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यूपी निकाय चुनाव: आरक्षण नियमों से बदला 11 मेयर सीटों का गणित, इमरान मसूद समेत ये हुए रेस से बाहर

उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव के लिए आरक्षण लिस्ट जारी कर दी गई है. इससे कई सीटों के गणित बदल गए हैं. नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत की कुल 760 सीटों पर इसका असर पड़ना तय है. इस फैसले के बाद चुनाव की तैयारी में जुटे कई दिग्गज अब रेस से बाहर हो गए हैं.

इमरान मसूद और मायावती इमरान मसूद और मायावती
कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली ,
  • 31 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 1:34 PM IST

उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है. नगर निगम के मेयर, नगर पालिका-नगर पंचायत अध्यक्ष और वार्ड पार्षद सीटों के लिए आरक्षण लिस्ट जारी कर दी गई है, जिसमें कई सीटों पर बड़ा उलटफेर हो गया है. नई आरक्षण सूची से कई सीटों के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं. पुराने आरक्षण के लिहाज से निकाय चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे कई दिग्गज उम्मीदवार और नेताओं के अरमानों पर पानी फिर गया है. हालांकि, सीटों के आरक्षण पर आपत्ति के बाद फाइनल लिस्ट जारी की जाएगी.

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नगर निकाय चुनाव का आरक्षण 
यूपी की कुल 762 नगर निकायों में से 760 नगर निकायों में चुनाव होगा, जिसके लिए आरक्षण की लिस्ट गुरुवार को जारी कर दी गई. यूपी के 17 नगर निगम के मेयर, 199 नगर पालिका के अध्यक्ष और 544 नगर पंचायत अध्यक्ष पद के आरक्षण घोषित कर दिया गया है. इसके अलावा नगर निगम, पालिका परिषद और पंचायतों के 13,965 वार्डों का भी आरक्षण जारी कर दिया है. 

एससी-एसटी-महिलाओं के लिए सीटें बढ़ीं
दिसंबर 2022 में निकाय चुनाव के ओबीसी आरक्षण लिस्ट को लेकर बवाल मचा था और मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा था. अब नई प्रक्रिया में ओबीसी के आरक्षण में कोई बदलाव नहीं हुआ. 760 नगरीय निकायों में पहले 205 सीटें ओबीसी के लिए आरक्षित थी. इस बार भी 205 सीटें ओबीसी के लिए आरक्षित की गई हैं. 

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अब नए आरक्षण सूची में एससी-एसटी और महिला आरक्षण को पहले की तुलना में फायदा मिला है. अनुसूचित जाति की आठ और अनुसूचित जनजाति की एक सीट बढ़ी है. एससी समुदाय के लिए पहले 102 सीटें आरक्षित थी, जबकि इस बार उनके लिए 110 सीटें आरक्षित हो गईं हैं. इसी तरह एसटी की पहले एक सीट आरक्षित होती थी, जो अब दो सीटें आरक्षित की गईं हैं.  महिलाओं के पहले 255 सीट थी, जो अब बढकर 288 हुई हैं. इस तरह से महिलाओं के लिए 33 सीटों की बढ़ोतरी हुई है. नगर पंचायत अध्यक्ष के लिए पहले महिलाओं के लिए 182 सीटें थी, जो अब बढ़कर 209 सीट हो गई है. इस तरह से नगर पालिका अध्यक्ष की 67 से बढ़कर 73 हो गई है. 

नगर निगम मेयर सीटों का आरक्षण
नगर निगम की कुल 17 मेयर सीट में से 8 सामान्य वर्ग, 3 महिला, दो महिला ओबीसी, दो पिछड़ा वर्ग, एक एससी और एक एससी महिला के आरक्षित की गई है. वाराणसी, प्रयागराज, अलीगढ़, बरेली, मुरादाबाद, गोरखपुर, अयोध्या और मथुरा की मेयर सीट अनारक्षित है. लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद मेयर सीट सामान्य महिला के लिए आरक्षित की गई है. शाहजहांपुर और फिरोजाबाद की मेयर सीट पिछड़ा वर्ग महिला तो सहारनपुर और मेरठ मेयर सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित की गई हैं. झांसी मेयर सीट एससी और आगरा मेयर सीट एससी महिला के लिए आरक्षित है.

