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एचआईवी से ठीक होने वाले पहले व्यक्ति टिमोथी रे ब्राउन की कैंसर से मौत

aajtak.in
  • 01 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 10:45 AM IST
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एचआईवी संक्रमण से मुक्त होने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति टिमोथी रे ब्राउन की कैंसर से मौत हो गई. ब्राउन 54 वर्ष के थे, जिन्हें 'द बर्लिन पेशेंट' के रूप में भी जाना जाता था. ब्राउन के पार्टनर टिम हॉफगेन ने सोशल मीडिया पोस्ट कर बताया कि पांच माह तक कैंसर से लड़ने के बाद ब्राउन की मौत हो गई. 


 

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टिमोथी रे ब्राउन ने ल्यूकेमिया एवं एचआईवी के इलाज के दौरान 2007 में अस्थि मज्जा एवं स्टेम सेल प्रतिरोपित करवाया था. इससे उनका ल्यूकेमिया एवं एचआईवी तो ठीक हो गया, लेकिन वह दोबारा कैंसर से पीड़ित हो गए. इस अमेरिकन केस ने एचआईवी का इलाज करने वाले डॉक्टर्स और एचआईवी पेशेंट को काफी प्रभावित किया. उन्हें एक आशा दी, कि एचआईवी का इलाज संभव है. 

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इंटरनेशनल एड्स सोसाइटी के अध्यक्ष अदीबा कमरुलज़मैन ने कहा, "हम टिमोथी और उनके डॉक्टर गेरो हेटर का आभार व्यक्त करते हैं, जिनकी वजह से वैज्ञानिकों को एक रास्ता मिला, जिससे एचआईवी का इलाज संभव है." 1995 में जब ब्राउन बर्लिन में रह रहे थे. उस दौरान उनमें एचआईवी की पहचान हुई और 2006 में एक प्रकार के रक्त कैंसर का निदान किया गया था, जिसे तीव्र मायलोइड ल्यूकेमिया कहा जाता है, जबकि ब्राउन एक वर्ष से अधिक समय तक एचआईवी के इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ रहे.  

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उनके डॉक्टरों ने कहा कि रक्त कैंसर उनकी रीढ़ और मस्तिष्क में फैल गया था. बताया गया है कि ब्राउन हाल में अपने घर पाम स्प्रिंग्स, कैलिफोर्निया में डॉक्टरों की देखरेख में थे. ब्राउन के पाटर्नर हॉफगेन ने ​कहा कि टिम दुनिया का सबसे प्यारा व्यक्ति था. हॉफगेन ने बताया कि ब्राउन ने अपने इलाज की कहानी बताना अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया था. टिक एचआईवी पेशेंट के लिए एक "आशा के दूत बन गए" जर्मन के डॉक्टर गेरो हेटर जो ब्राउन की देखरेख वर्ष 2007 से कर रहे थे, उनके लिए ये केस अंधेरे में तीर मारने जैसा था. 

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उपचार में ब्राउन की इम्यून सिस्टम को नष्ट करना और CCR5 नामक जीन उत्परिवर्तन के साथ स्टेम कोशिकाओं का प्रत्यारोपण शामिल था, जो एचआईवी का प्रतिरोध करता है. लोगों का एक छोटा सा समूह, जिसमें से अधिकांश उत्तरी यूरोपीय मूल के हैं. उनमें CCR5 म्यूटेशन पाया जाता है, जो  जो उन्हें एड्स पैदा करने वाले वायरस के लिए प्रतिरोधी बनाता है. इस और अन्य कारकों ने उपचार को महंगा, जटिल और अत्यधिक जोखिम भरा बना दिया. 

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अधिकांश विशेषज्ञ कहते हैं कि यह कभी भी सभी रोगियों को ठीक करने का एक तरीका नहीं बन सकता है, क्योंकि उनमें से कई प्रक्रिया से मृत्यु का जोखिम होगा. एचआईवी की शुरुआत 1980 के दशक से हुई थी. वर्तमान में दुनियाभर में 37 मिलियन से अधिक लोग एचआईवी संक्रमित हैं. एड्स महामारी ने लगभग 35 मिलियन लोगों की जान ली है. पिछले तीन दशकों में चिकित्सा प्रगति ने एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी के रूप में जाने वाले दवा संयोजनों के विकास को प्रेरित किया है जो वायरस को रोक कर रख सकते हैं, जिससे कई लोग वर्षों तक वायरस के साथ रह सकते हैं. एडम कैस्टिलजो, जो इस वर्ष अपनी पहचान बताने तक "लंदन रोगी" के रूप में जाने जाते थे, माना जाता है कि 2016 में ब्राउन के समान ट्रांसप्लांट होने के बाद एचआइवी से मुक्त रहे.

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