
वाराणसी नगर निगम की कार्यकारिणी में बैठक में कावड़ियों के रूट में आने वाली मीट की दुकानों को सावन के महीने में बंद किए जाने का फैसला लिया गया. इस मुद्दे पर कारोबारी भी सहमत नजर आए. खास बातचीत में मीट कारोबारियों ने बताया कि वह इस फैसले के साथ हैं, क्योंकि इससे धर्म और आस्था जुड़ी हुई है, लेकिन उनकी मांग है कि इस दौरान सिर्फ मीट की दुकानें ही नहीं, बल्कि कांवड़ मार्ग में आने वाली शराब की दुकानें भी बंद की जाएं.
वाराणसी के शेख सलीम फाटक इलाके में गॉट मीट एसोसिएशन के सेक्रेटरी नदीम कुरैशी ने बताया कि सावन के महीने में जब भी ऐसा आदेश आता है कि कांवड़ मार्ग में पड़ने वाली मीट की सभी दुकानें बंद रहेंगी, तो मीट कारोबारी आस्था और भाईचारे का ध्यान रखते हुए अपनी दुकानों को स्वेच्छा से बंद कर लेते हैं. लेकिन इस पर राजनीति करना उचित नहीं है.
नदीम कुरैशी ने कहा कि वह तमाम मीट कारोबारियों से अपील करते हैं कि वह लोगों की आस्था का ध्यान रखें. वहीं व्यापारी नेता शकील अहमद ने बताया कि मीट कारोबार से जुड़े तमाम कारोबारी अपनी दुकान तो बंद कर लेते हैं, क्योंकि सावन माह बहुत ही पावन माह है, लेकिन वह सरकार से यह मांग भी कर रहे हैं कि कांवड़ मार्ग में जितनी भी शराब की दुकानें हैं, उन्हें भी बंद किया जाना चाहिए.
अगर मीट की दुकानें बंद हो रही हैं और शराब की दुकानें खुल रही हैं तो यह उचित नहीं है. इससे आस्था पर ठेस पहुंचती है. इसके अलावा छोटे मीट कारोबारियों को कम से कम सावन माह में यह छूट मिलनी चाहिए कि वह अपनी दुकानों को बंद तो कर ही रहे हैं, लेकिन उनको अपने घरों से मीट मांस बेचने की छूट मिलनी चाहिए. इससे न केवल उनकी रोजी-रोटी चलेगी, बल्कि मुस्लिम समाज के त्योहार के मद्देनजर भी जो मीट मांस की जरूरत होती है, उसकी भी पूर्ति हो सकेगी.
मीट कारोबारी अदनान खान ने कहा कि कांवड़ मार्ग में आने वाली शराब की सभी दुकानों को भी बंद किया जाना चाहिए. वहीं एक अन्य मीट कारोबारी शौकत अली कुरैशी ने बताया कि बनारस में गंगा जमुनी तहजीब को ध्यान में रखकर हिंदू-मुसलमान पर्वों को साथ में मनाते हैं. मुसलमान सावन माह में अपनी दुकानों को बंद करके कांवड़ियों के लिए स्टॉल भी लगाते हैं. इसलिए वह अपनी दुकानों को स्वेच्छा से बंद कर देते हैं.