपी को भी एकमुश्त हिंदू वोट के साथ कुछ तुर्क वोट के सहारे कुंदरकी में कमल खिलने की उम्मीद है. बसपा का भी अपना गणित है. मायावती की पार्टी की कोशिश दलितों के साथ तुर्क वोट का समीकरण गढ़ने की है. मायावती की पार्टी कुंदरकी में मजबूती से लड़ती है और दलित-तुर्क वोटों में सेंध लगाने में सफल रहती है तो सपा को नुकसान हो सकता है.

गाजियाबाद

गाजियाबाद विधानसभा सीट से बीजेपी ने ब्राह्मण चेहरा संजीव शर्मा, बसपा ने पीएन गर्ग के रूप में वैश्य और सपा ने दलित चेहरे सिंह राज जाटव को मैदान में उतारा है. इस विधानसभा सीट के जातीय समीकरणों की बात करें तो इस शहरी सीट पर करीब 25 फीसदी दलित-मुस्लिम वोटर हैं. कुल 4 लाख 61 हजार 360 वोटरों में करीब 80 हजार दलित और 35 हजार मुस्लिम मतदाता हैं. बसपा ने वैश्य समाज से उम्मीदवार दिया है जिसे बीजेपी का परंपरागत वोटर माना जाता है. बसपा अगर वैश्य वोटबैंक में सेंध लगाने में सफल रहती है तो बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकती है.

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खैर (सुरक्षित)

खैर विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. इस सीट पर बीजेपी के सुरेंद्र दिलेर, सपा से डॉक्टर चारु केन, बसपा ने डॉक्टर पहल सिंह और आजाद समाज पार्टी के नितिन कुमार चोटेल के बीच मुकाबला है. इस सीट के जातीय समीकरणों की बात करें तो यहां सबसे ज्यादा जाट हैं. जाट मतदाताओं की तादाद एक लाख 11 हजार से अधिक है. खैर में करीब 50 हजार दलित, 50 हजार के करीब सवर्ण और 30 हजार से ज्यादा दलित वोटर हैं. वैश्य और ओबीसी वर्ग के मतदाता भी यहां प्रभावी संख्या में हैं. इस सीट पर नतीजा तय करने में जाट और सवर्ण मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

करहल

अखिलेश यादव के इस्तीफे से रिक्त हुई करहल विधानसभा सीट सपा का गढ़ रही है. करहल सीट से सपा ने तेज प्रताप यादव, बीजेपी ने अनुजेश यादव और बसपा ने डॉक्टर अवनीश शाक्य को उम्मीदवार बनाया है. जातीय समीकरणों की बात करें तो करहल में करीब 30 फीसदी यादव, 15 फीसदी शाक्य, 14 फीसदी दलित, नौ फीसदी ठाकुर, छह फीसदी ब्राह्मण, तीन फीसदी लोधी, पांच फीसदी मुस्लिम और 18 फीसदी अन्य मतदाता हैं. बीजेपी और सपा, दोनों ही पार्टियों ने यादव चेहरों पर दांव लगाया है. ऐसे में अगर शाक्य और दलित साथ आ गए तो बसपा दोनों दलों का खेल खराब कर सकती है.

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फूलपुर

प्रयागराज जिले की फूलपुर विधानसभा सीट से बीजेपी ने दीपक पटेल, सपा ने मुस्तफा सिद्दिकी और बसपा ने जितेंद्र सिंह को टिकट दिया है. बीजेपी ने दलित मतदाताओं के बाद सबसे अधिक जनसंख्या वाले पटेल समाज से उम्मीदवार दिया है तो बसपा ने सवर्ण कार्ड चला है. सपा ने इस सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारा है.

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जातीय समीकरणों की बात करें तो फूलपुर में कुल करीब चार लाख मतदाता हैं जिनमें सबसे ज्यादा 75 हजार दलित, 70 हजार पटेल, 60 हजार यादव, 50 हजार मुस्लिम, 45 हजार ब्राह्मण, 22 हजार निषाद और 15 हजार राजपूत मतदाता हैं. सवर्णों को बीजेपी का वोटर माना जाता है. ऐसे में बसपा का अगड़ा कार्ड सत्ताधारी दल को नुकसान पहुंचा सकता है.

