अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा है कि तालिबान के रवैये से लग रहा कि वो शांति स्थापित करने का इच्छुक नहीं है. आगे तालिबान के रुख के आधार पर ही सरकार निर्णय लेगी. ईद के मौके पर अपने भाषण में अशरफ गनी ने कहा कि वार्ता के लिए दोहा में एक उच्च पदस्थ प्रतिनिधिमंडल भेजने का इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान का फैसला एक अल्टीमेटम था.
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राष्ट्रपति के इस भाषण से थोड़ी देर पहले ही काबुल में अति सुरक्षित प्रेसिडेंट पैलेस के पास रॉकेट दागे गए. रॉकेट अटैक के दौरान पैलेस परिसर में लोग नमाज अदा कर रहे थे. हालांकि, इस हमले के दौरान कोई हताहत नहीं हुआ. इसकी अभी किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है. सरकार में नंबर 2 की हैसियत रखने वाले अब्दुल्ला अब्दुल्ला मंगलवार को रॉकेट हमले के दौरान पैलेस के अंदर ही मौजूद थे. वह सोमवार को कतर में तालिबान के साथ शांति वार्ता के बाद से लौटे हैं.
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टोलो न्यूज के मुताबिक, अशरफ गनी ने कहा, 'तालिबान ने बहुत सी बातें स्पष्ट कीं. अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने मुझे कुछ मिनट पहले बताया था कि तालिबान शांति नहीं चाहता है. हमने अल्टीमेटम देने और यह बताने के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल दोहा भेजा था कि हम शांति चाहते हैं. हम बलिदान के लिए भी तैयार हैं. लेकिन उनकी (तालिबान) शांति के लिए कोई इच्छा नहीं है और हमें इसके आधार पर ही आगे निर्णय लेना चाहिए.'
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ईद की नमाज अदा करने के बाद राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा कि यह ईद पिछले तीन महीने में देश के लिए बलिदान देने वाले सैनिकों के नाम समर्पित है. उन्होंने कहा कि तालिबान का शांति का कोई इरादा नहीं है. लेकिन हमने साबित कर दिया है कि हमारे पास इरादा है और हमने शांति के लिए बलिदान दिया है.
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अशरफ गनी ने पिछले साल शांति वार्ता शुरू करने के लिए 5,000 तालिबान कैदियों को रिहा करने के अपनी सरकार के फैसले को एक "बड़ी गलती" करार दिया. उनका कहना था कि इससे तालिबान मजबूत हुआ है. उन्होंने कहा कि हमने शांति वार्ता शुरू करने के लिए 5,000 कैदियों को रिहा किया, लेकिन आज तक तालिबान ने शांति वार्ता में कोई गंभीर या सार्थक रुचि नहीं दिखाई है.
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राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने मौजूदा स्थिति से उबरने के लिए "तात्कालिक और व्यावहारिक योजना" पर काम करते हुए अंतिम सप्ताह बिताया है. अफगानों को साबित करना चाहिए कि वे एकजुट हैं. उन्होंने बताया कि इसके तहत दो योजनाएं तैयार की गई हैं. योजना का एक हिस्सा सुरक्षा और रक्षा बलों के लिए प्राथमिकताएं तय करना है. अगले तीन से छह महीनों के लिए लोगों के कड़े रुख से स्थिति बदल जाएगी.
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राष्ट्रपति अशरफ गनी ने दोहराया कि तालिबान से निपटने के लिए राष्ट्रीय समर्थन और सुरक्षा की जरूरत है. अफगानिस्तान के भविष्य का निर्माण अफगान लोग करेंगे. आज का अफगानिस्तान 20 साल पहले वाला नहीं है. हर शहर में विकास नजर आ रहा है. इस देश में चरमपंथ और मनमानी के लिए कोई जगह नहीं है.
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अशरफ गनी ने कहा कि तालिबान ने 260 सार्वजनिक इमारतों को नष्ट कर दिया और अगर वे अफगान हैं तो उन्हें सार्वजनिक प्रतिष्ठानों और लोगों के घरों को निशाना बनाने से बचना चाहिए.
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दोहा में काबुल और तालिबान के बीच दो दिन की बैठक चली लेकिन कोई खास नतीजा सामने नहीं आया. बैठक इस निर्णय के साथ समाप्त हुई कि आगे और उच्च स्तरीय मीटिंग होंगी.
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अपने भाषण में, अशरफ गनी ने पड़ोसी पाकिस्तान पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा, पाकिस्तान अपनी जमीन पर तालिबान शासन नहीं चाहता है लेकिन उनका मीडिया अफगानिस्तान में तालिबान शासन के लिए अभियान चला रहा है. उन्होंने पाकिस्तान पर तालिबान नेतृत्व को पनाह देने और सहायता मुहैया कराने का आरोप लगाया. अफगान के सीमावर्ती शहर स्पिन बोल्डक में सबसे हालिया लड़ाई में तालिबान लड़ाकों को चमन में सीमा पार पाकिस्तानी अस्पताल में इलाज कराते देखा गया.
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पाकिस्तान को अफगानिस्तान में शांति प्रयास की मुख्य भूमिका के रूप में देखा जाता है. तालिबान नेतृत्व का मुख्यालय पाकिस्तान में है और इस्लामाबाद यह कहता रहा है कि वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर तालिबान को बातचीत की मेज पर लाएगा.
पाकिस्तान भी अफगानिस्तान सरकार पर निशाना साधता रहा है. पाकिस्तान आरोप लगाता है कि अफगानिस्तान ने एक अन्य आतंकवादी गुट पाकिस्तानी तालिबान यानी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को पनाहगाह मुहैया कराया है जिसने पाकिस्तानी सेना को निशाना बनाते हुए कई हमले किए हैं.
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