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11 मेयर सीटों पर बदले समीकरण
नगर निगम की मेयर सीटों के लिए राज्य सरकार ने 5 दिसंबर 2022 को जो आरक्षण जारी किया था, उस लिहाज से देखें तो अब मेयर की 17 सीटों में से 11 सीटों पर आरक्षण की स्थिति पूरी तरह से बदल गई है. मथुरा और अलीगढ़ मेयर सीट पहले ओबीसी महिला के आरक्षित लिए थी, जो अब सामान्य वर्ग के लिए अनारक्षित हो गई हैं. प्रयागराज मेयर सीट ओबीसी के लिए आरक्षित थी, जो अब सामान्य वर्ग के लिए हो गई है. सहारनपुर मेयर सीट महिला से ओबीसी हो गई तो मुरादाबाद मेयर सीट महिला आरक्षण से सामान्य वर्ग हो गई. फिरोजाबाद और शाहजहांपुर की मेयर सीट अनारक्षित से ओबीसी महिला हो गई है तो गाजियाबाद, लखनऊ और कानपुर मेयर सीट अनारक्षित से महिला आरक्षित कर दी गई है. 

नगर पालिका-पंचायत में उलटफेर
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नए आरक्षण से जिस तरह नगर निगम की मेयर की 17 सीटों में से 11 सीटों पर आरक्षण की स्थिति बदल गई है, उसी तरह से नगर पालिका के अध्यक्ष पद की 100 और नगर पंचायत के अध्यक्ष पद की 269 सीटों पर आरक्षण में बड़ा उलटफेर हो गया है. नगर पालिका में पहले एससी महिला के लिए 9 सीटें थी, जो अब बढ़कर 18 हो गई हैं तो एससी की 18 सीटों से घटकर 8 हो गई है. ओबीसी महिला की 18 से बढ़कर 23 हो गई है, जबकि ओबीसी की 30 से घटकर 36 हो गई है. नगर पालिका की अनाराक्षित सीट 78 से बढ़कर 89 हो गई है.

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इमरान मसूद के अरमानों पर फिरा पानी
निकाय चुनाव में आरक्षण में हुए बदलाव से चुनाव की तैयारी में जुटे कई दिग्गज नेता दौड़ से बाहर हो गए हैं. सहारनपुर की मेयर सीट महिला से बदलकर ओबीसी के लिए आरक्षित हो गई है, जिसके चलते बसपा नेता इमरान मसूद की पत्नी का मेयर पद चुनाव लड़ने पर ग्रहण लग गया है. बसपा ने उन्हें प्रत्याशी बनाया था, लेकिन अब आरक्षण बदल जाने से चुनाव नहीं लड़ सकेंगी. बीजेपी से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे नेताओं के हाथ निराशा लगी है जबकि ओबीसी नेताओं के हौसले बुलंद हो गए हैं. 2017 में मेयर बने संजीव वालिया के चुनाव लड़ने की उम्मीद फिर जाग गई है.  

प्रयागराज में ओबीसी नेताओं को झटका
प्रयागराज नगर निगम की मेयर सीट पर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे ओबीसी नेताओं के लिए झटका लगा है, क्यों अब सामान्य सीट हो गई है. ओबीसी सीट होने के चलते अभी तक बीजेपी के पूर्व विधायक दीपक पटेल, कविता यादव, कारोबारी पदुम जायसवाल, पूर्व उपमहापौर अनामिका चौधरी, अनीता सचान, काशी प्रांत उपाध्यक्ष अवधेश चंद्र गुप्ता एवं पूर्व विधायक करण पटेल के पुत्र डॉ. विक्रम पटेल मेयर टिकट की दावेदारी कर रहे थे, लेकिन अब सामान्य सीट हो गई है. ऐसे में योगी सरकार के मंत्री नंद गोपाल नंदी की पत्नी अभिलाषा गुप्ता की दावेदारी मजूबत हो गई है, क्योंकि दो बार से मेयर हैं. इसी तरह से मथुरा और अलीगढ़ सीट ओबीसी के लिए आरक्षित थी, लेकिन अब अनारक्षित हो जाने से सामान्य वर्ग के नेता भी टिकट के दावेदार हो गए हैं. 

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लखनऊ से लेकर रायबरेली तक असर
लखनऊ मेयर सीट के आरक्षण बदल जाने से कई दावेदार दौड़ से बाहर हो गए हैं. फिरोजाबाद और शाहजहांपुर की मेयर सीट अनारक्षित से ओबीसी महिला हो गई है, जिसके चलते सामान्य वर्ग के नेता चुनावी मैदान से बाहर हो गए हैं. इस तरह से नगर पालिका और नगर पंचायत के चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे दिग्गज नेताओं के उम्मीदों को झटका लगा है. रायबरेली नगर पालिका सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे पूर्व अध्यक्ष इलियास मन्नी और मौजूदा अध्यक्ष पूर्णिमा श्रीवास्तव दौड़ से बाहर हो गई हैं, क्योंकि सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई. इसके चलते अपने भाई को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहे सपा के दिग्गज नेता मनोज पांडेय की उम्मीदों को झटका लगा है.

 

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