
अफगानिस्तान में तालिबानी शासन के आगाज़ के बाद से वहां पर मुश्किल भरे हालात हैं. तालिबान सरकार बनाने की ओर कदम बढ़ा चुका है और इस बीच भारत का फोकस अपने लोगों को वहां से निकालने पर है. बीते दिन करीब 120 लोगों को वायुसेना के विमान द्वारा काबुल से भारत लाया गया, इनमें भारतीय राजदूत और दूतावास पर काम करने वाले अन्य कर्मचारी थे.
काबुल से गुजरात के जामनगर तक का ये सफर इन सभी भारतीयों के लिए आसान नहीं था. लेकिन इससे भी सबसे मुश्किल सफर था इन सभी भारतीयों को काबुल एयरपोर्ट तक सुरक्षित पहुंचाने का. क्योंकि अब काबुल की सड़कों पर तालिबानी लड़ाके खुलेआम घूम रहे हैं, ऐसे में बिना किसी भारतीय को चोट पहुंचाए हर किसी को एयरपोर्ट तक पहुंचाना मुश्किल था.
इस मिशन को किस तरह अंजाम दिया गया, इसकी पूरी डिटेल्स जानिए...
मंगलवार तड़के करीब 14 वाहनों में कुल 130 लोगों को एयरपोर्ट लाया गया था. इनमें भारतीय नागरिक, पत्रकार, राजनयिक, एम्बेसी का अन्य स्टाफ और भारतीय सुरक्षाकर्मी शामिल था. काबुल एयरपोर्ट पर भीड़ होने के कारण विमानों की उड़ान पर रोक लगाई गई थी, ऐसे में वायुसेना को मिशन दिया गया कि इन सभी को सुरक्षित लाया जा सके.
एक सूत्र के मुताबिक, ‘हमारे पास यही मैसेज था कि हर किसी को सुरक्षित निकाला जाए. ये पूरा मिशन बिना किसी दिक्कत के पूरा हो’.
16 और 17 अगस्त का वो वक्त...
इस मिशन को अंजाम देने में तीन सेंटर्स की अहम भूमिका थी, जिसमें काबुल में मौजूद भारतीय एम्बेसी, भारतीय विदेश मंत्रालय और कैबिनेट सचिवालय. तीनों की तालमेल के बाद ही मिशन को आगे बढ़ाया गया. काबुल के आसपास जो भारतीय थे, उन्हें एयरपोर्ट तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग बैच में वाहनों को तैयार किया गया. ऐसे मौके पर किसी भी मिशन से पहले प्रोटोकॉल के तहत एम्बेसी में जरूरी कागजातों को नष्ट किया गया.
पहले फैसला लिया गया था कि सभी को रात में एयरपोर्ट तक सुरक्षित पहुंचाया जाए, लेकिन तालिबान ने नाइट कर्फ्यू का ऐलान कर दिया था. ऐसे में जो भारतीय घर वापसी के लिए तैयार थे, उन सभी से एम्बेसी आने को कहा गया. सभी ने 16 अगस्त की रात एम्बेसी में ही गुजारी और 17 अगस्त की तड़के ये सभी एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए.
काबुल में जहां भारतीय एम्बेसी है, उसके आसपास तालिबानियों ने अपने लड़ाकों को तैनात किया था. किसी को आने-जाने नहीं दिया जा रहा था, लेकिन भारतीयों को कागज दिखाने के बाद एंट्री मिल रही थी. लेकिन अगर कोई अफगानी नागरिक ऐसा करता तो उसे रोका जा रहा था. ऐसे में यही फैसला लिया गया कि वापस जाने वाले भारतीयों को एम्बेसी में ही रखा जाए.
अब सबसे बड़ी चुनौती ये थी कि कैसे इन सभी को एम्बेसी से एयरपोर्ट तक पहुंचाया जाए. ऐसे में कुल 14 व्हीकल का कॉनवे तैयार किया गया, इनमें से आगे-पीछे पायलट व्हीकल भी शामिल रहे. जिसमें स्थानीय भाषा बोलने वाले लोग, स्थानीय रास्तों को जानने वाले लोग थे. एम्बेसी से लेकर एयरपोर्ट तक के रास्ते में कुल 15 चेकपोस्ट आए, जहां तालिबानी तैनात थे.
जैसे-जैसे एक-एक चेकपोस्ट पार हो रहा था, वैसे-वैसे दिल्ली को इसके बारे में जानकारी दी जा रही थी. क्योंकि दिल्ली में भी अधिकारी पूरी रात जागकर इस मिशन को अंजाम देने में जुटे थे. इस बीच भारतीयों द्वारा इस मिशन के बारे में अमेरिकियों को जानकारी दी गई थी, क्योंकि एयरपोर्ट पर अमेरिकी फोर्स ही सुरक्षा मुहैया करा रही थीं.
काबुल एयरपोर्ट से भारत तक का सफर...
इसी तरह एम्बेसी से सभी भारतीयों को किसी तरह एयरपोर्ट तक पहुंचाया गया. इस बीच भारतीय वायुसेना का C-17 ग्लोबमास्टर ताजिकिस्तान होता हुआ काबुल पहुंचा. पहले ये प्लेन दुशान्बे में पहुंचा और उसके बाद 17 की सुबह काबुल पहुंचा. एयरस्पेस की मंजूरी के बाद ये विमान ईरान के रास्ते होते हुए गुजरात के जामनगर पहुंचा. इस सफर के लिए अफगानी और पाकिस्तानी एयरस्पेस का इस्तेमाल करने से बचा गया.
एक सवाल ये भी खड़ा हो रहा है कि क्या भारत ने अपने लोगों को निकालने में देरी की. लेकिन इसका जवाब यही है कि एम्बेसी में सभी अधिकारी अपने-अपने मिशन में जुटे हुए थे, ऐसे में उसके मद्देनज़र ही ये सब प्लान किया गया. अभी भी काबुल में कई देशों के अधिकारी फंसे हुए हैं, जबकि भारत ने आसानी से अपने लोगों को बाहर निकाल लिया.
अब भी जब भारतीय स्टाफ वहां से आ गया है, तब काबुल एम्बेसी में काम करने वाले स्थानीय लोगों को पूरी तरह से नहीं निकाला गया है. भारत द्वारा उनकी सैलरी दी जाएगी. अगर आने वाले दिनों में बैंकिंग को लेकर कोई दिक्कत आती है, तो उसका भी रास्ता निकाला जाएगा.
आगे क्या है भारत का फोकस ?
भारतीय दूतावास से लोगों को निकालने के बाद अब भारत का पूरा फोकस अपने नागरिकों को निकालने पर है. एक बार जब अपने नागरिक आ जाएंगे, तब अफगानिस्तान में रहने वाले हिन्दू, सिख अल्पसंख्यकों को भारत की ओर से मदद पहुंचाई जाएगी. इसके अलावा भारत पहले ही अफगानिस्तानी नागरिकों के लिए नियमों में बदलाव कर चुका है और वीजा नियमों में ढील दी गई है. ऐसे में अब कोई भी अफगानी नागरिक ऑनलाइन वीजा के लिए अप्लाई कर सकता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी की बैठक में भारतीय नागरिकों के सुरक्षित निकालने, हिन्दू-सिख अल्पसंख्यकों को मदद पहुंचाने और सभी अफगानियों को सुविधा देने के निर्देश दिए हैं.