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बांग्लादेश हिंसा: BJP सांसद ने नोबेल कमेटी को लिखा पत्र, मुहम्मद यूनुस को लेकर की ये मांग

बंगाल से सांसद ने लिखा है, "नोबेल शांति पुरस्कार, जो मानवता के लिए उम्मीद की रोशनी है, अपनी नैतिक विश्वसनीयता खोने का जोखिम उठाता है, जब यह उन लोगों को दिया जाता है, जिनके कार्य शांति और न्याय के मूल सार के विपरीत हैं."

बीजेपी सांसद ने नोबेल कमेटी को लिखा पत्र (तस्वीर: X/ @JyotirmayBJP) बीजेपी सांसद ने नोबेल कमेटी को लिखा पत्र (तस्वीर: X/ @JyotirmayBJP)
सूर्याग्नि रॉय
  • कोलकाता,
  • 06 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 3:01 PM IST

पश्चिम बंगाल (West Bengal) के पुरुलिया से बीजेपी सांसद ज्योतिर्मय महतो (Jyotirmoy Mahato) ने नॉर्वे में स्थित नोबेल कमेटी को पत्र लिखकर नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) की विरासत का पुनर्मूल्यांकन करने और बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ जारी हिंसा पर गौर करने को कहा है.

महतो ने पत्र में लिखा, "माइक्रोफाइनेंस पर अपने काम के लिए इंटरनेशनल लेवल पर मशहूर डॉ. यूनुस पर अब मानवता के खिलाफ जघन्य अपराधों की साजिश रचने या उन पर आंखें मूंद लेने का आरोप है. अंतरिम सरकार में उनके नेतृत्व में, हिंदू समुदाय ने भयावहता का सामना किया है. रिपोर्ट में हिंसा में बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है, जिसमें घरों और हिंदू मंदिरों का विनाश, रेप और हत्याएं शामिल हैं. दुर्गा पूजा जैसे हिंदू त्योहारों के मौकों पर धमकी, जबरन वसूली और सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबंध लगाकर बाधित किया गया है." 

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उन्होंने आगे कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने डॉ. यूनुस की निंदा की है और उन्हें सामूहिक हत्याओं के पीछे का "मास्टरमाइंड" बताया है.

'विश्वसनीयता खोने का जोखिम...'

बंगाल से सांसद ने लिखा है, "नोबेल शांति पुरस्कार, जो मानवता के लिए उम्मीद की रोशनी है, अपनी नैतिक विश्वसनीयता खोने का जोखिम उठाता है, जब यह उन लोगों को दिया जाता है, जिनके कार्य शांति और न्याय के मूल सार के विपरीत हैं."

बीजेपी सांसद ने आगे लिखा, "डॉ. यूनुस, जिन्हें कभी समाज सुधारक के रूप में जाना जाता था, अब कई लोगों द्वारा "कसाई" के रूप में लेबल किया गया है. उनका प्रशासन न केवल अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में फेल रहा है, बल्कि अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए भारत विरोधी बयानबाजी में भी शामिल रहा है. इस तरह की हरकतें शांति और सह-अस्तित्व के सिद्धांतों के विपरीत हैं, जिन्हें नोबेल पुरस्कार बनाए रखने का प्रयास करता है."

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महतो लिखते हैं, "उन्हें पता है कि पुरस्कार वापस नहीं लिया जा सकता, लेकिन नोबेल समिति की जिम्मेदारियां हैं." बीजेपी सांसद ने नोबेल समिति से गुजारिश की है कि वे डॉ. यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ चल रही हिंसा की निंदा करते हुए सार्वजनिक रूप से अत्याचारों की निंदा करे और एक बयान जारी करे."

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