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कौन हैं बहराइच की DM, जिन्हें मिलेगा प्रधानमंत्री पुरस्कार? जानिए IAS मोनिका रानी की कहानी

आईएएस मोनिका रानी बीते साल बहराइच में आदमखोर भेड़ियों को पकड़ने के लिए चलाए गए 'Operation wolf' और मूर्ति विसर्जन के दौरान भड़की हिंसा के दौरान दंगाइयों से निपटने के चलते सुर्खियों में आई थीं. 

IAS मोनिका रानी IAS मोनिका रानी
राम बरन चौधरी
  • बहराइच ,
  • 16 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 4:37 PM IST

यूपी के बहराइच जिले की डीएम मोनिका रानी को प्रधानमंत्री पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है. वह बीते साल बहराइच में आदमखोर भेड़ियों को पकड़ने के लिए चलाए गए 'Operation wolf' और मूर्ति विसर्जन के दौरान भड़की हिंसा के दौरान दंगाइयों से निपटने के चलते सुर्खियों में आई थीं. 

आईएएस मोनिका रानी को बतौर डीएम वर्ष 2023 में 'जिले का संपूर्ण विकास' की श्रेणी में आगामी 21 अप्रैल को सिविल सर्विस डे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी PM Excellence Award से सम्मानित करेंगे. देश भर के 10 जिलों में शामिल बहराइच यूपी का एकमात्र ऐसा जिला है जिसकी डीएम मोनिका रानी की अनूठी पहल 'सेवा से संतृप्तिकरण अभियान' के चलते उन्हें पुरस्कार के लिए नामित किया गया है. 

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'सेवा से संतृप्तिकरण अभियान' के तहत डीएम  मोनिका रानी ने इंडो-नेपाल  सीमावर्ती जिले बहराइच के दूरस्थ गांव में सरकार के सभी विभागों से संचालित योजनाओं के स्टॉल लगाकर अपनी व जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ दिलाया.  जिसके बेहद कम समय में सार्थक परिणाम भी सामने दिखाई पड़े. 

डीएम मोनिका रानी के इसी कार्य के उत्कृष्ट कार्यान्वयन, विकसित भारत संकल्प यात्रा तथा आकांक्षी जनपद बहराइच के चर्तुमुखी विकास के लिए निर्धारित सूचकांकों में उत्कृष्ट उपलब्धि अर्जित करने के लिए कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय, प्रशासनिक सुधार, भारत सरकार द्वारा वर्ष 2023 के लिए  ‘जिले का सम्पूर्ण विकास’ की श्रेणी हेतु प्रधानमंत्री पुरस्कार हेतु चयनित किया गया है. 

क्यों की गई है प्रधानमंत्री पुरस्कार की स्थापना?

दरअसल, रचनात्मक प्रतिस्पर्धा, नवाचार, प्रतिकृति और सर्वोत्तम प्रथाओं के संस्थागतकरण (Institutionalization) को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से देश भर में सिविल सेवकों द्वारा किए गए अनुकरणीय कार्यों को मान्यता देने तथा पुरस्कृत करने के लिए भारत सरकार द्वारा लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार की स्थापना की गई है. 

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प्रधानमंत्री पुरस्कार के चयन की क्या हैं जटिलताएं ?

इस पुरस्कार के चयन के लिए 4 जटिल प्रक्रियाओं स्क्रीनिंग कमेटी, एक्सपर्ट कमेटी, सिटीज़न फीडबैक, एम्वाईड कमेटी की पारखी नजरों से गुजरने के बाद एक उच्च स्तरीय समिति के द्वारा संबंधित जनपद का भ्रमण कर ज़मीनी हकीकत को परखा जाता है, फिर उसके बाद देश के प्रधानमंत्री के अनुमोदन के बाद चयनित जिलों की सूची को अंतिम रूप दिया जाता है. 

क्या है इस अवॉर्ड की विशेषता?

इस अवार्ड की विशेषता यह है कि देश के 700 से अधिक जनपदों में से ‘जिले का सम्पूर्ण विकास’ की श्रेणी के लिए 10 जनपद चयनित किये गये हैं. जिसमें बहराइच उत्तर प्रदेश का अकेला जनपद है जिसे वर्ष 2023 हेतु प्रधानमंत्री पुरस्कार के लिए चुना गया है. 

कौन हैं मोनिका रानी?

हरियाणा के गुरुग्राम में 1982 में जन्मी मोनिका रानी की गिनती तेज तर्रार आईएएस अधिकारियों में होती है. उन्होंने पढ़ाई के दौरान वाणिज्य में स्नातक और अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री कंप्लीट की है. 

गृहिणी से आईएएस अधिकारी बनने का सफर

मोनिका रानी बचपन से ही आईएएस अधिकारी बनने का सपना देखती थीं और अपने भाई की पढ़ाई से बहुत अधिक प्रेरित थीं. हालांकि, 2005 में उनकी शादी हो गई और वह मां भी बन गईं. इस दौरान उन्होंने दिल्ली के एक सरकारी स्कूल में बतौर शिक्षिका नौकरी भी की. अपने सपने को पूरा करने के लिए आठ माह के बच्चे की मां होने के बावजूद उन्होंने सिविल सर्विस की कठिन तैयारी शुरू की और 2010 में 70वीं रैंक लाकर यूपी कैडर की आईएएस बनीं. 

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बहराइच में पोस्टिंग के बाद आईएएस मोनिका रानी जिले में हुई दो बड़ी घटनाओं के चलते सुर्खियों में आईं. जहां एक ओर उन्होंने बहराइच में आतंक का पर्याय बने आदमखोर भेड़ियों से जिले को निजात दिलवाने में अहम भूमिका निभाई, वहीं अक्टूबर 2024 में मूर्ति विसर्जन के दौरान भड़की हिंसा से जिले को बाहर निकालने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. 

डीएम मोनिका रानी ने प्रधानमंत्री पुरस्कार के चयन पर खुशी जताते हुए अपने अधीनस्थ अधिकारियों की सराहना की और आभार जताया, साथ ही इस पुरस्कार को बहराइच के लोगों को समर्पित किया है. 

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