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अतीक अहमद को 'पनाह' देने वाली सपा में आखिर क्यों शामिल हो गई थीं राजू पाल की पत्नी पूजा?

सपा नेता पूजा पाल कौशांबी के चायल से विधायक हैं. पिछले दिनों उनके पति राजू पाल के हत्यारोपी अतीक अहमद की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. जब राजू पाल की हत्या हुई थी, तब वह सपा से सांसद था. पूजा पाल के सामने आखिर क्या मजबूरी थी कि उसे उस पार्टी को जॉइन करना पड़ा था, जिसने उसके पति के हत्यारोपी को संरक्षण दे दिया था.

सपा जॉइन करने से पहले पूजा पाल बसपा में थीं (फाइल फोटो) सपा जॉइन करने से पहले पूजा पाल बसपा में थीं (फाइल फोटो)
दर्पण सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 25 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 7:28 PM IST

राजू पाल का मर्डर यूपी के चर्चित हत्याकांडों में से एक था. 25 जनवरी 2005 की दोपहर का वक्त था. मौसम सर्द था. प्रयागराज (तब इलाहाबाद) में पूजा पाल नाम की एक महिला घर पर अपने पति राजू पाल के लौटने का इंतजार कर रही थी, लेकिन वह नवविवाहित पूजा उस वारदात से बेखबर थी, जो घर कुछ किलोमीटर दूर होने वाले वाली थी और जिससे उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदलने वाली थी. शार्प शूटरों का एक समूह बसपा विधायक राजू पाल की कार का पीछा कर रहा था, जिसे उनका बहनोई उमेश पाल चला रहा था.

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शूर्टरों ने न सिर्फ उसकी हत्या की थी बल्कि वह एक ऐसा मैसेज देना चाहते थे, जिसे लंबे समय तक भुलाया न जा सकेगा. शूटरों को देखकर घबराए उमेश पाल ने जैसे ही अपनी कार रोकी. वाहन में बैठे राजू पाल पर अपनी असॉल्ट राइफलों से ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थीं. गोलियों की आवाज से पूरा इलाका गूंज उठा था. हालांकि राजू पाल कुछ समर्थकों ने गोलियों से छलनी राजू पाल को एक टेंपो से अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की थी, लेकिन हमलावर इस पर भी नहीं रुके थे. उन्होंने टेंपो का पीछा कर फिर से राजू पाल के शरीर में बेहिसाब गोलियां दाग दी थीं. हालांकि इस उमेश पाल बच गया था. इस गोलीबारी में उनके दो सुरक्षा गार्ड भी मारे गए थे. शादी के कुछ दिन बाद ही पूजा को अपने पति को खोना पड़ा था. राजू पाल पर कुछ आपराधिक केस थे.

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एम-वाई समीकरण के कारण अतीक को मिला संरक्षण

यह आरोप लगाया गया था कि इलाहाबाद के पास फूलपुर से सत्तारूढ़ सपा के सांसद डॉन अतीक अहमद ने हत्या की साजिश रची थी. उसके भाई अशरफ उन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने गोली चलाई थी. अतीक इलाहाबाद पश्चिम से लगातार पांच बार विधानसभा चुनाव जीता था. जब वह 2004 में संसद सदस्य बना था तो उन्होंने सोचा कि अशरफ आसानी से उपचुनाव में खाली हुई सीट जीत जाएगा लेकिन अशरफ को राजू पाल ने हरा दिया था. अतीक को यह हार बर्दाश्त नहीं हुई तो उसने यह साजिश रच दी.

अतीक तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव का करीबी था. एसपी के एम-वाई (मुस्लिम-यादव) निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं के लिए डॉन अतीक महत्वपूर्ण था. उसका बाहुबल भी ऐसा था, जिसकी पार्टी को जरूरत थी. 2003 में उन्होंने देखा कि कुछ विधायकों ने सपा सरकार का समर्थन किया.

लोगों ने मुलायम सिंह यादव को अतीक के ग्रेट डेन ब्रूनो से हाथ मिलाते हुए देखा था. वह कथित तौर पर उस भीड़ का भी हिस्सा था, जिसने बसपा चीफ मायावती पर गेस्ट हाउस में हमला करने की कोशिश की थी. राजू पाल की हत्या की सीबीआई जांच की याचिका का विरोध करने के लिए यूपी सरकार ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

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मायावती ने चुनाव के लिए पूजा के नाम का किया था ऐलान

अतीक के गढ़ इलाहाबाद पश्चिम में फिर से उपचुनाव होना था. मायावती ग्राउंड जीरो पर आईं और कहा कि पूजा बसपा से चुनाव लड़ेंगी. उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वाले को बख्शा नहीं जाएगा. हालांकि पूजा वह चुनाव हार गईं लेकिन उन्हें भरपूर समर्थन मिला और यह तो सिर्फ शुरुआत थी.

2007 में पूजा ने अशरफ को हराया था और 2012 में अतीक जोखिम नहीं लेना चाहता था इसलिए वह चुनाव हार गया. इसके बाद डॉन ने कभी भी कोई चुनाव नहीं जीता. इसके बाद 2019 में पूजा पाल सपा में शामिल हो गईं. सपा पर ही उन्होंने अतीक अहमद को आश्रय देने का आरोप लगाया था. 

दरअसल बसपा ने एक साल पहले ही पार्टी की तत्कालीन इलाहाबाद प्रमुख पूजा को निष्कासित कर दिया था, लेकिन उस समय सवाल उठा कि आखिर पार्टी ने एक महिला के साथ 13 साल के अपने संबंध को क्यों खत्म किया, जो अपने पति की नृशंस हत्या के बाद एक तेजतर्रार नेता के रूप में उभरी थी?

