तालिबान से जारी संघर्ष के बीच अफगानिस्तान के सेना प्रमुख जनरल वली मोहम्मद अहमदजई भारत दौरे पर आने वाले हैं. वह 27-29 जुलाई तक भारत के दौरे पर होंगे. सूत्रों ने बताया कि वह भारतीय सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे सहित शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ बातचीत करेंगे. वह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल से भी मिल सकते हैं.
(फोटो Credit: General Wali Mohammad Ahmadzai)
अहमदजई की भारत यात्रा अफगानिस्तान में तालिबान और अफगान बलों के बीच जारी संघर्ष की पृष्ठभूमि में हो रही है. नई दिल्ली में अफगानिस्तान के राजदूत फरीद ममुंडजे ने कहा था कि अगर तालिबान से बातचीत असफल रहती है तो उसके खिलाफ जंग में भारत से सैन्य मदद ली जा सकती है. वहीं, तालिबान ने हिदायत देते हुए कहा था कि भारत को तटस्थ रहना चाहिए और उसे अफगानिस्तान सरकार को किसी तरह की सैन्य मदद नहीं मुहैया करानी चाहिए.
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अफगान सेना प्रमुख की प्रस्तावित भारत यात्रा को तालिबान के लिए एक संकेत माना जा रहा है. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ताशकंद में पहले ही कह चुके हैं कि दुनिया को काबुल में उन शक्तियों को स्वीकार नहीं करना चाहिए जो बल प्रयोग के जरिये सत्ता पर काबिज होना चाहती हैं. अफगानिस्तान का भविष्य उसका अतीत नहीं हो सकता है. दुनिया हिंसा और बल प्रयोग के खिलाफ है और इस तरह के कदम को वैधता नहीं दी जानी चाहिए. साफ है कि भारत सरकार अफगानिस्तान सरकार के साथ शांतिपूर्ण विकास के कार्यों को तरजीह देना चाहती है.
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बहरहाल, अफगानिस्तान के एक्विजीशन एंड टेक्निकल प्लानिंग मंत्री भी 11-16 जुलाई के दौरान भारत आने वाले थे. लेकिन बाद में उनके कार्यक्रम में बदलाव कर दिया गया. एक अधिकारी ने कहा, "मंत्री की यात्रा बाद में होने की संभावना है, लेकिन तारीखें अभी तय नहीं की गई हैं."
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एक अधिकारी ने बताया कि अहमदजई की यात्रा के दौरान भारत से सैन्य सहायता के तहत अफगानिस्तान को मिलिट्री प्लेटफॉर्म और उपकरणों की आपूर्ति पर चर्चा होने की संभावना है.
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पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अफगानिस्तान को सात हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति की है. इनमें से चार एमआई 24 हेलीकॉप्टर हैं, जबकि अन्य तीन चीतल हेलीकॉप्टर हैं. इसके अलावा भारत सैन्य अकादमियों में अफगान कैडेटों को ट्रेनिंग मुहैया कराता रहा है.
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इससे पहले, अफगानिस्तान ने भारत को लिस्ट सौंपी थी जिसमें आर्टिलियरी गन्स, टैंक और बख्तरबंद वाहनों सहित सैन्य साजो-समान शामिल थे. भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अफगानिस्तान में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तीन अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है. इसमें सड़कों का निर्माण, एक महत्वपूर्ण बांध और देश का संसद भवन शामिल है.
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एक महीने पहले तालिबान के हमले में अफगान बलों के हताहत होने और कई प्रांतों पर कब्जा करने के बाद अफगानिस्तान सरकार ने सेना प्रमुख को हटा दिया था. इसके बाद जनरल वली मोहम्मद अहमदजई को अफगान का सेना नियुक्त किया गया था. सेना प्रमुख के साथ राष्ट्रपति अशरफ गनी की सरकार ने रक्षा और गृह मंत्री को भी बदल दिया था.
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अमेरिकी सेना के वापस होने के बाद से अफगानिस्तान में तालिबान और अफगान बलों के बीच संघर्ष तेज हो गया है. पिछले कुछ महीनों में तालिबान ने युद्धग्रस्त देश के कई हिस्सों पर कब्जा जमा चुका है. इस बीच, अफगानिस्तान में भारतीय संपत्तियों को निशाना बनाने के लिए तालिबान के साथ पाकिस्तान के सहयोग की खबरें सामने आई हैं.
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तालिबान से संघर्ष को देखते हुए कंधार में वाणिज्य दूतावास से भारतीय कर्मचारियों को निकाला गया और 11 जुलाई को भारत वापस लाया गया. खुफिया रिपोर्टों का कहना था कि कंधार और मजार-ए-शेयर में भारतीय वाणिज्य दूतावासों के लिए खतरा बढ़ गया है.
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