
जल निगम के सहायक अभियंता के पद से रिटायर्ड हुए प्रेम चंद्र वर्मा की ओपन हार्ट सर्जरी हुई थी. डॉक्टर और अस्पताल का खर्चा तो किसी तरह चुका दिया, लेकिन पेंशन ना मिलने की वजह से अब दवा खरीदने तक के पैसे नहीं हैं. हालात यह हैं कि बिना किसी सहयोग के बिस्तर से उठ भी नहीं पाते. कई बार तो घर चलाने के लिए भी पैसों की व्यवस्था इधर-उधर से करनी पड़ती है. कुछ इसी तरह की समस्या से जूनियर इंजीनियर के पद से रिटायर्ड हुए ख्वाजा मसूद अहमद भी परेशान हैं. उन्होंने भी ओपन हार्ट सर्जरी कराई है.
ऐसी कहानी सिर्फ प्रेम चंद्र या ख्वाजा मसूद की नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) के साढ़े नौ हजार कर्मचारियों और पेंशनर्स की है. इन सभी को चार महीने से सैलरी और पेंशन नहीं मिली है. डिप्लोमा इंजीनियर्स पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश जल निगम के अध्यक्ष एसपी मिश्रा बताते हैं कि जल निगम नगरीय में 7142 पेंशनर्स और पारिवारिक पेंशनर्स हैं. इसके अलावा 2342 कर्मचारी हैं, जिन्हें चार महीने से सैलरी और पेंशन नहीं मिली है. हालात यह हैं कि किसी पेंशनर के पास दवा खरीदन के लिए पैसे नहीं हैं तो कोई कर्मचारी बच्चों के स्कूल की फीस नहीं भर पा रहा है. रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इन कर्मचारियों, अधिकारियों और पेंशनरों को उधार तक लेना पड़ रहा है. अब तो हालात यह हैं कि दुकानदारों ने उधार में राशन देना भी बंद कर दिया है. कर्जा देने से भी लोग इनकार कर रहे हैं. पहले से दिया कर्जा चुकाने का भी दबाव बनाया जा रहा है.
सीएम-मंत्री को कई बार दिए गए ज्ञापन
एसोसिएशन के महामंत्री बीके वाजपेई ने बताया कि इस बार कई बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नगर विकास मंत्री एके शर्मा, नमामि गंगे ग्रामीण पेयजल मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मुख्य सचिव, विभाग के प्रमुख सचिव को कई बार ज्ञापन दिया जा चुका है. हर बार आश्वासन मिलता है लेकिन सैलरी और पेंशन नहीं आती . बीच-बीच में एक महीने की सैलरी व पेंशन देने के बाद फिर कई महीनों तक कुछ नहीं दिया जाता. बीके वाजपेई कहते हैं कि हालात यह हो गए हैं कि हम लोगों को अपने ही पैसे के लिए बार-बार गिड़गिड़ाना पड़ता है. इसके बाद भी कहीं कोई सुनवाई नहीं है. उन्होंने बताया कि सबसे बुरी स्थिति में सात हजार पेंशनर्स हैं. वे इस महंगाई के दौर में दवा तक नहीं खरीद पा रहे हैं. बिना दवा और इलाज के इस बुढ़ापे में दिक्कत और बढ़ गई है.
26 सितंबर को बुलाई कर्मचारियों-पेंशनर्स की बैठक
उन्होंने बताया कि जल निगम संघर्ष समिति ने आगे आंदोलन की रणनीति तय करने के लिए 26 सितंबर को लखनऊ में प्रदेशभर के कर्मचारियों और पेंशनर्स की बैठक बुलाई है. उन्होंने बताया कि एक जुलाई 2006 से 11 मार्च 2010 के बीच का छठे वेतनमान का बचा वेतन भी अभी तक बकाया है. उन्होंने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद 400 करोड़ से अधिक की धनराशि एक साल पहले जल निगम को उपलब्ध करा दी गई थी. इसके बाद भी कुछ अड़चनें पैदा करके भुगतान रोका जा रहा है. उन्होंने बताया कि सेंटेज घटने के साथ जल निगम का परंपरागत काम दूसरी एजेंसियों को देने के कारण यह संकट आया है.