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अफगानिस्तान के गजनी में बम को बॉल समझ खेल रहे थे बच्चे, फटने से 9 की मौत

अफगानिस्तान के गजनी में एक विस्फोटक गोले के ब्लास्ट करने की घटना में 9 बच्चों की मौत हो गई. बताया जा रहा है कि वे उस गोले से खेल रहे थे जब वो विस्फोट कर गया. अफगानिस्तान की धरती में लैंड माइंस दबे हैं, जिसके विस्फोट से अक्सर हादसे होते हैं. यूनाइटेड नेशन में तालिबान ने खुद यह जानकारी दी.

लैंडमाइन ब्लास्ट में 9 बच्चों की मौत लैंडमाइन ब्लास्ट में 9 बच्चों की मौत
aajtak.in
  • गजनी,
  • 02 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 12:05 PM IST

अफगानिस्तान के दक्षिणपूर्वी प्रांत गजनी में एक विस्फोट में 9 बच्चों की जान चली गई. बताया जा रहा है कि उन्हें एक पुराना लैंड माइन या कहें 'विस्फोटक का गोला' मिला था, जिससे वे खेल रहे थे. गोले से खेलने के दौरान वो ब्लास्ट कर गया. एक तालिबानी प्रवक्ता ने बताया कि बच्चों को गजनी प्रांत के गेरो जिले में अपने गांव के पास मिला लैंड माइन दशकों पुराना था.

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तालिबानी प्रवक्ता हमीदुल्लाह निसार ने कहा कि रविवार को हुए विस्फोट में पांच लड़कों और चार लड़कियों की मौत हो गई, जिनकी उम्र 5 से 10 साल थी. अफगानिस्तान को 'Graveyard of empires' कहा जाता है, जहां रूस से लेकर अमेरिका तक का पतन देखा गया.

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विस्फोटक की चपेट में अक्सर आते हैं बच्चे

अब अफगानिस्तान गंभीर गरीबी में है और उन बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है जो अपने परिवारों का समर्थन करने के वास्ते बेचने के लिए स्क्रैप धातु इकट्ठा करते हैं. इस बीच विस्फोटक की चपेट में आने से या तो वे मारे जाते हैं या अपंग हो जाते हैं.

रूसी आक्रमण के दौर का था विस्फोटक

तालिबानी प्रवक्ता हमीदुल्लाह निसार ने दावा किया कि गजनी में जो लैंड माइन विस्फोट हुआ है, वो 1980 के रूसी आक्रमण के समय का है. तालिबानी शासन की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र ने सोमवार को कहा कि अफगानिस्तान में महिलाओं और बच्चों सहित हजारों लोग लैंड माइंस और युद्ध के विस्फोटक अवशेषों से मारे गए या घायल हुए हैं.

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अफगानिस्तान की धरती में दबे हैं लैंड माइंस

अफगानिस्तान की धरती में दबे लैंड माइंस को निकालने का काम भी चल रहा है. यूनाइटेड नेशन ने बताया कि माइन एक्शन टीम ने 3,011 किलोमीटर क्षेत्र को साफ किया है. 1990 के दशक में रूसी सैनिकों के देश छोड़ने के बाद अफगानिस्तान ने कई सालों तक गृह युद्ध देखा है.

1996 में तालिबान के टेकओवर और फिर अमेरिका के आक्रमण के बाद अफगानिस्तान में हालात और ज्यादा बिगड़ गए थे. हालांकि, 2020 में तालिबान ने दोबारा से अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया और वे अंतरिम सरकार चला रहे हैं.

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