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बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के अध्यक्ष जफरयाब जिलानी का निधन, अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्ष के थे वकील

अयोध्या जन्मभूमि मामले में बाबरी मस्जिद पक्ष के वकील जफरयाब जिलानी का बुधवार को निधन हो गया. वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे. जिलानी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मेंबर, बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के अध्यक्ष व यूपी के अपर महाधिवक्ता रह चुके थे.

जफरयाब जिलानी का लंबी बीमारी के बाद निधन (फाइल फोटो) जफरयाब जिलानी का लंबी बीमारी के बाद निधन (फाइल फोटो)
सत्यम मिश्रा
  • लखनऊ,
  • 17 मई 2023,
  • अपडेटेड 2:12 PM IST

बाबरी मस्जिद मामले में वकील रहे लखनऊ के मशहूर वरिष्ठ अधिवक्ता जफरयाब जिलानी का बुधवार दोपहर 12 बजे निधन हो गया. उनका पिछले तीन साल से लखनऊ के वेदांता अस्पताल और निशात अस्पताल में इलाज चल रहा था. जिलानी ने निशात हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली. बेटे नजफ जिलानी ने उनके निधन की पुष्टि की. जफरयाब जिलानी ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव थे. वह बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के अध्यक्ष भी रहे. साथ ही उत्तर प्रदेश के एडवोकेट जनरल के तौर पर भी काम किया था.

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बीपी फ्लक्चुएट होने से निधन हो गया

नजफ जिलानी ने बताया कि अचानक उनका ब्लड प्रेसर फ्लक्चुएट होने लगा, जिस वजह से उनका निधन हो गया. नजफ ने बताया कि वह आईसीयू वॉर्ड में डॉक्टर मनु सेठ की निगरानी में थे. उनको यूरीन की समस्या थी. नजफ ने आजतक को बताया कि यूरिन इंफेक्शन के अलावा उनके पिता को 2021 में ब्रेन हेमरेज हो गया था. उसका लखनऊ के मेदांता अस्पताल में डॉ. रवि शंकर के सुपरविजन में इलाज चल रहा था लेकिन पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत काफी नासाज थी.

आज रात 9 बजे होंगे सुपुर्दे खाक

नजफ ने बताया कि लखनऊ के ऐशबाग कब्रिस्तान में रात 9 बजे उनके पिता को सुपुर्दे खाक किया जाएगा. इससे पहले लखनऊ के नदवा में रात करीब 8:45 नमाज अदा की जाएगी.

दो साल पहले हुआ था ब्रेन हैमरेज

मई 2021 में जफरयाब जिलानी इस्लामिया कॉलेज के ऑफिस में काम कर रहे थे, इसी दौरान वह यूरिन पास करने के लिए उठे तो बारिश की वजह से अचानक फिसल कर सीढ़ियों से गिर पड़े. इससे उनके सिर में गहरी चोटें आ गई. उन्हें आनन-फानन में सर्वोदय नगर के परिवारिक डॉ. उस्मान कौशल को दिखाया गया था. सिर की जांच कराई गई तो पता चला कि ब्रेन में खून का थक्का जमा गया है. उन्हें ब्रेन हैमरेज हो गया है. फिर तत्काल उन्हें मेदांता में भर्ती कराया गया था. वहां सर्जरी के बाद खून का थक्का हटा दिया गया था.

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