नेपाल के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ने सोमवार को भारतीय राजदूत क्वाटरा को समन किया और लिपुलेख की विवादित जमीन पर रोड लिंक बनाने को लेकर नाराजगी जाहिर की. विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ने बताया कि भारतीय राजदूत विनय क्वाटरा को सीमा विवाद पर नेपाल सरकार के रुख से अवगत करा दिया गया है और इस संबंध में एक राजनयिक संदेश भी सौंपा.
इससे पहले नेपाल के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को बयान जारी कर भारत के लिपुलेख में रोडलिंक बनाने के कदम की आलोचना की थी. सूत्रों के मुताबिक, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने सीमा विवाद सुलझाने के लिए भारत से विदेश सचिव स्तर की राजनयिक वार्ता की तारीख जल्द से जल्द तय करने के लिए भी कहा है.
नवंबर महीने में जम्मू-कश्मीर को दो राज्यों में बांटने के बाद भारत ने नया राजनीतिक मानचित्र जारी किया था. इस मानचित्र में कालापानी को उत्तराखंड में दिखाए जाने को लेकर भी नेपाल ने विरोध जताया था और उस वक्त से ही सीमा विवाद के समाधान के लिए वार्ता करने पर जोर दे रहा है.
नेपाल के विदेश मंत्रालय के बयान के बाद भारत ने शनिवार को प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि दोनों पक्ष विदेश सचिव स्तर की वार्ता को आयोजित कराने की प्रक्रिया की तरफ आगे बढ़ रहे हैं. भारत ने कहा था कि कोरोना वायरस के आपातकालीन संकट से सफलतापूर्वक निपटने के बाद वार्ता पर फैसला किया जाएगा.
लेकिन नेपाल ने भारत के इस अनुरोध को ठुकरा दिया है. नेपाल सीमा विवाद के मुद्दे पर जल्द से जल्द वार्ता चाहता है. नेपाल के विदेश मंत्री ग्यावली ने कहा कि नेपाल भारत के साथ बातचीत के लिए कोरोना वायरस संकट के खत्म होने का इंतजार नहीं कर सकता है. अंतरराष्ट्रीय संबंध मामलों की संसदीय समिति के सामने ग्यावली ने कहा, प्रधानमंत्री या विदेश सचिव, हम भारत के साथ किसी भी स्तर की वार्ता करने के लिए तैयार हैं.
ग्यावली ने कहा कि भारत से बातचीत के बाद नेपाल चीन के साथ भी बातचीत करेगा. ग्यावली ने कहा, नेपाल, भारत और चीन अभी तक लिपुलेख के ट्राइजंक्शन पर एक निश्चित स्थिति पर नहीं पहुंच सके हैं. इसलिए हम भारत से बातचीत के बाद चीन के साथ भी वार्ता करेंगे.
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार ने भी कैलाश मानसरोवर लिंक रोड के उद्घाटन को लेकर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा, यह दुखद और आपत्तिजनक है कि जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस से लड़ाई लड़ रही है, उस वक्त भारत ने चीन के मानसरोवर के लिए नेपाली क्षेत्र से गुजरने वाली सड़क का उद्घाटन किया. जबकि 4 नवंबर 2019 में भारत का नया मानचित्र जारी होने के बाद से ही लगातार विदेश सचिव स्तर की वार्ता की मांग की जा रही है लेकिन उसे नजरअंदाज किया गया.