कटेहरी

अम्बेडकरनगर जिले की कटेहरी विधानसभा सीट में बीजेपी, सपा और बसपा, तीनो प्रमुख पार्टियों ने ओबीसी उम्मीदवारों पर दांव लगाया है. बीजेपी के टिकट पर धर्मराज निषाद, सपा से शोभावती वर्मा और बसपा से अमित वर्मा मैदान में हैं. बसपा ने भी उसी जाति से उम्मीदवार दिया है, जिससे सपा ने. ऐसे में इस सीट पर बसपा से नुकसान का अधिक खतरा सपा को माना जा रहा है.

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कटेहरी के जातीय समीकरणों की बात करें तो यहां लगभग चार लाख मतदाता हैं जिनमें एक लाख के करीब दलित हैं. करीब 50 हजार ब्राह्मण, 30 हजार राजपूत, 45 हजार कुर्मी, 40 हजार मुस्लिम और 30 हजार निषाद मतदाता कटेहरी विधानसभा क्षेत्र में हैं. करीब 22 हजार यादव, 20 हजार राजभर मतदाता भी इस सीट का नतीजा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. सपा और बसपा, दोनों ही दलों के उम्मीदवार कुर्मी जाति से आते हैं.

मझवां

मिर्जापुर जिले की मझवां विधानसभा सीट से बीजेपी ने पूर्व विधायक सुचिस्मिता मौर्य, सपा ने ज्योति बिंद और बसपा ने दीपक तिवारी को उम्मीदवार बनाया है. ब्राह्मणों को बीजेपी का वोटर माना जाता है और बसपा ने इस सीट पर इसी समाज से टिकट दिया है. ऐसे में अगर बसपा ब्राह्मण वोटबैंक में सेंध लगा पाती है तो बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकती है.

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इस सीट के जातीय समीकरणों की बात करें तो इस विधानसभा क्षेत्र में दलित, ब्राह्मण और बिंद मतदाताओं की संख्या करीब-करीब बराबर है. करीब 30 हजार कुशवाहा, 22-22 हजार गड़ेरिया और मुस्लिम, 20 हजार राजपूत और 16 हजार पटेल भी मझवां का परिणाम तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

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सीसामऊ

कानपुर की सीसामऊ सीट से बीजेपी और बसपा ने ब्राह्मण उम्मीदवार उतारे हैं तो वहीं सपा ने मुस्लिम कार्ड चला है. सपा ने इरफान सोलंकी की पत्नी नसीम सोलंकी, बीजेपी ने सुरेश अवस्थी और बसपा ने वीरेंद्र शुक्ला को टिकट दिया है. बसपा अगर ब्राह्मण वोटबैंक में सेंध लगा पाती है तो वह बीजेपी की ही टेंशन बढ़ाने वाली बात होगी. जातीय समीकरणों की बात करें तो अनुमानों के मुताबिक सीसामऊ में करीब 40 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं. ब्राह्मण और दलित के साथ ही कायस्थ और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता भी सीसामऊ सीट पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

मीरापुर

मुस्लिम बाहुल्य मुजफ्फरनगर जिले की मीरापुर विधानसभा सीट से बीजेपी की सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल ने उम्मीदवार दिया है. आरएलडी ने मिथिलेश पाल को प्रत्याशी बनाया है. वहीं, सपा ने सुम्बुल राणा और बसपा ने शाहनजर को मैदान में उतारा है. बसपा का मुस्लिम कार्ड सपा को नुकसान पहुंचा सकता है. इस सीट के जातीय समीकरणों की बात करें तो यहां मुस्लिम और ओबीसी, दोनों ही वर्ग के मतदाताओं की तादाद करीब-करीब बराबर है. अनुमानों के मुताबिक मीरापुर विधानसभा क्षेत्र में करीब 38 फीसदी ओबीसी, 37 फीसदी मुस्लिम, 19 फीसदी दलित मतदाता हैं.

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