पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बुधवार को एक गार्ड ने कथित ईशनिंदा को लेकर बैंक मैनेजर की गोली मारकर हत्या कर दी. कुछ दिनों पहले ही गार्ड और बैंक मैनेजर के बीच तीखी बहस हुई थी और गार्ड ने मैनेजर पर पैगंबर का अपमान करने का आरोप लगाया था. हालांकि, बैंक मैनेजर के परिवार का कहना है कि गार्ड ने अपनी निजी दुश्मनी में ये हत्या की है. परिवार ने कहा कि हनीफ ने ईशनिंदा नहीं की थी और पैगंबर में उसकी बड़ी आस्था थी.
(वायरल वीडियो में भीड़ भी सिक्योरिटी गार्ड का समर्थन करती नजर आती है)
दोनों पंजाब प्रांत के खुशाब कस्बे की 'नेशनल बैंक ऑफ पाकिस्तान' की शाखा में काम करते थे. गार्ड का नाम अहमद नवाज है. गार्ड ने सुबह बैंक पहुंचते ही मैनेजर इमरान हनीफ पर दो गोलियां चलाईं. घायल मैनेजर को स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया और फिर वहां से लाहौर रेफर कर दिया गया. लाहौर के अस्पताल में मैनेजर ने दम तोड़ दिया.
जब सिक्योरिटी गार्ड को गिरफ्तार किया जा रहा था तो उस वक्त भी वो पैगंबर को लेकर नारेबाजी कर रहा था. गार्ड की नारेबाजी सुनकर कुछ कट्टर स्थानीय घटनास्थल पर पहुंच गए और उसका समर्थन करने लगे. बिना ये जाने कि मैनेजर ने सचमुच ईशनिंदा की थी या नहीं. हत्या के बावजूद भीड़ गार्ड के गले लगती रही और उसका गाल चूमती दिखी. इसके बाद नवाज को खुशाब कस्बे के पुलिस स्टेशन ले जाया गया. भीड़ ने गार्ड के प्रति अपना समर्थन जाहिर करने के लिए पुलिस स्टेशन का भी घेराव कर लिया.
खुशाब जिले के पुलिस अधिकारी रिटायर्ड कैप्टन तारिक विलायत ने डॉन से बताया कि हत्या की वजह के बारे में टिप्पणी करना अभी जल्दबाजी होगी लेकिन उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि गार्ड ने हनीफ को ईशनिंदा को लेकर मारने का दावा किया है.
सोशल मीडिया पर इस घटना का एक वीडियो शेयर हो रहा है जिसमें गार्ड को हत्या के बाद कहते हुए सुना जा सकता है कि मैनेजर ने पैगंबर का अपमान किया था. हालांकि, बैंक मैनेजर ने अपनी आखिरी पोस्ट में पैगंबर मोहम्मद के कार्टून को लेकर फ्रांस के बहिष्कार की अपील की थी. इस पोस्ट में मैनेजर ने I love Muhammad, My Prophet My Honor जैसे वाक्य भी लिखे थे.
डीपीओ विलायत ने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है. शुरुआती जांच के आधार पर उन्होंने बताया कि मैनेजर और सिक्योरिटी गार्ड के बीच पिछले कुछ समय से झगड़ा चल रहा था. गार्ड को कुछ महीने पहले नौकरी से निकाल दिया गया था लेकिन बाद में उसे फिर से बुलाया गया. हनीफ के साथ कुछ दिनों पहले उसकी बहस भी हुई थी. पाकिस्तानी अखबार डॉन से बातचीत करते हुए पुलिस के सूत्रों ने गार्ड के दावे को लेकर शक जाहिर किया. सूत्रों ने कहा कि उन्हें लगता है कि गार्ड ने मैनेजर की हत्या ईशनिंदा की वजह से नहीं बल्कि अपनी निजी दुश्मनी की वजह से की है.
ट्विटर पर शेयर किए जा रहे वीडियो में मैनेजर की हत्या के बाद भीड़ गार्ड को सपोर्ट करती नजर आती है. भीड़ और सिक्योरिटी गार्ड सड़क पर चलते हुए साथ-साथ नारे भी लगाते हैं. इसके बाद, एक धार्मिक समूह के कुछ नेता भी गार्ड के समर्थन में आ जाते हैं और कायदाबाद पुलिस स्टेशन की छत से अपने समर्थकों को संबोधित करते हैं. इस दौरान, पुलिस मूकदर्शक बनी खड़ी रहती है.
एक अन्य वीडियो में मैनेजर के मामा कहते हैं कि सिक्योरिटी गार्ड ने अपनी निजी दिक्कतों की वजह से हनीफ की हत्या की. उन्होंने सिक्योरिटी गार्ड के दावे को खारिज करते हुए कहा कि हनीफ ने कभी पैगंबर मोहम्मद का अपमान नहीं किया. हनीफ के मामा कहते हैं कि वे मुस्लिम हैं ना कि अहमदिया. उन्होंने मामले की सही तरीके से जांच की मांग की.
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
पाकिस्तान में ईशनिंदा हमेशा से विवादित मुद्दा रहा है. ईशनिंदा करने के अपराध में लोगों को जेल हो सकती है और मृत्युदंड तक भी दिया जा सकता है. कई बार भीड़ कानून अपने हाथ में ले लेती है. यहां कई बार कथित ईशनिंदा को लेकर सरे आम हत्याएं कर दी जाती हैं. ईशनिंदा के बहाने कई बार कमजोर समुदाय को टारगेट भी किया जाता है. साल 2011 में पंजाब के गर्वनर की उनके ही गार्ड ने हत्या कर दी थी. उन्होंने ईशनिंदा की आरोपी ईसाई महिला आसिया बीबी का बचाव किया था. 8 साल जेल की सजा काटने के बाद वह बाहर आईं. कट्टरपंथियों की धमकियों की वजह से आसिया बीबी अपनी बेटियों के पास कनाडा चली गईं.