Advertisement

विश्व

इस्लाम को लेकर भिड़े फ्रांस और टर्की, मैक्रों के खिलाफ एकजुट हुए मुस्लिम देश

aajtak.in
  • 26 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 4:29 PM IST
  • 1/15

फ्रांस और टर्की के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. फ्रांस जहां इस्लामिक कट्टरपंथ पर लगाम लगाने की बात कर रहा है तो दूसरी तरफ, टर्की फ्रांस पर इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देने का आरोप लगा रहा है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को ट्वीट किया कि उनका देश कभी झुकेगा नहीं और शांति स्थापित करने के लिए सभी वैचारिक मतभेदों का स्वागत करता रहेगा.

  • 2/15

फ्रांस के एक स्कूल में स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति पर चर्चा के दौरान एक टीचर ने पैगंबर मोहम्मद का कार्टून दिखाया था. पैगंबर का कार्टून दिखाने को लेकर टीचर की सिर काटकर हत्या कर दी गई थी. मैक्रों ने हालिया बयान में हमलावर को इस्लामिस्ट करार दिया था और कहा था कि पैगबंर मोहम्मद के कार्टून को लेकर वो पीछे हटने वाले नहीं है. स्कूली टीचर की हत्या की घटना के बाद से ही फ्रांस में इस्लामिक कट्टरपंथ को लेकर बहस और तेज हो गई है.

  • 3/15

फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने अरबी भाषा में ट्वीट किया, हम कभी घुटने नहीं टेकेंगे. हम शांति कायम करने के लिए सभी तरह के मतभेदों का सम्मान करते हैं. हम नफरत फैलाने वाले भाषणों को स्वीकार नहीं करेंगे. हम तार्किक बहस को संरक्षण देंगे और हमेशा मानवीय मूल्यों की तरफ खड़े होंगे. मैक्रों ने इस्लामिक कट्टरपंथ की आलोचना करते हुए पैगंबर मोहम्मद के कार्टून प्रकाशित होने का मजबूती से बचाव किया.

Advertisement
  • 4/15

इस्लाम को लेकर चल रहे विवाद के बीच टर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दवान ने फ्रांस के राष्ट्रपति को मेंटल हेल्थ ट्रीटमेंट लेने की सलाह दी. इस टिप्पणी से नाराज होकर फ्रांस ने टर्की से अपने राजदूत को वापस बुलाने का ऐलान कर दिया. दरअसल, मैक्रों ने टीचर की हत्या से पहले एक बयान में कहा था कि इस्लाम संकट में है जिसे लेकर टर्की समेत कई मुस्लिम देशों ने आपत्ति जताई थी. कई देशों ने फ्रांस के सामान का बॉयकॉट करने की अपील भी की है.
 

  • 5/15

शुक्रवार को दिए भाषण में एर्दवान ने कहा, ऐसे राष्ट्राध्यक्ष के बारे में क्या कहा जाए जो दूसरे धर्म के लाखों लोगों के साथ इस तरह का बर्ताव करता है, सबसे पहले उन्हें अपने मानसिक स्वास्थ्य की जांच करानी चाहिए. एर्दवान ने कहा, मैक्रों नाम के शख्स की इस्लाम और मुस्लिमों के साथ आखिर समस्या क्या है? मैक्रों को मेंटल चेक अप कराने की जरूरत है. एर्दवान ने ये भी कहा कि उन्हें नहीं लगता है कि साल 2022 के चुनाव में मैक्रों जीत पाएंगे.

  • 6/15

एर्दवान ने आगे कहा, आप (मैक्रों) लगातार मुझे निशाना बना रहे हैं लेकिन इससे आपको कुछ हासिल नहीं होने वाला है. फ्रांस में चुनाव होंगे और हम आपकी किस्मत देखेंगे. मुझे नहीं लगता है कि आप ज्यादा दिन सत्ता में रहने वाले हैं. आपने फ्रांस के लिए कोई उपलब्धि हासिल नहीं की और आपको कम से कम अपने लिए कोई उपलब्धि अर्जित करनी चाहिए.
 

Advertisement
  • 7/15

मैक्रों के कार्यालय ने एर्दवान की टिप्पणी को अपमानजनक बताया है और कहा कि वह अंकारा से अपने राजदूत हार्वे मैग्रो को परामर्श के लिए वापस बुलाने जा रहा है. मैक्रों और एर्दवान दोनों की ही अपनी घरेलू राजनीति की मजबूरियां हैं. मैक्रों पर इस बात को साबित करने का दबाव है कि वो विपक्षी पार्टियों की तरह इस्लामिक कट्टरपंथ को लेकर बेहद सख्त रुख अपना सकते हैं. फ्रांस में पैगंबर मोहम्मद का कार्टून दिखाने वाले टीचर की हत्या के बाद से लोगों के बीच सेक्युलरिजम और इस्लाम को लेकर मतभेद बढ़ गए हैं.

