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पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजधानी कोलकाता में अगस्त के दौरान एक सरकारी हॉस्पिटल में ट्रेनी डॉक्टर (31) की रेप करने के बाद हत्या कर दी गई थी. पीड़िता के माता-पिता ने रविवार को अपनी बेटी के साथ हुए क्रूर अपराध के 100 दिन पूरे होने पर कोलकाता में साइकिल रैली को हरी झंडी दिखाई.
पीड़िता के माता-पिता ने एक्टिविस्ट ग्रुप अभया मंच (Abhaya Manch) द्वारा आयोजित रैली को अपने घर से हरी झंडी दिखाई. मार्च में कुल 100 साइकिल सवार और 100 मशालधारी प्रदर्शनकारियों ने भाग लिया, जिनमें से कुछ ने राष्ट्रीय ध्वज ले रखा था, जबकि अन्य "हमें न्याय चाहिए, जब तक हमें न्याय नहीं मिल जाता, हम हार नहीं मानेंगे" जैसा नारा लगा रहे थे.
साइकिल रैली, पीड़िता के घर से शुरू होकर RG कर हॉस्पिटल से होते हुए कोलकाता के श्यामबाजार चौराहे पर खत्म हुई.
रैली के आखिरी में तमाम जिलों से आए प्रतिनिधियों को 100 मशालें सौंपी गईं. वे अपने जिलों में मशालों का प्रतीक लेकर जाएंगे. रैली में शामिल होने वाले लोगों ने मृतका (ट्रेनी डॉक्टर) के सम्मान में 100 सेकंड का मौन रखा, जिसका शव 9 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के सेमिनार हॉल में मिला था.
'अगर हमें इंसाफ नहीं मिला...'
रैली शुरू होने से पहले पीड़िता के पिता ने कहा, "हमें इंसाफ मिलेगा, इसमें निराश होने की कोई बात नहीं है. हमें आंदोलन को सही तरीके से जारी रखना है. अगर हमें इंसाफ नहीं मिला, तो हम इसे छीन लेंगे."
पीड़िता की मां ने कहा, "केवल 100 दिन ही नहीं, बल्कि हम इंसाफ की उम्मीद में हर मिनट, हर सेकंड और हर दिन गिन रहे हैं. 9 अगस्त को उस फोन कॉल ने हमारे दिल में आग जला दी, जो आज भी जल रही है."
डॉक्टरों और अभया मंच के सदस्यों ने अभया मामले में धीमी प्रगति के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के प्रति असंतोष व्यक्त किया और इंसाफ के लिए अपनी लड़ाई जारी रखने की कसम खाई.
जांच में तेजी की मांग
निकाली गई रैली के सीनियर मेंबर डॉ. पूर्णब्रत गुण ने कहा, "अभया को इंसाफ मिलने तक हमें लड़ाई जारी रखनी चाहिए. हमें उम्मीद थी कि CBI जांच में तेजी लाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. अगर लगातार विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ, तो जांच की गति धीमी हो जाएगी."
कार्यक्रम में कई वक्ताओं ने CBI से अपनी जांच में तेजी लाने की मांग की. एक अन्य प्रमुख प्रदर्शनकारी डॉ. ज्योतिर्मय ने डॉक्टरों की प्रतिबद्धता की पुष्टि की. उन्होंने कहा, "हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक इंसाफ नहीं मिल जाता. हमने गर्मी, बारिश, त्यौहार और अब सर्दी का सामना किया है, हमारी लड़ाई जारी है."
इस बीच, आंदोलन के सीनियर मेंबर डॉ. उज्ज्वल बनर्जी ने हाल ही में जलपाईगुड़ी से मुर्शिदाबाद में दो प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के ट्रांसफर की निंदा की. बनर्जी ने कहा, "हम स्वास्थ्य विभाग से माफी मांगने और इस आदेश को वापस लेने की मांग करते हैं. ऐसी कार्रवाइयों से हम नहीं रुकेंगे."
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अभय मंच ने मामले में सार्थक कार्रवाई होने तक अधिकारियों पर दबाव बनाए रखने का संकल्प लिया है. घटना के एक दिन बाद कोलकाता पुलिस ने नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को गिरफ्तार कर लिया. रॉय पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) (हत्या के लिए सजा), धारा 64 (रेप के लिए सजा) और धारा 66 (मौत का कारण बनने या लगातार वनस्पति अवस्था में लाने के लिए सजा) के तहत आरोप लगाए गए हैं और उनके खिलाफ मुकदमा चल रहा है.
पिछले महीने, CBI ने अपने शुरुआती आरोपपत्र में रॉय को "एकमात्र मुख्य आरोपी" के रूप में पहचाना, जिसमें अपराध के पीछे संभावित "बड़ी साजिश" का जिक्र किया गया.