Advertisement

रेलवे-सेना भर्ती परीक्षा के लिए बनाए जा रहे थे फर्जी दस्तावेज, यूपी STF ने किया गैंग का भंडाफोड़

एसटीएफ इंस्पेक्टर पुनीत परिहार की शिकायत पर बलिया शहर थाने में मामला दर्ज किया गया है. एफआईआर का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि एसटीएफ की वाराणसी इकाई को सूचना मिली थी कि बलिया जिले के आसपास के इलाकों से यूपी में रहने वाले अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने के लिए पश्चिम बंगाल, खासकर कोलकाता के फर्जी निवास प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि एक संगठित गिरोह इस पर काम कर रहा है.

UP STF ने गैंग के सरगना को गिरफ्तार कर लिया (प्रतीकात्मक तस्वीर) UP STF ने गैंग के सरगना को गिरफ्तार कर लिया (प्रतीकात्मक तस्वीर)
aajtak.in
  • बलिया (यूपी),
  • 31 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 3:29 PM IST

उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने एक अंतरर्राज्यीय संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो फर्जी निवास प्रमाण पत्र और आधार कार्ड तैयार करके अवैध रूप से युवाओं को पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में रेलवे और सेना की प्रतियोगी परीक्षाओं में भर्ती कराता था. पुलिस सूत्रों ने सोमवार को बताया कि एसटीएफ की वाराणसी इकाई ने रविवार को बलिया शहर थाने के जमुई गांव में छापेमारी कर शशि भूषण उपाध्याय नामक जालसाज को गिरफ्तार किया. 

Advertisement

पीटीआई के मुताबिक एसटीएफ इंस्पेक्टर पुनीत परिहार की शिकायत पर बलिया शहर थाने में मामला दर्ज किया गया है. एफआईआर का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि एसटीएफ की वाराणसी इकाई को सूचना मिली थी कि बलिया जिले के आसपास के इलाकों से यूपी में रहने वाले अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने के लिए पश्चिम बंगाल, खासकर कोलकाता के फर्जी निवास प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि एक संगठित गिरोह इस पर काम कर रहा है. 

सूत्रों ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि शशि भूषण उपाध्याय नाम का व्यक्ति लोगों को सेना, रेलवे और अन्य सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में शामिल कराने के लिए फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाता है. रविवार को सूचना के आधार पर एसटीएफ ने बलिया जिले के बांसडीह थाना क्षेत्र के चांदपुर गांव निवासी उपाध्याय को गिरफ्तार कर उसके पास से बड़ी संख्या में फर्जी निवास प्रमाण पत्र बरामद किए हैं. 

Advertisement

एफआईआर के मुताबिक उपाध्याय ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वह बलिया और आसपास के युवाओं के लिए पश्चिम बंगाल खासकर कोलकाता के फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाता है. इसके आधार पर वे पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में सेना और रेलवे की भर्ती परीक्षाओं में शामिल होते हैं. वह एक प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तीन लाख रुपये तक वसूलता था. 

सूत्रों के मुताबिक उपाध्याय पश्चिम बंगाल निवासी मिथुन कर्मकार, मनोज कुमार सिंह और राजन सिंह नाम के लोगों की मदद से फर्जी निवास प्रमाण पत्र और आधार कार्ड बनवाता है. उपाध्याय ने पूछताछ में यह भी बताया कि वह अब तक एक हजार से ज्यादा फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवा चुका है. वह खुद भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वर्ष 2000 में सेना में भर्ती हुआ था. एफआईआर में कहा गया है कि प्रमाण पत्र सत्यापन के दौरान पकड़े जाने के डर से वह प्रशिक्षण बीच में ही छोड़कर भाग गया था.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement