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भारतीय सेना ने पार की हद, सरहद पर खून-खराबे भरे दौर के लिए रहे तैयार: ग्लोबल टाइम्स

aajtak.in
  • 08 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 2:28 PM IST
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चीन लद्दाख में भारतीय सेना को उकसाने वाली तमाम गतिविधियां कर रहा है. चीन ने सोमवार रात को एलएसी पर हवा में फायरिंग की और उसके बाद भारत पर ही समझौते के उल्लंघन का आरोप मढ़ दिया. भारतीय सेना ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए साफ किया है कि किसी भी स्तर पर भारतीय सेना ने एलएसी पार नहीं किया और फायरिंग सहित किसी भी आक्रामकता का इस्तेमाल नहीं किया. चीनी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) सैन्य और राजनयिक पर बातचीत के बीच समझौते का उल्लंघन कर रहा है और आक्रमक युद्धाभ्यास कर रहा है. चीनी मीडिया में भी इसे लेकर काफी कवरेज हुई है और उसमें इन्हीं झूठे आरोपों को दोहराते हुए भारत को धमकी देने की कोशिश की गई है.

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भारतीय सेना ने चीन की ओर से लगाए गए आरोपों को लेकर जारी बयान में कहा है, '7 सितंबर 2020 को पीएलए सैनिकों ने हमारे एक फॉरवर्ड पोजिशन पर कब्जा करने की कोशिश की, जब हमारे सैनिकों ने चीनी जवानों का मुकाबला किया तो उन्होंने (पीएलए) हवा में कुछ राउंड फायरिंग की. सैनिकों को डराने की कोशिश की, हालांकि गंभीर उकसावे के बावजूद हमारे सैनिकों ने बड़े संयम का परिचय दिया और परिपक्वता दिखाते हुए जिम्मेदार तरीके से व्यवहार किया. भारतीय सेना ने कहा कि हम शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं, हालांकि हर कीमत पर राष्ट्रीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए भी हम प्रतिबद्ध हैं. चीन के वेस्टर्न थिएटर कमांड का बयान उनके घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों को गुमराह करने का एक प्रयास है.'
 

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एक तरफ चीनी सेना उकसाने वाली गतिविधियां कर रही है तो दूसरी तरफ चीन की सरकारी मशीनरी भी पूरी तरह से प्रोपेगैंडा फैलाने में लगी हुई है. चीन की सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने इसे लेकर एक संपादकीय लेख छापा है और इसे फ्रंट पेज पर प्रमुखता से जगह दी है. ग्लोबल टाइम्स के इस संपादकीय लेख का शीर्षक है- 'भारतीय सेना का दुस्साहस भरा दांव पड़ेगा उल्टा' (Indian border troops’ bravado will backfire)
 

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ग्लोबल टाइम्स ने चीन की तरफ से भारतीय सेना पर लगाए गए झूठे आरोपों को ही दोहराया है. अखबार ने पीएलए के वेस्टर्न कमांड के प्रवक्ता के हवाले से लिखा है, भारतीय सेना ने सोमवार को पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर शेनपाओ पहाड़ी इलाके में एलएसी अवैध तरीके से पार किया और उसके बाद गश्त कर रहे चीनी सैनिकों के सामने हवा में फायरिंग की. चीनी सीमा पर गश्त कर रहे दल को इलाके में स्थिरता कायम करने के लिए मजबूरन काउंटर अटैक करना पड़ा. 
 

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ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, चीन-भारत सीमा पर पिछले 40 सालों में शांति कायम रही है. सैन्य टकराव के कुछ मामले सामने आते रहे हैं लेकिन कोई भी गंभीर संघर्ष में तब्दील नहीं हुआ क्योंकि दोनों पक्षों ने किसी भी विवाद की स्थिति में हथियारों के इस्तेमाल नहीं करने का समझौता किया है. हालांकि, जून महीने में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी और कई जवान शहीद हुए लेकिन उस वक्त भी किसी भी तरफ से गोलियां नहीं चलीं.

