पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान से सैनिकों को निकालने के तौर-तरीकों को लेकर राष्ट्रपति जो बाइडेन की आलोचना तेज कर दी है. अमेरिकी सैनिकों को जल्दबाजी में निकालने की वजह से तालिबान बहुत तेजी से काबुल पर काबिज होने में कामयाब रहा. ट्रंप ने गुरुवार को जारी बयान में किसी अराजकता से बचने के लिए अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षित, धीरे-धीरे और व्यवस्थित तरीके से निकासी का सुझाव दिया. लेकिन सोशल मीडिया पर ट्रंप के बयान को लेकर भ्रम पैदा हो गया.
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बाइडेन प्रशासन ने अपने नागरिकों को निकालने के लिए हजारों अमेरिका सैनिकों को काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भेजे हैं. ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नागरिकों को पहले निकाला जाना चाहिए था, उसके बाद सभी सैन्य सामानों को वापस लाना चाहिए था. इसके बाद उन्होंने सुझाव दिया कि सेना को बाहर निकालने से पहले अमेरिका को ठिकानों पर बमबारी करनी चाहिए.
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ट्रंप ने बाइडेन से कहा, 'पहले आप सभी अमेरिकी नागरिकों को अफगानिस्तान से बाहर निकालते. इसके बाद सभी सैन्य साजो-समान लाते. फिर आप ठिकानों पर बमबारी करते हैं, और फिर मिलिट्री को बाहर निकालते हैं. आप इसे उल्टे क्रम में नहीं करते जैसे कि बाइडेन प्रशासन और हमारे सैन्य जनरलों ने किया. ऐसे काम करते तो कोई अराजकता नहीं फैलती, कोई मौत नहीं होती और उन्हें (तालिबान को) पता भी नहीं चलता कि हम (अफगानिस्तान से) चले गए!'
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लेकिन सैनिकों की वापसी से पहले ठिकानों पर बमबारी करने के ट्रंप के सुझाव ने भ्रम पैदा कर दिया. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई लोग यह कहने लगे कि क्या रिपब्लिकन नेता ने अपने ही सैनिकों पर बमबारी करने के लिए बोल रहे हैं. एक यूजर ने पूछा कि आप फौज को अफगानिस्तान से निकाले बिना ठिकानों पर बमबारी का सुझाव क्यों दे रहे हैं? एक दूसरे यूजर ने लिखा, डोनाल्ड ट्रंप बोल रहे हैं- देवियों और सज्जनों. सैन्य ठिकानों पर बम गिराएं और फिर हमारे सैनिकों को हटा लें! और किसी को पता नहीं चलेगा कि हम चले गए हैं!
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तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा किए जाने के बाद बाइडेन प्रशासन पर निशाना साधते हुए ट्रंप ने एक दर्जन से अधिक बयान जारी किए हैं. बुधवार को, पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि बाइडेन ने 11 सितंबर को अल कायदा के घातक 9/11 आतंकी हमलों की 20वीं वर्षगांठ पर "जश्न मनाने" के लिए सैनिकों की वापसी का फैसला किया था लेकिन अब तालिबान जश्न मना रहा है.
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ट्रंप की तरफ से जारी बयान में कहा गया, "बाइडेन ने 11 सितंबर को जश्न मनाने के लिए ऐसा किया था, लेकिन अब हमारे दुश्मन खुशी मना रहे हैं. यह तथ्य कि ओबामा-बाइडेन द्वारा काबुल में 1 बिलियन डॉलर में निर्मित अमेरिकी दूतावास पर तालिबान का झंडा लहरा रहा है."
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अमेरिका की रिपब्लिकन पार्टी बाइडेन के फैसले पर लगातार सवाल उठा रही है. कई रिपब्लिकन सांसदों ने बाइडेन प्रशासन को एक चिट्ठी लिखी है. इसमें कहा गया है कि तालिबान के हाथ अमेरिकी हथियार लग गए हैं. इनमें UH-60 Black Hawks भी शामिल है. रिपब्लिकन सांसदों ने इस लापरवाही के लिए बाइडेन प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग की है.
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रिपब्लिकन सांसदों ने लिखा कि ये हैरान कर देने वाली बात है कि एक हाई टेक मिलिट्री हथियार जिसे अमेरिकी लोगों के पैसों से खरीदा गया है, वो आज तालिबान के हाथ लग गया है. उन हथियारों को सुरक्षित रखना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए थी. जवानों को वापस बुलाने से पहले हथियारों को अपने पास रखना जरूरी था. रिपब्लिकन पार्टी ने बाइडेन प्रशासन से इस मसले पर पूरा ब्योरा मांगा है.
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