पाकिस्तान ने सोमवार को जापान-भारत के हालिया साझा बयान पर आपत्ति जताई है. 30 नवंबर को जापान-भारत के विदेश मंत्रियों और रक्षा मंत्रियों की मुलाकात के बाद जारी हुए साझा बयान में पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी समूहों से क्षेत्रीय सुरक्षा के खतरे का जिक्र किया था.
पाकिस्तान ने इस बयान को पूरी तरह से गैर-जरूरी और अनुचित करार दिया है. भारत-जापान ने अपने साझा बयान में पाकिस्तान से देश में सक्रिय आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने और फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) समेत अपनी अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही को पूरा करने की मांग की थी.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को बयान जारी कर इस कदम को खारिज कर दिया और जापान के कूटनीतिक माध्यमों से पाकिस्तान पर अस्वीकार्य टिप्पणी करने को लेकर चिंता जाहिर की.
बयान में कहा गया, भारत की पाकिस्तान के प्रति दुश्मनी और सीमा पार आतंकवाद के संदर्भ में उसके द्वारा चलाया जा रहा कैंपेन जगजाहिर है. दूसरी बात, ये सब भारत की कश्मीर से मानवाधिकार उल्लंघन से दुनिया का ध्यान भटकाने की रणनीति का हिस्सा है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि एफएटीएफ में भारत की राजनीति करने की कोशिशों के बारे में पूरी दुनिया को पता है. बता दें कि आतंक के खिलाफ ऐक्शन प्लान को पूरा ना कर पाने को लेकर पाकिस्तान पर एफएटीएफ से प्रतिबंध की तलवार लटक रही है, इसके लिए वह बार-बार भारत पर आरोप लगाता रहता है.
पाकिस्तान ने कहा, यह जरूरी है कि साझेदार देश दक्षिण एशिया में शांति और सुरक्षा के मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाएं और जमीनी हकीकत से दूर व एकतरफा बयान जारी करने से बचें. पाकिस्तान ने कहा कि हम भारत के हर प्रोपेगैंडा का उचित जवाब देंगे.
हाल ही में जापान ने संकेत दिया था कि अगर चीन की अगुवाई वाले क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) में भारत शामिल नहीं होता है तो वह भी इस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर सकता है.
जापान ने जोर देते हुए कहा था कि आरसीईपी में भारत की भागीदारी बेहद जरूरी है.