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ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय सेना पर चीनी सैनिकों की तरफ वॉर्निंग शॉट फायर का बेबुनियाद आरोप लगाते हुए कहा है कि क्या भारत समझौते को रद्द कर रहा है? इसके बाद अखबार ने धमकी भरे लहजे में लिखा है कि अगर ऐसा है तो फिर चीन और भारत को सीमा पर खून-खराबे के एक नए युग के लिए तैयार रहना चाहिए.

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संपादकीय लेख में कहा गया है कि भारत सीमा विवाद को लेकर आक्रामक रुख अख्तियार कर रहा है और भारत में आम लोगों की चीन विरोधी भावना पर कोई नियंत्रण नहीं है. ग्लोबल टाइम्स ने आगे लिखा है, भारत शेखी बघारता है कि पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे के दो ऊंचाई वाले क्षेत्रओं पर उसने कब्जा कर लिया है और चीनी सेना अब उनकी राइफल रेंज में आ गई है. भारत ने चीन को लगातार दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को लेकर भी धमकियां दी हैं. भारत को लगता है कि वो चीन को भारत से अनुरोध करने के लिए मजबूर कर देगा.

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संपादकीय में कहा गया है कि जून महीने में गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद भारत सरकार ने जनभावना के दबाव में सीमा पर तैनात कमांडरों को ऐक्शन लेने की आजादी दे दी. पीएम नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जुलाई महीने में सीमाई इलाके का दौरा भी किया. राष्ट्रवादी ताकतों और रणनीतिक रूप से अंहकार की वजह से भारत चीन को उकसाने पर आमादा है.
 

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ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, हमें भारत को गंभीरता से चेतावनी देनी चाहिए- आपने हद पार कर दी है! आपकी फ्रंटलाइन सेना ने लाइन क्रॉस कर दी है! आपकी राष्ट्रवादी जनभावना बेकाबू है. चीन के प्रति आपकी नीति हद से आगे बढ़ गई है! आप पीएलए और चीनी लोगों को अति आत्मविश्वास की वजह से उकसा रहे हैं लेकिन ऐसा करना किसी पहाड़ी की झूलती चट्टान पर सिर के बल खड़े होने जैसा है.
 

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ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, भारत की राष्ट्रवादी ताकतों को दो बार सोचना चाहिए कि अगर चीनी और भारतीय सेना ने सीमाई इलाके में हथियार इस्तेमाल नहीं करने के समझौते को तोड़ दिया है तो फिर पैंगोंग झील किनारे दो कमांडिंग हाइट्स पर कब्जा करके उसे क्या हासिल होगा? आधुनिक सैन्य संघर्ष में इससे क्या कोई फर्क पड़ता है? भारत और चीन में किसके पास ज्यादा हथियार हैं और किसका सैन्य बजट ज्यादा है, भारतीयों को इस बारे में भी सोचना चाहिए.
 

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धमकियां देने के बाद ग्लोबल टाइम्स के संपादकीय में फिर से शांति की बात कही गई है. इसमें लिखा है, चीन भारत के साथ सीमा पर युद्ध नहीं चाहता है. लेकिन अगर भारतीय पक्ष चीन की सद्भावना को समझने में गलती करता है और वॉर्निंग शॉट्स के साथ पीएलए को रोकने की कोशिश करता है तो उसका ये कदम बैकफायर होगा. चीन युद्ध से बचने के लिए झुकेगा नहीं. भारतीय सेना को नियमों को तोड़ने के नतीजों का सामना करने के लिए अच्छी तरह से तैयार रहना चाहिए. सैन्य संघर्ष की स्थिति में फ्रंटलाइन टुकड़ी का नामोनिशान तक मिट सकता है.

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ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, चीन भारत के साथ सीमा विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना चाह रहा है. लेकिन पीएलए किसी भी संभावित हालात के लिए तैयार है. शांतिप्रिय चीनी राष्ट्रीय एकता और अखंडता की सुरक्षा को लेकर पीएलए के हर कदम का समर्थन करेंगे. हमने अभी तक भरपूर संयम का परिचय दिया है लेकिन भारतीय सेना की चीन को लेकर नासमझी का जवाब असली ऐक्शन से दिया जाएगा.
 

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