फिर मायावती ने पूजा को बसपा से निकाल दिया

बीएसपी को शक था कि पूजा बीजेपी में शामिल होना चाहती हैं. 2017 के यूपी चुनाव से पहले बीजेपी उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के साथ उनकी मुलाकात की खबरें वायरल हो गई थीं. 2017 में भगवा पार्टी के उम्मीदवार सिद्धार्थ नाथ सिंह से हारने के बाद, शायद पूजा शायद बसपा में उज्ज्वल भविष्य नहीं दे रही थीं. यह तब था, जब कई लोगों का मानना ​​था कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और केंद्र में पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ही चुनाव जीतेगी.

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हालांकि, पूजा बीजेपी में शामिल नहीं हो पाईं. वहीं 2017 के यूपी चुनावों के बाद पूजा ने बसपा के लिए काम करना बंद कर दिया. उन्होंने अपने क्षेत्र में पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल होना बंद कर दिया. पार्टी कार्यकर्ताओं के फोन तक उठाने बंद कर दिए. तब बसपा ने कहा कि पूजा की 'अनुशासनहीनता' का फैसला मायावती ने खुद लिया. उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया.

इसलिए पूजा के पास समाजवादी पार्टी का ही एकमात्र विकल्प बचा था, उधर मुलायम के बेटे अखिलेश यादव तब सपा के प्रभारी थे. उन्हें आपराधिक राजनेता पसंद नहीं थे, जिन्हें उनके पिता के समय संरक्षण मिला था.

जब अखिलेश के कारण अतीक को वापस लेना पड़ा नाम

2012 में जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने, हालांकि मुलायम का पार्टी पर अब भी नियंत्रण था, अब अखिलेश ने पश्चिमी यूपी के हिस्ट्रीशीटर डीपी यादव की पार्टी में एंट्री रोक दी थी. उन्होंने पार्टी से दागियों की सफाई का वादा भी कर दिया था. इसके बाद 2017 में मुलायम ने अतीक को कानपुर कैंट से चुनाव लड़ने के लिए पार्टी का टिकट दिया था, लेकिन जब अखिलेश ने उनकी उम्मीदवारी रद्द करने की धमकी दी तो डॉन को अपने कदम पीछे खींचने पड़े.

उसी समय पूजा सपा में शामिल हुईं. उन्होंने कहा- “मेरे मूल्य अखिलेश यादव के समान हैं. वह अपराधियों को भी पसंद नहीं करते हैं. वह महिलाओं का दर्द जानते हैं. सपा ने अतीक को टिकट नहीं दिया.' तब शायद पूजा ने कई कड़वी बातें पचा ली थीं, जिनमें अतीक और अखिलेश की एक फोटो भी शामिल है.

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तब पूजा पाल ने कहा था- मैं शुद्ध सोना थी, मैंने हमेशा उन्हें (मायावती) अपनी मां की तरह माना लेकिन उन्होंने मुझे कभी महत्व नहीं दिया. मैं राजू पाल हत्याकांड के सिलसिले में डिप्टी सीएम से मिली थी. वह बैठक बीजेपी में मेरे शामिल होने से जुड़ी नहीं थी. हालांकि मेरे पास बीजेपी में शामिल होने का प्रस्ताव था लेकिन मैंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था.

उन्नाव से पूजा को चुनाव लड़ाना चाहती थी सपा लेकिन

2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान, अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा ने पूजा को उन्नाव से चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन बाद में दस्तावेजों में खामी होने के कारण उनका टिकट रद्द कर दिया गया.

दरअसल, सपा को बीजेपी के साक्षी महाराज को साधने के लिए एक ब्राह्मण चेहरे की जरूरत थी. गैंगस्टर से नेता बने अरुण शंकर शुक्ला उर्फ ​​​​अन्ना महाराज को मैदान में उतारा. हालांकि, पार्टी ने इसकी भरपाई 2022 के यूपी चुनावों के दौरान की. सपा ने पूजा पाल को मैदान में उतारा और वह चुनाव जीत गईं.

उमेश पाल ने भी जॉइन कर ली थी सपा लेकिन

हालांकि, सपा में सिर्फ पूजा ही नहीं शामिल हुई थीं. उनके भाई उमेश पाल ने भी 2019 में बसपा छोड़ दी थी. हालांकि, वह पहले बीजेपी में शामिल हो गए थे. उन्होंने कहा था कि वह पीएम मोदी की नीतियों से प्रभावित हैं. बसपा जो कहती है, वह नहीं करती है लेकिन 2022 के यूपी चुनावों में वह भी सपा में शामिल हो गए, लेकिन उन्हें प्रयागराज की फाफामऊ सीट से चुनाव का टिकट नहीं दिया गया, जिसके बाद वह बीजेपी में लौट आए थे.

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फरवरी में जब अतीक और अशरफ दोनों जेल में थे, तब उमेश पाल और उनके सुरक्षा गार्ड की कथित तौर पर अतीक के बेटे असद के नेतृत्व वाले एक गिरोह ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. इसके बाद 15 अप्रैल को अतीक और अशरफ को हमलावरों ने लाइव टीवी कैमरों के सामने पुलिस हिरासत में गोली मार दी थी. पुलिस मुठभेड़ में असद के मारे जाने के दो दिन बाद यह हत्याकांड हुआ था.

फिलहाल मौजूदा समय में पूजा कौशांबी के चायल से सपा विधायक हैं. वहीं उमेश पाल हत्याकांड में वांछित अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन इस साल की शुरुआत में बसपा  में शामिल हो गई थीं, जिन्हें अभी तक पार्टी ने निष्कासित नहीं किया है. 

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