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केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बुधवार को पश्चिम बंगाल सरकार की कलकत्ता हाई कोर्ट में संजय रॉय को दी गई आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ अपील का विरोध किया. रॉय को पिछले साल कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप-मर्डर मामले में दोषी ठहराया गया था. CBI ने कलकत्ता हाई कोर्ट से कहा, "केवल अभियोजन एजेंसी ही सजा को चुनौती दे सकती है. मामले की जांच सीबीआई कर रही है, इसलिए राज्य इस मामले में अपील दायर नहीं कर सकता."
जस्टिस देबांग्शु बसाक और जस्टिस शब्बर रशीदी की बेंच के समक्ष सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा कि मामले में केवल अभियोजन एजेंसी को ही सजा को चुनौती देने का अधिकार है.
CBI ने क्या दावा किया?
जांच एजेंसी ने दावा किया कि मामले की जांच उनके द्वारा की गई थी, इसलिए राज्य सरकार के पास इस मामले में अपील दायर करने का अधिकार नहीं है. राज्य की तरफ से पेश हुए महाधिवक्ता ने सीबीआई के दावे का खंडन किया और कहा कि मामले में प्रारंभिक FIR राज्य पुलिस द्वारा दर्ज की गई थी और मामला बाद में सीबीआई को ट्रांसफर किया गया था. उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था राज्य के अधिकार क्षेत्र में है.
हाई कोर्ट की बेंच ने कहा कि वह राज्य सरकार की अपील स्वीकार करने से पहले सीबीआई, पीड़ित परिवार और संजय रॉय की दलीलों पर विचार करेगी. अब मामले की आगे की सुनवाई सोमवार, 27 जनवरी को होगी.
SC ने लिया स्वतः संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता रेप-मर्डर मामले को लेकर स्वतः संज्ञान लिया है. इस पर सुनवाई अगले बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई है. मामले की सुनवाई अगले बुधवार दोपहर 2 बजे होगी.
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कोलकाता रेप-मर्डर केस
कोलकाता की एक कोर्ट ने 20 जनवरी को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप-मर्डर केस में दोषी संजय रॉय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. कोर्ट ने संजय रॉय को 50 हजार रुपये का जुर्माना भरने का भी आदेश दिया.
सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को शनिवार को अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 (रेप), धारा 66 (मौत का कारण बनने की सजा) और धारा 103 (हत्या) के तहत दोषी ठहराया. पिछले साल सामने आए इस मामले के बाद पूरे देश में अलग-अलग इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए थे.