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Gyanvapi के व्यास तहखाने में आठ मूर्तियों की ऐसे हुई पूजा, पहली बार सामने आया Video

वाराणसी के जिला अदालत के बाद ज्ञानवापी के व्यास तहखाने में देर रात पूजा हुई. इसको लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. देर रात व्यास तहखाने में पूजा करते हुए वीडियो भी सामने आया है.

ज्ञानवापी के व्यास तहखाने में देर रात हुई पूजा ज्ञानवापी के व्यास तहखाने में देर रात हुई पूजा
aajtak.in
  • वाराणसी,
  • 01 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 3:36 PM IST

ज्ञानवापी के व्यास तहखाने में हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिल गया है. वाराणसी की जिला कोर्ट ने प्रशासन को आदेश दिया था कि 7 दिनों के अंदर पूजा की सभी व्यवस्थाएं पूरी की जाएं. अदालत के आदेश के बाद ही प्रशासन ने देर रात करीब 12.30 बजे तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर लिए और व्यास जी के तहखाने को खोलकर करीब दो बजे तक पूजा-पाठ शुरू करवा दी. भगवान शिव समेत आठ देवों की पूजा करते हुए वीडियो भी सामने आया है. 

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कैसे हुई पहली बार पूजा? 

सबसे पहले रात 12 बजे के करीब पंचगव्य से तहखाना शुद्ध किया गया. इसके बाद षोडशोपचार पूजन हुआ. गंगाजल और पंचगव्य से मूर्तियों को स्नान कराया गया. इसके बाद देवता महागणपति का आह्वान किया गया. फिर सभी विग्रह को चंदन, पुष्प, अक्षत धूप दीप नैवेद्य चढ़ाया गया और आरती की गई. व्यास जी के तहखाने में लगभग आधे घंटे तक पूजन हुआ.

व्यास तहखाने में किन देवताओं की हुई पूजा? 

व्यास तहखाने में विष्णु भगवान की एक प्रतिमा, गणेश भगवान की एक प्रतिमा, हनुमान की दो प्रतिमाएं, जोशीमठ की दो प्रतिमाए, एक राम नाम लिखा हुआ पत्थर, एक मकर अखंड ज्योति रखी हुई है, जिनकी देर रात व्यास परिवार की ओर पूजा की गई थी.  

रात में ही प्रशासन ने कर ली थी तैयारी 

वाराणसी जिला अदालत की ओर से ज्ञानवापी पर‍िसर में व्यास जी के तहखाने में नियमित पूजन-अर्चन की अनुमति दिए जाने के बाद देर रात बैरिकेडिंग से रास्ता बनाते हुए व्यास जी का तहखाना खोल दिया गया. इसके लिए डीएम एस. राजलिंगम और पुलिस कमिश्नर अशोक मुथा जैन समेत बड़े अधिकारी रात भर डटे रहे. रात 1.50 बजे परिसर से बाहर निकले डीएम ने कहा कि न्यायालय के आदेश का अनुपालन कर दिया गया है. 

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सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की मुस्लिम पक्ष की याचिका

वहीं मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट द्वारा दिए गए पूजा करने के अधिकार वाले आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और तुरंत सुनवाई की मांग की थी. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया और मुस्लिम पक्ष को इलाहाबाद हाई कोर्ट में जाने के लिए कहा था. 

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