  • 8/15

एर्दवान के ऊपर भी राजनीतिक दबाव है और वह खुद को इस्लामिक दुनिया में सुन्नी आंदोलन के नेता के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं. कश्मीर का मुद्दा हो या अजरबैजान का, टर्की खुद को इस्लामिक दुनिया का मसीहा साबित करने की कोशिश करता रहता है. एर्दवान के कम्युनिकेशन चीफ फहरतीन आल्तन ने ट्विटर पर लिखा, फ्रांस में मुस्लिमों पर अलगाववाद का आरोप लगाना, पैगंबर मोहम्मद के आपत्तिजनक कार्टून छापना और मस्जिदों पर रेड मारना, इन सबका अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से कोई लेना-देना नहीं है. ये सिर्फ मुस्लिमों को प्रताड़ित करने के लिए है और ये बस याद दिलाने के लिए है कि मुस्लिम यूरोप की अर्थव्यवस्था में योगदान दे सकते हैं लेकिन वे कभी इसका हिस्सा नहीं बन सकते हैं.

  • 9/15

फ्रांस के अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रपति एर्दवान की टिप्पणी अस्वीकार्य है. अतिवाद और रूखापन कोई तरीका नहीं है. हम मांग करते हैं कि एर्दावन अपनी नीति में बदलाव लाएं क्योंकि ये हर तरीके से बेहद खतरनाक है. एलिसी के अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर द गार्डियन से कहा कि फ्रांस में लोगों ने इस बात पर गौर किया है कि पैरिस के बाहर टीचर सैमुअल पैटी की निर्मम हत्या के बाद टर्की के राष्ट्रपति ने कोई शोक संवेदना जाहिर नहीं की. अधिकारी ने टर्की के फ्रांस की वस्तुओं के बहिष्कार की अपील को लेकर भी चिंता जाहिर की.

Advertisement
  • 10/15

मैक्रों ने इसी महीने अपने बयान में कहा था कि इस्लाम केवल फ्रांस ही नहीं पूरी दुनिया में एक संकट में घिरा हुआ है और उनकी सरकार दिसंबर महीने में एक बिल लाएगी जिससे इस्लामिक कट्टरपंथ पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी. फ्रांस के राष्ट्रपति ने ऐलान किया था कि मदरसों और मस्जिदों की फंडिंग पर निगरानी और कड़ी की जाएगी और उन्हें विदेशी प्रभाव से मुक्त रखा जाएगा.

  • 11/15

मुस्लिम देशों में सोशल मीडिया पर फ्रांस की चीजों का बहिष्कार करने की अपील तेज हो गई है. टर्की के दोस्त कतर ने इसी सप्ताह फ्रांस के कल्चरल वीक के कार्यक्रम को स्थगित कर दिया. कतर की दो डिस्ट्रिब्यूटर्स चेन ने कहा कि वे फ्रांस की बनी हुई वस्तुओं का बहिष्कार कर रहे हैं. कुवैत की संसद में भी मैक्रों की कड़ी आलोचना की गई. यहां की कई ट्रैवल एजेंसियों ने फ्रांस की यात्रा रोक दी है.

  • 12/15

ईरान की सरकार के प्रवक्ता सईद खातीबेजेदह ने शनिवार को कहा कि दुनिया भर में जिस पैगंबर में 1.8 अरब मुस्लिमों की भारी आबादी की आस्था है, उसके अपमान का कोई स्पष्टीकरण नहीं हो सकता है. मोरक्को के विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि पैगंबर मोहम्मद के कार्टून प्रकाशित करना जारी रखना उकसावे वाली गतिविधि है.
 

  • 13/15

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि एक अच्छा नेता वो है जो मानव जाति को एकता के सूत्र में बांधता है जैसा कि मंडेला ने किया, ना कि लोगों को बांटता है. ये वक्त है जब राष्ट्रपति मैक्रों को लोगों के जख्मों पर मरहम लगाना चाहिए था और ध्रुवीकरण बढ़ाने और अल्पसंख्यकों को टारगेट करने के बजाय उनके लिए जगह बनानी चाहिए थी.

  • 14/15

फ्रांस और उसके नाटो सहयोगी टर्की के बीच विवाद सिर्फ इस्लाम को लेकर ही नहीं है बल्कि कई और मुद्दों को लेकर दोनों आमने-सामने हैं. भूमध्यसागर में समुद्री जलक्षेत्र को लेकर भी टर्की और फ्रांस के बीच विवाद चल रहा है.  पूर्वी भूमध्यसागर में टर्की विवादित जलक्षेत्र में शोध के लिए नैवटैक्स भेज रहा है. लीबिया, सीरिया और आर्मीनिया-अजरबैजान के बीच छिड़े संघर्ष में भी दोनों एक-दूसरे के खिलाफ हैं.

  • 15/15

नागोर्नो-काराबाख में टर्की अजरबैजान की सेना का समर्थन कर रहा है. अजरबैजान की सेना ने रविवार को प्रतिज्ञा ली है कि वो 6 अलग-अलग क्षेत्रों में अपने सैन्य ऑपरेशन जारी रखेगी. टर्की ने लीबिया में सीरियाई लड़ाकुओं को भेजा है जहां टर्की की नजर में फ्रांस त्रिपोली की सरकार को मजबूती से संरक्षण देने में नाकाम रहा. इस वजह से वहां मुस्लिम ब्रदरहुड के विरोधियों के हाथ में सत्ता जाने की नौबत आ पहुंची.

Advertisement
Advertisement