सऊदी अरब और यूएई जैसे मुस्लिम देशों में भारत की पकड़ मजबूत होते देख अब पाकिस्तान 'मुस्लिम-5' की पहल पर आगे बढ़ रहा है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने मंगलवार को कहा कि मलेशियाई प्रधानमंत्री डॉ. महातिर मोहम्मद की पांच मुस्लिम देशों को साथ लाने की कवायद का पाकिस्तान पूरी तरह से समर्थन करता है.
कुआलालंपुर शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए पाक विदेश मंत्री ने कहा कि प्रशासन, विकास, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और उभरते हुए इस्लामोफोबिया की चुनौतियों से निपटने के लिए पांचों मुस्लिम देशों की एकजुटता बेहद जरूरी है.
कतर की राजधानी दोहा में हो रही इस बैठक में पाकिस्तान, तुर्की, कतर, इंडोनेशिया और आयोजक मलेशिया शामिल हुए. मलेशिया के अनुरोध पर 18 से 21 दिसंबर के बीच कुआलालंपुर में एक और मुख्य शिखर वार्ता होगी.
शिखर सम्मेलन का केंद्रबिंदु संप्रभुता, एकता, सुशासन, संस्कृति, पहचान, न्याय,
स्वतंत्रता, शांति, सुरक्षा, व्यापार और निवेश जैसे मुद्दे होंगे. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि वैश्वीकरण के दौर में संस्कृति का क्षय हो रहा है, ऐसे में मुस्लिम दुनिया के लिए जरूरी है कि वह सावधानीपूर्वक अपना रास्ता चुने.
कुरैशी ने कहा, हमें ना केवल ये सुनिश्चित करना होगा कि हम पीछे ना छूट जाएं बल्कि हम अपनी अनूठी सभ्यता, सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय संप्रभुता को संरक्षण भी दे सकें.
कुरैशी ने कहा कि इंडोनेशिया, मलेशिया, पाकिस्तान, कतर, ईरान और तुर्की मिलकर विश्व की कुल जीडीपी में 50 फीसदी और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में 37 फीसदी का योगदान देते हैं. यही नहीं, इन पांच देशों में मुस्लिम दुनिया की 37 फीसदी मुस्लिम आबादी और 18 फीसदी भूभाग शामिल है.
कुरैशी ने कहा कि दुनिया के रणनीतिक समुद्री मार्ग जैसे मलक्का की खाड़ी, ओमान की खाड़ी, होर्मूज स्ट्रेट और बोसफोरस की खाड़ी में ये देश स्थित हैं और इस वजह से सामूहिक विकास और संपन्नता की अपार क्षमता रखते हैं.
कश्मीर मुद्दे पर अलग-थलग पड़ने के बाद पाकिस्तान मुस्लिम देशों को अपने साथ लाने की कोशिश में जुटा हुआ है. पांच मुस्लिम देशों का यह गठजोड़ भी भारत के खिलाफ ही नजर आ रहा है. इस गठबंधन में शामिल मलेशिया और तुर्की भी कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन कर चुके हैं. हालांकि मलेशियाई प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने अपने बयान में कहा कि हम यहां किसी मौजूदा संगठन को चुनौती देने या किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ एकजुट होने के लिए नहीं हैं. पाकिस्तान ने भी मलेशियाई पीएम के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि इस थिंक टैंक में प्रतिभागी देश ना केवल सकारात्मक बहस करेंगे बल्कि ठोस परियोजनाओं पर सहयोग बढ़ाएंगे.
पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान मुस्लिम दुनिया का नेतृत्व करने की कोशिश करता नजर आ रहा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने 'दो
मुस्लिम भाइयों' सऊदी अरब और ईरान के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश की लेकिन उन्हें अपनी इस कोशिश में नाकामी हाथ लगी.
हाल ही में, जब पाक पीएम ने न्यू यॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से मलेशिया और तुर्की के साथ मिलकर इस्लामिक दुनिया की आवाज बनने की कोशिश की तो सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) के नाराज होने की खबरें भी आईं.
संयुक्त राष्ट्र महासभा में इमरान खान ने तुर्की राष्ट्रपति एर्दोआन और
मलेशियाई पीएम महातिर से मुलाकात की थी जहां तीनों नेताओं ने मिलकर मुस्लिम
दुनिया की समस्याओं को उठाया था. इस्लामोफोबिया से लड़ने के लिए तीनों नेताओं
ने इसके लिए एक अंग्रेजी भाषा का चैनल खोलने का भी ऐलान किया था.