11 सितंबर 2011 को अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर ओसामा बिन लादेन ने हमला कराया था. अमेरिका ने चार महीनों बाद ही एक हाई-सिक्योरिटी जेल का निर्माण कर दिया जहां दुनिया के कई आतंकवादियों को पनाह दी जाती रही है. क्यूबा में स्थित इस जेल का नाम है ग्वांतनामो बे जेल. तालिबान के कैबिनेट मंत्रियों में खैरुल्लाह खैरख्वा (मिनिस्टर ऑफ इंफॉर्मेशन एंड कल्चर), अब्दुल हक (इंटेलीजेंस चीफ), मुल्ला नुरुल्लाह नूरी (मिनिस्टर ऑफ बॉर्डर एंड ट्राइबल अफेयर्स) भी इस जेल में सजा काट चुके हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर/Getty images)
काबुल पर कब्जे के बाद गुलाम रूहानी नाम के तालिबानी कमांडर ने राष्ट्रपति के महल से जीत का भाषण दिया था. गुलाम रूहानी पांच सालों तक ग्वांतनामो जेल में बंद था. सिर्फ रूहानी ही नहीं बल्कि अपने अस्तित्व में आने के बाद से इस जेल में 780 लोगों को कैद किया गया है. आतंक के खिलाफ युद्ध के चलते बनाई गई इस जेल में अब 39 कैदी बचे हैं.(प्रतीकात्मक तस्वीर/Getty images)
क्यूबा के पूर्वी सिरे पर स्थित, ग्वांतानामो बे नेवल बेस 116 वर्ग किमी लंबा है और 19वीं शताब्दी के अंत से अमेरिका के नियंत्रण में है. इस जगह को लेकर अमेरिका और क्यूबा में विवाद भी रहा है. बता दें कि इस जगह पर अब सात डिटेंशन कैंप्स हैं. अमेरिकी मिलिट्री के मुताबिक, फिलहाल सभी कैदी पांचवे और छठे कैंप में मौजूद हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर/Getty images)
इस जेल का जब निर्माण हुआ था, उस समय जॉर्ज डब्ल्यू बुश अमेरिका के राष्ट्रपति थे. इसे मुख्य तौर पर अल-कायदा के आतंकियों को रखने के लिए बनाया गया था. गौरतलब है कि इस जेल में बंद 780 कैदियों में से 732 को बिना किसी आरोप के रिहा कर दिया गया है. ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक, 1 जनवरी 2002 से अब तक इस जेल में 48 देशों के 780 कैदी रह चुके हैं और इनमें सिर्फ 16 कैदी ऐसे हैं जिन पर आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर/Getty images)
न्यूयॉर्क टाइम्स ग्वांतनामो डॉकेट ट्रैकर के मुताबिक, इस जेल में अफगानिस्तान के 219, सऊदी अरब के 134, यमन के 115, पाकिस्तान के 72 और अल्जेरिया के 23 लोग कैद हैं. इनमें सबसे युवा कैदी 15 साल का ओमार खादर था. ओमार कनाडा का नागरिक था जिसे ग्वांतनामो जेल में 13 साल गुजारने पड़े थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर/Getty images)
साल 2017 में जेल से बाहर आने के बाद कनाडा सरकार ने माफी मांगते हुए ओमार को हर्जाना भी दिया था. इसके अलावा इस जेल में सबसे उम्रदराज कैदी 73 साल के सैफुल्लाह पराचा है. पाकिस्तान के सैफुल्लाह पिछले 17 सालों से इस जेल में बंद हैं. हालांकि सैफुल्लाह को अगले कुछ महीनों में रिहा किया जा सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर/Getty images)
साल 2006 में यूएन सेक्रेटी जनरल कोफी अन्नान ने कहा था कि अमेरिका को इस जेल को जल्द से जल्द बंद करना चाहिए. उस दौर में जॉर्ज बुश खुद कह चुके थे कि वे ग्वांतनामो बे को बंद कराना चाहते हैं लेकिन ये बिल्कुल आसान नहीं होने वाला है. बुश के बाद ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति बने और उन्होंने लगातार इस बात को दोहराया कि वे इस जेल को बंद करके रहेंगे.(प्रतीकात्मक तस्वीर/Getty images)
ओबामा ने अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल में इस जेल को बंद कराने के लिए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर भी किए थे. हालांकि इसके बावजूद ये जेल कभी बंद नहीं हुई. ओबामा के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति बने डॉनल्ड ट्रंप की इस जेल को लेकर एकदम अलग राय थी. उन्होंने ग्वांतनामो बे जेल बंद ना करने के लिए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे.
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एमनेस्टी इंटरनेशनल, एचआरडबल्यू, इंटरनेशनल कमिटी ऑफ रेड क्रॉस जैसे कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन लगातार कहते रहे हैं कि इस जेल में मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है. अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन इस जेल को बंद करने का समर्थन भी कर चुके हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर/Getty images)
साइकोलॉजिकल टॉर्चर के साथ ही फिजिकल टॉर्चर लिए कुख्यात इस जेल के बनने से लेकर अब तक चार अमेरिकी राष्ट्रपति आ चुके हैं. जॉर्ज बुश के कार्यकाल (2001-2009) के दौरान इस जेल से 540 कैदियों को छोड़ा गया था. इसके बाद ओबामा (2009-2017) के कार्यकाल में 200, वही ट्रंप और बाइडेन के कार्यकाल में एक-एक कैदी को छोड़ा गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर/getty images)