
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए शुक्रवार को बड़ी टिप्पणी की. अदालत ने कहा,'सुरक्षा के उद्देश्य से सशस्त्र बलों से संबंधित परिसर में भी देखते ही गोली मार दी जाएगी' जैसी बात लिखना उचित नहीं है. न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने फरवरी में नशे की हालत में वायुसेना स्टेशन में अवैध रूप से प्रवेश करने के आरोप में पकड़े गए नेपाली नागरिक एतवीर लिम्बू को जमानत देते हुए उपरोक्त टिप्पणी की.
अदालत ने कहा,'इस तरह के शब्दों का बच्चों पर बुरा असर पड़ता है. इसलिए केंद्र सरकार को इस तरह के शब्दों को लिखने में सावधानी बरतनी चाहिए. अदालत ने 31 मई 2024 को दिए अपने आदेश में कहा,'दाखिल होने वालों को गोली मार दी जाएगी' और 'देखते ही गोली मार दी जाएगी' के स्थान पर हल्के शब्दों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.'
आवेदक बोला- झूठा फंसाया गया
आवेदक लिम्बू की ओर से दलील दी गई कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है. वह 'अनजाने में' मनौरी एयरफोर्स स्टेशन पहुंच गया और चूंकि आवेदक नशे की हालत में था और उसे हिंदी का कोई ज्ञान नहीं था, इसलिए वह तैनात सिपाही को ठीक से समझा नहीं सका और उसका पहचान पत्र खो गया.
सुरक्षा के उद्देश्य से ठीक, लेकिन...
इससे पहले कोर्ट ने परिसरों में इस तरह के लेखन के बारे में दिशा-निर्देश मांगे थे. अनुपालन के उपरोक्त हलफनामे के उपरोक्त दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह सच है कि सुरक्षा के उद्देश्य से अतिचारियों को सशस्त्र बलों के परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है, लेकिन 'देखते ही गोली मार दी जाएगी' जैसी भाषा, उचित नहीं है. खासकर, जहां सशस्त्र बलों की स्थापना एक सार्वजनिक स्थान पर स्थित है जहां आम जनता और बच्चे गुजरते हैं.
इस प्रकार के शब्द लिखने में रखे सावधानी
अदालत ने कहा कि इस प्रकार के शब्दों का बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए केंद्र सरकार को इस प्रकार के शब्द लिखने में सावधानी बरतनी चाहिए.