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विश्व

गलवान-पेंगोंग ही नहीं इन 8 points को लेकर भी चीन और भारत आमने-सामने

aajtak.in
  • 02 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 2:09 PM IST
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भारत और चीन के बीच सीमा का विवाद करीब 6 दशक पुराना है. इसे सुलझाने के लिए भारत ने हमेशा पहल की लेकिन चीन ने कभी अपनी तरफ से ऐसा नहीं किया. कभी लद्दाख, कभी अक्साई चिन, कभी तिब्बत तो कभी डोकलाम और सिक्कम. चीन हर तरफ से जमीनी सीमा का उल्लघंन करने से बाज नहीं आता. इसी वजह से मई से लेकर अब तक चीन और भारत के बीच लगातार सीमा विवाद को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है.

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चीन और भारत के बीच के घुसपैठ को लेकर विवाद होते रहे हैं, क्योंकि हर देश सीमा को अपने नजरिये से देखता है. दोनों देशों के बीच में आज तक किसी तरह का समझौता नहीं हो हुआ है. भारत और चीन के बीच में कई इलाकों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) स्पष्ट नहीं है. इसी वजह से दोनों देशों में तनाव की स्थिति बनती है. आइए जानते हैं कि भारत और चीन के बीच वो कौन से 8 अहम बिंदु या भौगोलिक स्थान हैं, जिसे लेकर दोनों के बीच विवाद चलता रहता है.

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तिब्बत की तकरारः भारत व चीन के बीच तिब्बत, राजनीतिक व भौगोलिक तौर पर कैटेलिस्ट का काम करता था. चीन ने 1950 में इसे हटा दिया. भारत तिब्बत को मान्यता दे चुका है, लेकिन तिब्बती शरणार्थियों के बहाने चीन इस मसले पर कभी-कभी हरकतें करता रहता है. 

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अक्साई चिन रोड समेत अन्य सीमाई सड़केंः लद्दाख इलाके में अक्साई चिन सड़क और ऐसी कई सड़कें बनाकर चीन लगातार निर्माण कार्य कर रहा है. इसकी वजह से भी तनातनी का माहौल बना रहता है. चीन जम्मू-कश्मीर को भी भारत का अंग मानने में आनाकानी करता है, लेकिन पाक के कब्जे वाले कश्मीर को पाकिस्तान का भाग मानने में उसे कोई आपत्ति नहीं है. ये भी एक बड़ी वजह है बवाल की.
 

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3488 किलोमीटर लंबी विवादित सीमाः दोनों देशों के बीच करीब 3488 किमी की सीमा पर कोई स्पष्टता नहीं है. चीन जान-बूझ कर सीमा विवाद हल नहीं करना चाहता. वह सीमा विवाद को समय-समय पर भारत पर दबाव बनाने के लिए उपयोग करता है. इस सीमा को लेकर भारत और चीन के जवानों के बीच अक्सर लड़ाई झगड़े होते रहते हैं. कई बार सैनिक घायल भी हो जाते हैं.

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अरुणाचल प्रदेश पर दावाः चीन पूरे अरुणाचल पर अपना दावा बताता है. अरुणाचल में एक जल विद्युत परियोजना के लिए एशिया डेवलपमेंट बैंक से लोन लेने का चीन ने जम कर विरोध किया. अरुणाचल को विवादित बताने के लिए चीन वहां के निवासियों को नत्थी वीजा देता है. ताकि वहां के लोग चीन आ जा सकें. कई बार अरुणाचल की सीमा पर भी भारत के जवानों के साथ चीन के जवान अभद्रता करते हैं. 

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ब्रह्मपुत्र नदी को लेकर चीन का रवैयाः ब्रह्मपुत्र नदी को लेकर चीन का रवैया कभी भी अच्छा नहीं रहा है. वह इस नदी पर कई बांध बना रहा है. उसका पानी वह नहरों के जरिए उत्तरी चीन के इलाकों में ले जाना चाहता है. भविष्य में इस मसले के बड़ा विवाद बनने की आशंकाओं को ध्यान में रख भारत इस मसले को द्विपक्षीय बातचीत में उठाता रहा है. 

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हिंद महासागर में बढ़ती चीन की हरकतेंः चीन ने पिछले कुछ सालों से हिंद महासागर में अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है. पाकिस्तान, म्यांमार, श्रीलंका और मालदीव के साथ साझेदारी में परियोजनाएं शुरू कर वह भारत को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है. इससे भारत के चारों तरफ उसकी पहुंच हो जाएगी. 

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पीओके पर चीन का चल रहा कामः पाक अधिकृत कश्मीर (POK) और गिलगित बालटिस्तान में चीन कई विकास कार्यों वाली गतिविधियां कर रहा है. बांध बना रहा है. सड़के बना रहा है. पूर्व सेना प्रमुख वीके सिंह ने खुद कहा था कि इन इलाकों में तीन से चार हजार चीनी कार्यरत हैं, जिनमें चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जवान भी शामिल हैं. 

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साउथ चाइना सी से दक्षिण एशिया में अशांतिः दक्षिण चीन सागर में चीन अपना प्रभुत्व कायम करना चाहता है. ताकि अपनी ऊर्जा की जरूरतों को पूरा कर सके. यहां उसे वियतनाम, जापान और फिलीपींस से चुनौती मिल रही है. कुछ साल पहले उसने वियतनाम की दो तेल ब्लॉक परियोजनाओं में शामिल भारतीय कंपनियों को चेतावनी दी थी कि वह साउथ चाइना सी से दूर रहें. इसके अलावा इस इलाके में चीन हमेशा मिलिट्री ड्रिल करता रहता है. जिसकी वजह से इस इलाके के देशों में हमेशा डर का माहौल बना रहता है.  

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