Advertisement

विश्व

तालिबान से लोहा लेने को रूस तैयार, उठाया ये कदम

aajtak.in
  • मॉस्को,
  • 20 जुलाई 2021,
  • अपडेटेड 1:56 PM IST
  • 1/10

तालिबान के हमलों के बीच रूस ने अफगानिस्तान की सीमा के पास युद्धाभ्यास का ऐलान किया है. रूस ने सोमवार को कहा कि वह अगले महीने अफगानिस्तान की सीमा के पास ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के साथ सैन्य अभ्यास करेगा.

रूस ने घोषणा तब की है जब अमेरिकी और नाटो सैनिकों की वापसी के बाद तालिबान के लड़ाके अफगानिस्तान के विभिन्न हिस्सों पर तेजी से कब्जा जमाते जा रहे हैं. इससे अफगानिस्तान के आस-पड़ोस के देश अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं.

(फोटो-रॉयटर्स)
 

  • 2/10

हाल के दिनों में तालिबान के उत्तरी हिस्से पर कब्जा जमाने के बाद अफगानिस्तान सुरक्षा बल के जवानों और शरणार्थियों को जान बचाने के लिए ताजिकिस्तान की शरण लेनी पड़ी है. अफगान सुरक्षा बलों से जंग के बाद तालिबान ने ईरान और पाकिस्तान की सीमा पर स्थापित चौकियों पर भी कब्जा कर लिया है.    

(फोटो-Getty Images)

  • 3/10

रूसी रक्षा मंत्रालय ने जारी बयान में कहा कि संयुक्त युद्धाभ्यास 5-10 अगस्त को अफगान सीमा के पास ताजिकिस्तान में खारबमैदोन ट्रेनिंग ग्राउंड में होगा. रूस के सेंट्रल मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के कमांडर अलेक्जेंडर लापिन ने कहा कि सेना एक सहयोगी देश के क्षेत्र पर अटैक करने वाले सशस्त्र तत्वों को हराने के लिए युद्धाभ्यास करेगी. 

(फोटो-ऱॉयटर्स)
 

Advertisement
  • 4/10

न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ताजिकिस्तान में रूसी सैन्य अड्डे और सेंट्रल मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के सैनिक युद्धाभ्यास में हिस्सा लेंगे. अफगानिस्तान की सीमा पर रूस का युद्धाभ्यास का ऐलान अहम है. रूस तालिबान और अफगानिस्तान सरकार के बीच शांति प्रयासों में भी लगा हुआ है. हाल ही में तालिबान के प्रतिनिधियों ने मॉस्को का भी दौरा किया था.  

(फोटो-रॉयटर्स)
 

  • 5/10

इससे पहले, रूस ने कहा था कि अफगानिस्तान में अमेरिकी मिशन नाकाम रहा है. साथ ही युद्धग्रस्त देश की तेजी से बिगड़ती स्थिति के लिए विदेशी सैनिकों की वापसी के फैसलों को जिम्मेदार ठहराया. यह भी दावा किया गया कि जून में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने तालिबान से निपटने के लिए अमेरिका के सामने सैन्य मदद का प्रस्ताव भी रखा था.

(फोटो-AP)

  • 6/10

असल में, अफगानिस्तान में बिगड़ती स्थिति को लेकर रूस ही सबसे ज्यादा दबाव में है. रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि अफगानिस्तान में अस्थिरता के चलते कुछ आतंकी गुट उज्बेकिस्तान और ताकिजिस्तान के रास्ते रूस में घुसपैठ कर सकते हैं और काकेश और चेचन्या तक पहुंच सकते हैं. रूस को अपने सीमावर्ती सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर भी चुनौती पेश आ सकती है. विश्लेषकों की नजर तालिबान के बदले हुए रवैये पर भी नजर है लेकिन वो आतंकी गुट की 'कथनी और करनी' को देखना चाह रहे हैं.  

(फोटो-रॉयटर्स)
 

Advertisement
  • 7/10

असल में, तालिबान खुद के रवैया में बदलाव किए जाने की बात बार-बार दोहरा रहा है. तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन कई मौकों पर बोल चुके हैं कि किसी देश पर हमले के लिए वो अफगानिस्तान की धरती के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देंगे. 

(तालिबान प्रवक्ता सुहैल शाहीन, फोटो-Getty Images)
 

  • 8/10

अफगानिस्तान की सत्ता में हिस्सेदारी की उम्मीद में तालिबान विभिन्न देशों से राजनयिक संबंध बनाने का प्रयास कर रहा है. तालिबान अफगानिस्तान में निवेश और विकास की बात कर रहा है. लेकिन इसके बावजूद दूसरे देश उस पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी 8 जुलाई को कहा था कि उन्हें अफगान की सेना पर भरोसा है लेकिन वह तालिबान को इसके लायक नहीं समझते.     

(फोटो-AP)
 

  • 9/10

माना जा रहा है कि तालिबान ने अफगानिस्तान के 400 जिलों में आधे पर कब्जा कर चुका है. तालिबान ने अब तक देश के कई महत्वपूर्ण सीमा चौकियों पर कब्जा कर लिया है. तालिबान ने अफगानिस्तान में कई प्रांतीय राजधानियों की भी घेराबंदी की है.

(फोटो-AP)

Advertisement
  • 10/10

अफगानिस्तान में एक दर्जन से ज्यादा राजनयिक मिशनों ने सोमवार को तालिबान के हमलों को तत्काल रोकने का आह्वान किया. राजनयिक मिशनों ने कहा कि हमला, तालिबान के उन दावों के उलट है जिसमें उसका कहना है कि संघर्ष को समाप्त किए जाने के लिए समझौता किया जाना जरूरी है. 

(फोटो-Getty Images)
 

Advertisement
Advertisement